मौसी को चोदा बड़े मजे से

प्रेषक : दिनू …

हैल्लो दोस्तों, आज में आप सभी को जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ, वो
मेरे साथ बीती हुई एक सच्ची घटना है और यह घटना आज से करीब एक महीने पहले की है। दोस्तों
यह घटना मेरे साथ घटी उस समय कुछ देर तक तो मेरे होश ही उड़ चुके थे, मेरे माथे पर
डर की वजह से पसीने की कुछ बुँदे चकम उठी थी। दोस्तों में उस समय क्या महसूस कर
रहा था? वो सब में आप सभी को किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता, लेकिन में
उम्मीद करता हूँ कि इस रोचक घटना को पढ़कर एक पल तो आप सभी लोग भी चकित जरुर हो जाएँगे
और अब में अपनी आज की उस कहानी को शुरू करता हूँ।

दोस्तों सबसे पहले में आप सभी को मेरे परिवार से परिचित करा दूँ और आप
लोग उसके बाद मेरी इस सत्या कथा का पूरा पूरा आनंद ले सकते है। दोस्तों में अपने माँ
बाप का बस एक ही बेटा हूँ, अभी मेरी उम्र 19 साल है और मैंने अभी बीकॉम का पेपर
दिया है, मेरा शरीर हट्टाकट्टा है, लेकिन मेरा रंग सांवला है। हम मुंबई के एक मकान
में एक कमरे में रहते है, जब में पांच साल का था तब मेरे पिताजी का स्वरगवास हो
गया था, मेरी माँ अब जो की 38 साल की है और उनका रंग सांवला और उनके कुल्हे मोटे
है जिसकी वजह से जब वो चलती है, तब उसके कुल्हे बहुत हिलते है। दोस्तों मेरी माँ
अब तक एक फेक्टरी में काम करके मेरी पढ़ाई लिखाई का पूरा खर्चा उठा रही थी और पिछले
दो साल से में भी एक प्राइवेट कंपनी में पार्ट टाइम कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करता
हूँ और में काम करने के साथ साथ अपने कॉलेज भी जाता हूँ। दोस्तों हमारे घर में अब
केवल तीन सदस्य रहते है एक में, मेरी माँ और मेरी मौसी। मेरी मौसी की उम्र 36 साल
है और वो भी विधवा है, उनके पति का देहांत करीब तीन साल पहले ही हुआ था और उनकी अपनी
कोई भी औलाद नहीं थी और इस वजह से मेरी माँ ने मेरी मौसी को भी अपने पास ही रहने
के लिए बुला लिया। फिर तब से वो दोनों ही साथ एक ही फेक्टरी में काम करने जाने
लगी।

दोस्तों हमारे पास एक ही कमरा होने की वजह हम तीनो हमेशा साथ ही सोते
थे, मेरे पास में मेरी मौसी सोती थी और मौसी के पास मेरी माँ सोती थी और हमेशा रात
को सोते समय मेरी माँ-मौसी अपनी ब्रा और पेटीकोट उतारकर केवल मेक्सी पहनकर सोती थी।
फिर वो दोनों दिन में साड़ी, ब्लाउज और ब्रा-पेंटी पहनती और में रात के समय केवल लुंगी
और अंडरवियर पहनकर सोता था। एक दिन अचानक रात को करीब 12:30 बजे मेरी नींद खुल गई
क्योंकि उस समय मुझे पेशाब करने जाना था और फिर मैंने देखा कि उस समय मेरी मौसी की
मेक्सी उनकी कमर तक सरकी हुई थी और वो अपने मुहं से धीमी आवाज से आहह्ह्ह् ऊऊइईईई
की आवाज़े निकाल रही थी। अब मैंने देखा कि वो उस समय अपने एक हाथ की उंगली को अपनी
चूत के अंदर बाहर कर रही थी और उनका एक हाथ मेरी माँ की चूत को सहला रहा था। फिर यह
सब देखते ही मेरा लंड तनकर पांच इंच लंबा और करीब दो इंच मोटा हो गया, कुछ देर के
बाद मौसी शांत होकर सो गयी, शायद उनका पानी झड़ गया और वो इसलिए वो एकदम ठंडी होकर सो
चुकी थी, लेकिन मुझे अब नींद नहीं आ रही थी। फिर बार बार मौसी की वही हरकत अब मेरी
आँखों के सामने नाच रही थी।

