मेरी रंगरलियाँ और मस्तियाँ

प्रेषक : पूजा …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम पूजा है और मेरे घर पर मेरे अलावा मेरे पापा मम्मी और भाई रहता है। मेरा भाई मुझसे एक साल बड़ा है, लेकिन हम दोनों एक ही क्लास में पढ़ते है, क्योंकि स्कूल टाईम में मुझे एक क्लास मोनिटर बनाया गया था। दोस्तों मेरी उम्र 19 साल है और मेरा भाई 20 साल का है, मेरे मम्मी, पापा दोनों ही सरकारी नौकरी करते है और हम दोनों अपने ही शहर से दूर दूसरे शहर में अपनी पढ़ाई करते है और में दिखने में बहुत सुंदर हूँ और मेरे फिगर का आकार 34-30-36 है, वैसे मेरा भाई भी दिखने में अच्छा है और वो एकदम फिट है। दोस्तों अब में आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को ज्यादा बोर नहीं करूँगी, इसलिए में अपनी सच्ची घटना पर आती हूँ और यह कहानी कुछ साल पहले की है, जब हम दोनों भाई बहन स्कूल में हुआ करते थे और हम दोनों ने एक नए स्कूल में अपना दाखिला ले लिया था, जो हमारे घर से बहुत दूर था, इसलिए हम दोनों एक होस्टल में रहते थे। मेरा भाई लड़को के होस्टल में और में खुद लड़कियों के होस्टल में रहती थी, लेकिन कुछ दिनों के बाद हमें होस्टल में खाने की समस्या होने लगी थी, वहां पर एक तो खाना साफ नहीं बनता था और फिर पूरा भी नहीं मिलता था, इसलिए यह बात मैंने अपने भाई को बताई। फिर उसने मुझसे कहा कि मेरे होस्टल में भी बिल्कुल यही समस्या मेरे साथ भी है, लेकिन हमे इस समस्या का कोई समाधान नहीं मिल पाया।

फिर हमारे दिन धीरे धीरे ऐसे ही गुजरने लगे और कुछ दिनों के बाद मेरे भाई की दोस्ती हमारे स्कूल के पास बने एक सरकारी कॉलेज के कुछ लड़को के साथ हो गई थी। दोस्तों वो लड़के उम्र में तो मेरे भाई से बहुत बड़े थे, लेकिन उसके वो साथ बहुत अच्छे से घुल मिल गये थे, वो लड़के बहुत बार स्कूल में चक्कर मारने आते थे और स्कूल की लड़कियों पर लाईन भी मारते थे और उनमें से एक दो लड़के बहुत बार मुझ पर भी लाईन मारते थे, लेकिन स्कूल में मेरे भाई के होने की वजह से मैंने कभी भी किसी लड़को में ज्यादा रूचि नहीं दिखाई थी। फिर एक दिन मुझे मेरे भाई ने बताया था कि उन्होंने पास ही में एक कोठी किराए पर ली हुई है, जिसमें वो 5-6 लड़के एक साथ रहते है और उन लोगों ने वहीं पर खाना बनाने के लिए नौकर रखा हुआ है और वो लोग मेरे भाई को भी अपने पास रहने के लिए बुला रहे थे, इसलिए मेरा भाई भी उनके कहने पर उनके पास रहना चाह रहा था।

अब अपने भाई की पूरी बात सुनकर में उससे बोली कि प्लीज भाई मुझे भी तुम अपने साथ रख लो, यहाँ का खाना खा खाकर में बहुत तंग हो गई हूँ और मेरी मेरे साथ रहने वाली लड़कियों से भी ज्यादा नहीं बनती है, प्लीज़ भाई हम दोनों साथ रहेंगे तो हम दोनों पढ़ाई भी अच्छे से कर पाएँगे और फिर मेरी पूरी बात को सुनकर मेरा भाई मुझसे कहने लगा कि यार, लेकिन वहां सिर्फ़ लड़के लड़के रहते है, तेरा वहां रहना ठीक नहीं होगा और शायद वो लोग तुझे रहने की इजाजत भी नहीं देंगे।