फिर कुछ देर बाद में उठकर पेशाब करने चला गया और आने के बाद ना जाने
कब मुझे नींद आ गई, लेकिन में मौसी को अब अपनी कामवासना की नजरों से देखने लगा था।
दोस्तों अगले दिन शनिवार था, मैंने माँ से कहा कि माँ शाम को आज आप चिकन जरुर बनाना,
तब माँ ने मुझसे कहा कि ऑफिस से आते समय तुम चिकन ले आना में बना दूंगी। फिर मैंने
कहा कि हाँ ठीक है माँ में जरुर लेकर आऊंगा। दोस्तों एक बात में आप सभी को बताना ही
भूल गया कि एक दो महीने में मेरी माँ और मौसी कभी कभी विस्की के एक एक पेग भी ले लिया
करती थी। एक दिन में अपने कुछ दोस्तों के साथ एक होटल में पीकर अपने घर आ गया और माँ
ने मुझसे पूछा कि बेटा क्या तुमने क्या आज शराब पी है? फिर मैंने उनको कहा कि हाँ माँ
मेरा एक दोस्त मुझे होटल ले गया और वहाँ हम दोनों ने विस्की पी। अब माँ ने मुझसे कहा
कि बेटा अब तू बड़ा हो गया है और अगर तुझे पीना है तो तू घर लाकर पी लिया कर क्योंकि
बाहर पीने से पैसे ज्यादा लगते है और बाहर पीने की वजह से तुम्हारी आदत भी खराब हो
जाएगी। अब मैंने कहा कि हाँ ठीक है माँ अगली बार से में घर में ही पी लिया करूँगा।

दोस्तों उस दिन के बाद जब भी मेरा मन एक दो महीने में पीने का होता है,
तब में अपने घर पर ही विस्की लाकर पीने लगा था और पीते समय मेरी माँ और मौसी भी
मेरा साथ देती। फिर शनिवार के दिन शाम को ऑफिस से आते समय में अपने साथ चिकन भी ले
आया और साथ में विस्की की बोतल भी ले आया करीब 9:30 बजे माँ ने मुझे आवाज़ देकर
कहा चलो खाना तैयार है आ जाओ। अब मौसी तीन गिलास और विस्की ले आई और हम तीनो साथ
में बैठकर पीने लगे, माँ और मौसी ने केवल एक एक पेग ही पिये और मैंने पूरे तीन पेग
पी लिए और खाना खाने के बाद माँ-मौसी ने सभी काम को खत्म करके वो सोने की तैयारी
करने लगी थी और रोज़ाना की तरह हम तीनो सो गये। फिर रात को करीब 1:15 बजे में पेशाब
करने उठा, मैंने देखा कि मौसी उस समय मेरी माँ की तरफ करवट करके लेटी हुई थी और
उनका एक पैर माँ के पैर पर था और माँ की मेक्सी घुटनों के थोड़े ऊपर तक उठी हुई थी,
लेकिन मेरी मौसी की मेक्सी उनके कूल्हों से थोड़ी नीचे तक सरकी हुई थी।

अब में बिना आवाज़ किए पेशाब करके वापस लौट आया, मैंने देखा कि वो दोनों
उस समय बहुत गहरी नींद में सो रही थी शायद विस्की के असर से उन्हे गहरी नींद आ गयी
थी। फिर मैंने धीरे से मौसी की मेक्सी को उनकी कमर से उठा दिया और मुझे ऐसा करते
ही मौसी की झाटो से भरी चूत साफ नजर आने लगी थी। दोस्तों उस समय मौसी का एक पैर माँ
के पैर पर होने की वजह से मौसी की चूत की दोनों काली फांके पूरी फैली हुई थी और चूत
के अंदर का गुलाबी हिस्सा मुझे साफ नजर आ रहा था। अब उनकी चूत को देखकर मेरा लंड तनकर
खड़ा हो गया और लंड मेरी अंडरवियर से उभरकर बाहर आ गया, उसने हल्के हल्के झटके
देने शुरू कर दिए और अब उस वजह से मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया। फिर उसी समय मैंने
उस मनमोहक द्रश्य को देखकर मन ही मन में सोचा कि में उसी समय मौसी की चूत में अपने
लंड को डाल दूँ, लेकिन मेरी इतनी हिम्मत ही नहीं हो रही थी कि में वो काम करता। अब
में मौसी की तरफ करवट करके सोने का नाटक करने लगा था और मैंने अपने लंड को हाथ में
पकड़कर मौसी की चूत के पास रख दिया, लेकिन डरने की वजह से में लंड को उनकी चूत में
डाल नहीं सका।

दोस्तों मुझे डर था कि कुछ भी करने से मौसी जाग जाएगी तो शायद वो नाराज
होकर माँ से मेरी इस हरकत की शिकायत कर देगी और इसलिए में अपने लंड को चूत के पास
लगाकर धीरे धीरे लंड को आगे बढ़ाने लगा। फिर मेरे ऐसा करते हुए कुछ ही देर के बाद
मेरे लंड ने बहुत सारा वीर्य मौसी की चूत पर और उनकी झाटो पर जा गिरा, उसके बाद में
ठंडा होकर ना जाने कब सो गया। दोस्तों सुबह रविवार का दिन होने की वजह से में करीब
11 बजे सोकर उठा, तब मैंने मौसी और मेरी माँ को धीमी आवाज में बात करते हुए सुना। अब
मुझे लगा कि शायद मौसी मेरी शिकायत मेरी माँ से कर रही हो, इसलिए में भी बहुत कान
लगाकर उनकी वो बातें सुनने लगा था।

मौसी : दीदी क्या आपको पता है कि कल रात को क्या हुआ?

माँ : नहीं मुझे नहीं पता कि क्या हुआ? चलो अब तुम ही मुझे बता दो ऐसा
क्या हुआ जो तुम मुझे बताने के लिए इतना बैचेन हो रही हो, वो ऐसी क्या बात है?

मौसी : कल रात को जब में करीब 2:30 बजे पेशाब करने के लिए उठी, तब मैंने
देखा कि दिनु बेटे का लंड उसकी अंडरवियर से बाहर निकला हुआ था।

माँ : हाँ हो सकता है कि शायद उसकी अंडरवियर ढीली होगी, इसलिए उसकी नूनी
बाहर निकल आई होगी? और वैसे भी उसका शरीर अब बड़ा हो चुका है इसलिए ऐसा होना
स्वभाविक है।

मौसी : लेकिन दीदी अब उसकी नूनी, नूनी नहीं रही, अब वो दूसरे मर्दो की
तरह पूरा लंड बन चुकी है।

माँ : अच्छा, तब तो हमे कोई अच्छी सी लड़की देखकर उसकी शादी की तैयारियां
करनी पड़ेगी, खेर तुम अब मुझे यह बात बताओ कि उसका लंड कितना बड़ा था?

मौसी : दीदी मैंने बड़े ध्यान से देखा कि उसका सिकुड़ा हुआ होने के बाद भी
मुझे आकार में बहुत बड़ा लग रहा था।

माँ : अब बहुत आश्चर्य से पूछने लगी “अच्छा, तब तो जब उसका लंड खड़ा होगा तो बहुत
बड़ा होगा?

मौसी : और दीदी में जब पेशाब करके उठी और में अपनी चूत को साफ करने
लगी, उसी समय मेरी हथेली पर झाटो से और चूत की फांको से कुछ चिपचिप प्रदार्थ लगा
शायद नींद में बेटे के लंड का पानी उस पर गिर गया होगा।

माँ : हाँ, में इसलिए तुझसे हमेशा कहती रहती हूँ कि रात में नींद में तू
अपनी मेक्सी का ध्यान रखकर सोया कर क्योंकि अक्सर में देखती हूँ तेरी मेक्सी कमर तक
आ जाती है।

दोस्तों अब में वो बातें सुनकर तुरंत समझ गया था कि रात को जो कुछ भी मैंने
किया था, उसका मौसी ने बिल्कुल भी बुरा नहीं माना। अब में उठकर नहा धोकर नाश्ते का
इंतजार करने लगा था और इतने में मेरी माँ ने मौसी से कहा कि तू दिनु को नाश्ता दे
दे में कपड़े सुखाने जा रही हूँ। फिर कुछ देर बाद मौसी मेरे लिए नाश्ता लेकर आ गई
और वो मेरे पास में ही बैठ गयी। दोस्तों रात की घटना के बाद में मौसी को अपनी कामुक
नजरों से देखने लगा था, जब मेरी नजर उनके बूब्स पर पड़ी तब उन्होंने मुझसे पूछा क्यों
तुम ऐसे मुझे घूरकर क्या देख रहे हो बेटा? अब मैंने कहा कि मौसी आज आप बहुत सुंदर
लग रही हो और मेरे इतना कहते ही वो मेरी बात को सुनकर हँसी और उठकर वहां से चली
गयी। फिर रात को खाना खाने के बाद हम सभी अब सोने की तैयारी में लग गये, लेकिन मुझे
अब नींद नहीं आ रही थी में केवल सोने का नाटक कर रहा था। अब में अपनी हॉट सेक्सी मौसी
को कैसे चोदा जाए यह विचार बना रहा था? करीब 12:45 को मैंने आँख खोलकर देखा, मौसी
आज रात भी कल रात की तरह सोई थी, लेकिन आज उनकी मेक्सी पूरी कमर के ऊपर थी।