फिर मैंने उससे कहा कि भाई आप एक बार बात तो करके देखो प्लीज़ मेरी वजह से उनको कभी कोई समस्या नहीं होगी, तो भाई ने कहा कि चल में उनसे बात करके देखता हूँ और अगले दिन सुबह क्लास में आते ही भाई ने मुझे बताया कि वो लोग तुझे साथ में रखने के लिए तैयार हो गये है और में अपने भाई की उस बात को सुनकर बहुत खुश हो गई और अब में मन ही मन सोचने लगी कि चलो अब होस्टल के गंदे खाने से तो छुटकारा मिलेगा। फिर कुछ दिनों बाद भाई ने और मैंने उनके साथ रहना शुरू कर दिया, वो घर बहुत बड़ा था और नीचे दो बेडरूम एक लॉबी और बड़ा सा रूम था और उसमें दोनों रूम से जुड़े हुए दो बाथरूम भी थे और उसके ऊपर दो रूम उनसे जुड़े हुए बाथरूम थे। मेरा और भाई का रूम ऊपर वाला था, जिसमें एक डबल बेड लगा हुआ था और उस घर में हमारे अलावा 6 लोग रहते थे। अब उनमे से राजू और असलम लगभग 35 साल के थे, जिनका शहर में अपना कोई व्यापार था। काला, नदीम और नदीम, जो करीब 30 साल के थे, यहां पास के किसी गाँव के रहने वाले थे और वो सिर्फ़ मोज मस्ती के लिए यहां पर रहते थे और यह सभी बहुत ही अमीर घरो से थे, इसलिए इनको यहां पर रहने में कोई भी समस्या नहीं होती थी और अशोक जो कि 24-25 साल का था और वो पास ही के सरकारी कॉलेज में पढ़ता था। दोस्तों राजू और असलम इस ग्रूप के लीडर टाईप थे, जब में पहले दिन वहां पर रहने गई तो शाम को एक बड़े से रूम जहाँ पर सोफा सेट, टेबल और टी.वी. रखा हुआ था, सब लोग वहां पर बैठे हुए थे और मेरे भाई ने मुझे उन सबसे मिलवाया मिलते टाईम ही मैंने गौर किया कि उन सबकी नज़रे मेरे बूब्स पर थी। फिर सबसे मिलने के बाद मुझे राजू और असलम ने वहां रहने के तरीके नियम बताए, पहले राजू ने मुझसे कहा कि यहां पर हम सब लड़के बिल्कुल खुलकर रहते है और पूरा पूरा मजा करते है, यहां पहले भी लड़कियां आती रहती है, लेकिन ऐसे नहीं वो यहां पर किसी ना किसी की गर्लफ्रेंड होती है या फिर कुछ (दोस्तों इस कुछ और का मतलब मुझे बाद में धीरे धीरे पता चला) अगर तुमको इससे समस्या हो तो तुम यहां से जा सकती हो।

फिर असलम ने कहा कि एक और जरूरी बात आज तो हम अच्छे से बनकर बैठे है, लेकिन हम हमेशा कैसे भी बैठे होते है, तुम यहां पर कुछ भी करो, हमे इससे कोई भी समस्या नहीं, लेकिन हम ज्यादातर यहां पर अंडरवियर में ही बैठे होते है, अगर तुमको ठीक ना लगे तो तुम अपने रूम में ही रहना, बाकी खाना बनाने वाला हमेशा यहीं पर रहता है, तुम्हारा जो मन करे वो बनवाना और खाना टी.वी. देखना कोई समस्या नहीं। फिर काला मुस्कुराते हुए बोला हम तो टी.वी. हमेशा शाम को सिर्फ़ अंडरवियर पहनकर ही देखते है, तुम्हारा मन करे तो तुम भी पेंटी पहनकर देख लेना, हमे इस बात का बिल्कुल भी बुरा नहीं लगेगा, काले की बात को सुनकर सब लोग हंसने लगे और मुझे भी हंसी आ गई और शरमाकर नीचे मुहं करके हंसने लगी और फिर मुस्कुराते हुए वापस मुड़कर में अपने कमरे की तरफ़ चल पड़ी और सीड़ीयों पर चड़ते समय मैंने पीछे मुड़कर देखा तो काला अभी भी मुझे देख रहा था, शायद उसकी नज़र मेरी गांड पर थी और उसको ऐसे देखता देखकर मुझ में अब थोड़ी सी मस्ती सी आई और में जानबूझ कर अपनी कमर को मटका मटकाकर ऊपर जाने लगी और फिर रूम में जाकर बेड पर बैठ गई और पढ़ने लगी, लेकिन पढ़ाई में आज मेरा बिल्कुल भी मन ही नहीं लग रहा था और मुझे बार बार काले का मजाक और उन सबका मुझे ऐसे देखना याद आ रहा था। फिर ऐसे ही समय बीतता चला गया और मुझे पता ही नहीं चला कि कब भाई मेरे लिए खाना लेकर आ गया और मुझे खाना देकर वो फिर से नीचे चला गया। फिर मैंने खाना खाया और ना जाने कब में सो गई।