अब उनकी चूत मुझे साफ नजर आ रही थी और उनकी खुली हुई चूत को इतना पास
से देखकर मेरा लंड खड़ा होकर उनको चोदने के लिए एकदम तैयार हो चुका था। फिर इतने में
मेरे दिमाग में एक बहुत अच्छा विचार आ गया और उसके बाद मैंने उठकर बल्ब को बंद कर
दिया और में अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगाकर आ गया। अब मैंने मौसी की तरफ अपनी करवट
को करके कल रात की तरह उनकी चूत के मुहं पर अपने लंड को रख दिया और मेरे लंड का टोपा
तेल लगा होने की वजह से बहुत चिकना था और उसके चिकना होने की वजह से लंड का टोपा थोड़ा
सा मौसी की चूत में चला गया। अब मुझे मौसी की गरम चूत का एहसास अपने लंड के टोपे पर
महसूस हुआ और उस वजह से में और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया। फिर मैंने धीरे से ज़ोर
लगाकर अपने टोपे को मौसी की चूत में डाल दिया, मेरे लंड का आधा टोपा जाते ही मौसी
के शरीर में कुछ हरकत हुई। अब मैंने सोचा कि शायद मौसी अब जाग गयी होगी इसलिए कुछ
देर तक में ऐसे ही सोने का नाटक करने लगा था। फिर कुछ देर तक मेरे शरीर से कुछ
हरकत ना होने पर मौसी ने थोड़ा अपने कूल्हों को मेरी तरफ सरका दिया और उस वजह से मेरा
पूरा टोपा उनकी चूत में चला गया।

दोस्तों में, लेकिन बिल्कुल भी समझ नहीं सका कि मौसी ने नींद में यह
हरकत की है या वो ऐसा जानबूझ कर मेरे साथ कर रही है? फिर मैंने थोड़ी सी हिम्मत जुटाई
और अपने एक हाथ को उनके बूब्स पर रख दिया, उसके बाद में धीरे धीरे उनको दबाने भी
लगा था और इतने में मौसी सीधी होकर सो गई। अब उनके ऐसा करने की वजह से मेरा लंड चूत
से बाहर निकल गया और थोड़ी देर के बाद मैंने मौसी का एक हाथ अपने लंड पर महसूस
किया और वो अब मेरे लंड को पकड़कर आगे पीछे कर रही थी। फिर में भी अपने एक हाथ से
उनके बूब्स को दबा रहा था और दूसरे हाथ से उनकी चूत को सहला रहा था यह काम हम लोग
करीब पांच मिनट तक करते रहे। फिर मौसी ने मेरे कान में कहा कि बेटा तुम मेरी चूत
की तरफ अपना मुहं रखकर मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटो और उसको चूसना भी शुरू करो और
में तुम्हारा लंड अपने मुहं में लेकर चूसना शुरू करती हूँ। अब हम दोनों 69 आसन में
होकर एक दूसरे की चूत और लंड को चूमने चाटने लगे थे, में जब अपनी जीभ से मौसी की चूत
की फांको को रगड़ रहा था, तब वो उफफ्फ्फ्फ़ आईईईईई माँ आह्ह्ह की धीरे धीरे आवाज़े
कर रही थी।

फिर कुछ देर बाद उनकी चूत से सफेद पानी बाहर आ गया और उस समय उन्होंने
मेरा सर पूरी तरह से जोश में आकर अपनी चूत पर दबा रखा था जिसकी वजह से मेरे मुहं
पर चूत का पानी आ गया। फिर मौसी ने मुझे अपनी तरफ करते हुए कहा कि बेटा अब मुझसे
रहा नहीं जाता जल्दी से तुम्हारा यह मोटा लंड तुम मेरी चूत में डाल दो। अब में भी इतना
सब करके सुनकर जोश में आ गया था और मैंने मौसी की चूत के नीचे एक तकिया रखकर उनकी चूत
को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया और अपने लंड का टोपा मैंने उनकी चूत के मुहं पर रखकर एक
जोरदार धक्का लगा दिया। दोस्तों मेरे उस एक ही धक्के में मेरा आधा लंड उनकी चूत में
चला गया था और उस जोरदार धक्के की वजह से उनके मुहं से हल्की सी चीख निकल गयी ऊऊईई
माँ आहह धीरे डालो ऊऊह्ह्ह उनकी हल्की चीख को सुनकर अब माँ जाग चुकी थी, लेकिन कमरे
में अंधेरा होने की वजह से वो हमे या हमारी चुदाई को देख ना सकी और फिर उन्होंने
पूछा कि क्या हुआ? मौसी ने धीरे से माँ के कान में कहा कि कुछ नहीं में अपनी चूत में
अपनी उंगली को डालकर अंदर बाहर कर रही थी और मुझसे रहा नहीं गया इसलिए में हल्की सी
चीख उठी।

अब माँ ने वो बात सुनकर कहा कि ठीक है, लेकिन आवाज़ धीरे करो क्योंकि हमारे
पास में दिनु भी सोया हुआ है। दोस्तों वैसे तो उन दोनों ने इतनी धीमी आवाज़ में एक
दूसरे से वो बातें की थी, लेकिन फिर भी रात होने की वजह से मुझे उनकी बात साफ साफ
सुनाई देने लगी। अब में कुछ देर वैसे ही रुका रहा, लेकिन मेरा आधा लंड अभी भी मौसी
की चूत में डला हुआ था और थोड़ी देर बाद मैंने मौसी के होंठो को चूसना शुरू किया
और फिर से सही मौका पाकर मैंने एक जोरदार धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड
पूरा उनकी चूत में चला गया। अब मेरा लंड जड़ तक जाते ही मौसी ज़ोर से चिल्लाने की कोशिश
करने लगी थी, लेकिन मेरा मुहं उस समय मौसी के मुहं में था इसलिए वो चिल्ला ना सकी।
फिर थोड़ी देर के बाद में अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा था जिसकी वजह से
मौसी को जोश आ गया और धीरे धीरे वो ऊऊईईईई ऊफफफ्फ़ और चोदो मुझे कहने लगी थी। अब
में करीब बीस मिनट तक उन्हे वैसे ही धक्के देकर चोदता रहा और इस बीच मौसी एक बार
झड़ चुकी थी। फिर जब मेरा पानी निकलने वाला था मैंने अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकालकर
उनके मुहं में दे दिया और मेरा पूरा वीर्य मौसी के मुहं में पूरा भर गया और वो
मेरे वीर्य को गटकर पीने लगी।

फिर में मौसी के पास में आकर लेट गया, कुछ देर बाद मैंने मौसी के हाथ में
अपना सिकुड़ा हुआ लंड उनको पकड़ा दिया तब मौसी मेरे लंड को सहलाने लगी और उन्होंने
तब मुझसे पूछा कि तुम्हारा मुझे चोदकर क्या अभी भी पेट नहीं भरा? अब मैंने उनको कहा
कि मौसी में अब आपकी गांड भी मारना चाहता हूँ, उन्होंने मेरी उस बात को सुनकर
मुझसे कहा कि बेटा मैंने आज तक कभी भी अपनी गांड नहीं मरवाई और तुम्हारा यह लंड भी
बहुत बड़ा और मोटा भी है मुझे इसकी वजह से बहुत दर्द तकलीफ़ होगी। अब मैंने उनको कहा
कि आप डरो मत में आपके दर्द का ध्यान रखकर धीरे धीरे से इसको अंदर डालूँगा। फिर
मौसी मेरी बात को सुनकर कहने लगी कि हाँ ठीक है बेटा, लेकिन सबसे पहले तुम अपने
लंड पर और मेरी गांड पर ढेर सारा तेल लगा लो, जिसकी वजह से यह तुम्हारा लंड चिकना
होने से आसानी से यह मेरी गांड में चला जाएगा। अब मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है, में
तेल की बोतल लेकर अभी आता हूँ तुम तब तक पेट के बल अपनी गांड को फैलाकर रखना और फिर
में इतना कहकर तेल लेने चला गया। उस समय बहुत ज्यादा अँधेरा होने की वजह मुझे तेल
की शीशी नहीं मिल रही थी और तेल की शीशी को जब में लेकर आया तब मुझे आने में बहुत
समय लग गया।