फिर दूसरे दिन सुबह जब में उठी, तो मैंने देखा कि मेरा भाई मेरे पास ही सो रहा था। फिर मैंने उसे जगाया और स्कूल के लिए तैयार होने को बोला, वो भी उठ गया और तैयार होने लगा और में भी जल्दी से फ्रेश होकर तैयार हो गई, तब तक भाई खाना ले आया और हम दोनों ने साथ में बैठकर खाना खाया और फिर भाई मुझसे बोला कि तू स्कूल के लिए निकल, में थोड़ी देर बाद आ जाउंगा। फिर मैंने उससे पूछा कि क्यों तुझे क्या हुआ है? तब उसने मुझसे कहा कि कुछ बस तू चली जा। मैंने अपना स्कूल का बेग उठाया और में अकेली ही स्कूल के लिए निकल गई। उस समय नीचे कोई भी नहीं था, शायद सब लोग अपने अपने रूम में सो रहे थे और जब में अपने स्कूल से वापस आई तो उस वक़्त भी नीचे कोई नहीं था और थोड़ी देर बाद भाई भी बाहर चला गया। उसके पास शायद अशोक का फोन आया था, क्योंकि वो हमेशा स्कूल के बाद अशोक और बाकी सबके साथ मस्तियाँ मारने चला जाता था। फिर मैंने स्कूल के कपड़े बदल लिए और फिर कुछ देर बाद नीचे आकर टी.वी. देखने लगी और टी.वी. देखते देखते कब पांच बज गये मुझे इस बात का पता ही नहीं चला। उस समय भाई, काला और नदीम घर पर आए और उनके आते ही में उठकर ऊपर अपने रूम में चली गई और अपनी पढ़ाई करने लगी। अब तो करीब हर दिन ही ऐसा चलता और स्कूल से आने के बाद 5-6 बजे तक में अकेली बैठकर टी.वी. देखती और जब कोई आता तो में अपने रूम में आकर पढ़ाई करने लगती और करीब 5-6 दिन ऐसे ही निकल गये।

फिर एक दिन में टी.वी. देख रही थी। तभी काला अचानक से वहां पर आ गया और वो मुझे देखकर मुस्कुराता हुआ मेरे पास आकर बैठ गया, उसे देखकर पहले तो मैंने सोचा कि में अपने रूम में चली जाऊं, लेकिन फिर में ना जाने क्या सोचकर वहीं पर बैठी रही और काला मेरे साथ सोफे पर बैठ गया और वो मुझसे इधर उधर की बातें करने लगा, वो बहुत ही खुले विचार का था। फिर थोड़ी देर में ही में उससे ऐसे खुल गई कि जैसे ना जाने कब से हमारी जान पहचान है, वो हर बात पर मजाक करके मुझसे सट रहा था और कई बार वो मुझसे डबल मतलब की बातें भी करता, जिनको में समझ जाती। दोस्तों उस समय मेरे पास तो नोकिया 1100 था, वो भी इसलिए ताकि मम्मी पापा का जब मन करे वो मुझे कॉल कर सके। फिर काले का आई-फोन देखकर मेरा मन करने लगा कि में सेल्फी क्लिक करूं, लेकिन में उससे माँग नहीं पा रही थी, मुझे बार बार फोन की तरफ़ देखते हुए देखकर उसने मुझसे कहा कि चलाकर देखना है तो तुम देख लो, इसे अपना ही समझो, में उसके मुहं से यह बात सुनकर बहुत खुश हो गई और फिर उसका वो फोन उठकर उससे में अपने फोटो लेने लगी।