फिर मैंने देखा कि मौसी अब जैसे मैंने कहा था ठीक वैसे ही पेट के बल लेटी
हुई थी, मैंने उनको कहा कि आप अपने दोनों हाथों से अपनी गांड को पूरा फैला दो जिसकी
वजह से में आपकी गांड में अच्छी तरह से तेल को लगा दूँ। अब उन्होंने मुझसे कुछ नहीं
कहा और अब मौसी ने अपने दोनों हाथों से अपने कूल्हों को पकड़कर अपनी गांड को पूरा फैला
लिया। फिर में अपनी हथेली पर ढेर सारा तेल डालकर उसकी गांड के छेद में तेल लगाने
लगा और तब तक में ढेर सारा तेल लगा चुका था। अब मैंने अपनी एक उंगली को उनकी गांड में
डाल दिया, मेरी उंगली में तेल लगा होने की वजह से मेरे बीच की उंगली बड़ी आसानी से
आराम से फिसलकर अंदर चली गयी, लेकिन उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर एक झटका देकर बाहर खीच
दिया। अब उस वजह से मेरी उंगली गांड से बाहर निकल आई शायद उनको दर्द हुआ होगा। अब मैंने
अपने लंड पर भी बहुत सारा तेल लगा लिया था और मेरे लंड के टोपे पर भी बहुत सारा तेल
लगा लिया था जिसकी वजह से मेरा टोपा आसानी से उनकी गांड में अंदर जा सके। अब मैंने
उनसे कहा कि आप अपने दोनों हाथों से अपने कूल्हों को फैला लो जिसकी वजह से गांड में
लंड डालने में मुझे बहुत आसानी होगी। फिर उसी समय उसने मेरे कहने पर अपने दोनों हाथों
से अपने कूल्हों को उठाकर फैला दिया।

अब अपने लंड का टोपा उनकी गांड के छेद पर रखकर हल्का सा मैंने धक्का लगा
दिया, जिसकी वजह से थोड़ा सा टोपा अंदर जाते ही उन्होंने अपनी गांड को सिकोड़ लिया और
उस वजह से मेरा टोपा गांड से बाहर निकल गया। अब मैंने उनसे पूछा कि आपने गांड को क्यों
सिकोड़ी क्या आपको दर्द हो रहा है? तब उन्होंने केवल अपना सर हिलाकर हाँ का अपना जवाब
मुझे दे दिये। फिर मैंने कहा कि आप अपने मुहं में अपनी मेक्सी का कुछ हिस्सा दबा
लो जिसकी वजह दर्द होगा, लेकिन आपकी आवाज़ मुहं से बाहर नहीं निकलेगी वरना आपकी यह
आवाज़ सुनकर माँ जरुर जाग जाएगी। अब उन्होंने अपने मुहं में अपनी मेक्सी का कुछ
भाग डाल लिया और फिर मैंने दोबारा उनसे कूल्हों को फैलाने के लिए कहा और उनकी गांड
के छेद पर अपने लंड का टोपा लगाकर एक ज़ोर का धक्का मार दिया। अब मेरे लंड का टोपा
पूरा उनकी गांड के छेद में चला गया और उनके मुहं से हल्की सी घून घून की आवाज़ बाहर
आने लगी थी क्योंकि मुहं में अब उनके कपड़ा लगा हुआ था। फिर कुछ देर के बाद मैंने एक
बार फिर से एक जोरदार धक्का लगा दिया और अब मेरा पूरा लंड उनकी गांड में जा चुका
था और उस दर्द की वजह से उनका शरीर अब कांप रहा था।

अब में अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा था अभी उनकी गांड को
धक्के मारते हुए मुझे बस दस मिनट ही हुए थे कि अचानक से किसी ने कमरे के बल्ब को जला
दिया। फिर उस तेज रोशनी में मैंने देखा कि मौसी की जगह पर मेरी माँ लेटी हुई थी और
में इतनी देर से अपनी माँ की गांड में अपने लंड को डालकर धक्के मार रहा था और उस बल्ब
को जलाने वाली मेरी मौसी भी पास ही नंगी खड़ी, मुझे अपनी माँ की गांड मारते हुए
देख रही थी। फिर अचानक से माँ को अपने नीचे लेटा हुआ देखकर मैंने अपने लंड को तुरंत
माँ की गांड से खीचकर बाहर निकाल लिया और माँ ने भी अपने मुहं से वो कपड़ा निकाल
लिया और अब वो मुझसे कहने लगी कि फिर से तुम मेरी गांड मारो जब तुमने आज मेरी गांड
में अपना पूरा लंड डाल ही दिया है तो अब क्या माँ से डरना? मैंने फिर उनकी बात को
सुनकर अपना लंड माँ की गांड में पूरा अंदर डाल दिया और में अपनी माँ की गांड को
तेज तेज धक्के देकर पूरी तरह जोश में आकर मारने लगा। फिर में जब माँ की गांड को
धक्के मार रहा था, तब माँ मुझसे कह रही थी कि बेटा आज तुमने अपनी माँ की गांड की
सील को तोड़ दिया है, हाँ और ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करो अपना यह घोड़े जैसा लंड मुझे
इसके साथ यह सब करके बहुत मज़ा आ रहा है।

अब मैंने धक्के देते हुए माँ से पूछा कि अच्छा माँ तुम मुझे यह बात तो
बताओ कि तुम मौसी की जगह कैसे और कब आ गई? तब उन्होंने मुझसे कहा कि दिनु जब तुम पहली
बार अपना लंड डालकर मौसी को धक्के देकर चोद रहे थे, उसी समय मुझे कुछ शक हो गया था
क्योंकि तुम्हारी मौसी के मुहं से कुछ ऊइईईई आह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ की आवाज़े निकल
रही थी और जब तुम तेल लेने गये। फिर उसी समय तुम्हारी मौसी ने मुझे सब कुछ सच सच बता
दिया और फिर जब तक तुम दोबारा अपनी जगह पर पहुंचे में तुम्हारी मौसी जगह पर अपने
कपड़ो को ऊपर करके नीचे लेट चुकी थी और मुझे पूरी उम्मीद थी कि तुम्हे इतने अँधेरे
में इस बात का बिल्कुल भी पता नहीं चलेगा और ठीक वैसा ही हुआ तुमने मेरी गांड में
अपने लंड को डालकर मेरी गांड को मारना शुरू किया। फिर इस तरह मौसी की जगह में तुमसे
अपनी गांड मरवाने लगी, कुछ देर बाद मुझे भी दर्द के बाद मज़ा आने लगा था और चल अब जल्दी
से तू मेरी चूत में भी अपना लंड डाल दे। अब मुझसे रहा नहीं जाता, तूने जब मुझे
इतना दर्द दे ही दिया है तो में थोड़ा सा और भी दर्द सहने के लिए तैयार हूँ क्योंकि
मेरी इस प्यासी चूत में कई सालो से कोई भी लंड अपनी मोहर नहीं लगा सका है। अब आज
तू इसको शांत कर दे इसकी आग को बुझा दे दिखा मुझे अपना असली दम वो जोश।

फिर मैंने अपनी माँ के मुहं से वो बातें सुनकर बहुत खुश होकर पूरी तरह
जोश में आकर तुरंत ही अपना लंड उनकी गांड से बाहर निकालकर माँ की चूत में डालकर में
वैसे ही तेज धक्के देकर उनकी चुदाई करने लगा था। फिर जब में अपनी माँ की वो मज़ेदार
चुदाई रहा था तब उसी समय मौसी-माँ के मुहं पर अपनी चूत को रखकर रगड़ रही थी, मेरी
माँ अपनी बहन की चूत को चाटकर उसको शांत करने की कोशिश कर रही थी। फिर करीब बीस मिनट
के बाद मैंने अपना वीर्य माँ की चूत में डाल दिया, इस चुदाई के बीच माँ तीन बार झड़
चुकी थी। अब दो महीने से में माँ और अपनी मौसी को हर दिन नये नये आसन से चोदता हूँ,
जिसकी वजह से वो दोनों बहुत खुश पूरी तरह से मेरी चुदाई से संतुष्ट रहने लगी है। दोस्तों
यह था, मेरे जीवन का पहला सच्चा सेक्स अनुभव में उम्मीद करता हूँ कि यह आप सभी को
जरुर पसंद आएगा प्लीज आप सभी मेरी किसी भी छोटी बड़ी गलतियों को माफ़ जरुर करे।

धन्यवाद …


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