अब कुछ देर काला मुझे ऐसे ही देखता रहा और फिर वो मुझसे बोला कि हमारा भी ले लो। दोस्तों उसने यह बात भी डबल मतलब में कही थी, लेकिन उस वक़्त में बिल्कुल नादान सी थी, इसलिए उसकी बात का मतलब समझ नहीं पाई और में उससे बोली कि हाँ ठीक है लेती हूँ और सोफे पर उसके पास आ गई और उसके आगे की तरफ़ बैठकर एक दो फोटो ले लिये, तो काले ने मुझसे कहा कि रूको और वो एक हाथ पीछे से मेरे पेट पर ले आया और उसने मुझे बिल्कुल अपने पास खींच लिया। फिर मैंने महसूस किया कि उसके बाजुओ में बहुत जान थी, उसने मुझे ऐसे खींचा था, जैसे कि में कोई खिलौना हूँ और मेरे अंदर बिल्कुल भी वजन नहीं है। अब वो बिल्कुल मुझसे चिपक गया और वो एक हाथ से फोटो खीँचने लगा और बाद में वहीं पर बैठकर फोटो देखने लगी। उसने बहुत अच्छे तरीके से वो फोटो लिए थे और फिर काला मुझसे बोला कि देखो ऐसे लेते है फोटो, मैंने उसे चिढ़ाते हुए कहने लगी कि रहने दो, में तो इससे भी बहुत अच्छी तरह ले लेती हूँ और में उठकर वहां से भागने लगी। तभी काले ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और सोफे पर गिरा दिया और वो मुझसे फोन लेने की कोशिश करने लगा था और में उसे छिपाने लगी। अब हम दोनों मस्ती करते हुए ज़ोर ज़ोर से हंस रहे थे और ऐसे ही मजाक कर रहे थे, काला इस बहाने से जानबूझ कर कभी मेरे बूब्स को दबा देता और कभी मेरी गांड पर हाथ फेर रहा था।

दोस्तों वैसे तो मुझे इसका उतना ज्यादा एहसास नहीं हो रहा था, क्योंकि मुझे लग रहा था कि उसका हाथ ग़लती से मुझे छू रहा है और मुझे भी अच्छा लग रहा था, क्योंकि मुझ पर भी अभी नई नई जवानी चढ़ रही थी और एक गैर मर्द की बाहों में ऐसे खेलना और उसका मुझे ऐसे दबाना छूना दोस्तों बहुत मज़ेदार था और कुछ देर ऐसे ही मस्ती करते रहे। फिर में बहुत ज्यादा थक गई। फिर मैंने उससे हार मान ली और में बोली कि बस बस फोन ले लो, बस वो हंसने लगा और फिर मेरे ऊपर से हटने लगा। अब मेरे ऊपर से हटते हुए उसने मेरी गांड पर एक हल्का सा थप्पड़ मारा, जिसकी वजह से मेरे मुहं से आऊच की आवाज़ निकल गई और में उसकी तरफ़ देखने लगी, उसने मुझे आँख मारी और बोला अब आई ना लाईन पर, उसकी हरकत से में थोड़ा सा शरमा सी गई और फिर में उससे बोली कि तुम बड़े गंदे हो। तभी दरवाजे से कोई अंदर आया तो मैंने देखा कि वो मेरा भाई और नदीम थे, वो आए उनको अंदर आता देखकर में सोफे से उठी और ऊपर रूम में चली गई। मुझे बहुत अच्छी तरह से पता था कोई ना कोई तो मुझे जरुर पीछे से देख रहा होगा, इसलिए में खुद भी जानबूझ कर अपनी कमर को ज्यादा मटका मटकाकर चल रही थी, में रूम में जाकर फ्रेश होकर बेड पर लेट गई और में काले की हरक़तों के बारे में बहुत गहराई से सोचने लगी थी और ऐसे ही सोचते सोचते वो दिन भी निकल गया।

उसके अगले दिन स्कूल के बाद आज फिर से में बिल्कुल अकेली बैठी हुई टी.वी. देख रही थी। दोस्तों आज जानबूझ कर मैंने स्कर्ट और गहरे गले वाला टॉप पहन लिया था, क्योंकि कल की हरकतो से में थोड़ी हवा में उड़ने लगी थी और यह अक्सर मेरी उम्र की लड़कियों के साथ होता है, जब पहली बार कोई लड़का उनके शरीर के साथ ऐसे मस्तियाँ करता है और में खुद चाहती थी कि काला रोज मेरे साथ ऐसा ही करे, इससे मुझे बहुत अच्छा लगा था और हाँ उस वक़्त मैंने सेक्स वेक्स के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचा था और ना ही में उसके बारे में मुझे ज्यादा खास पता था, में तो बस उस एहसास के मज़े लेना चाहती थी, जो काले ने कल मुझे दिए थे और मुझे थोड़ा सा ऐसा लग रहा था कि काला आज फिर आएगा। दोस्तों मेरे स्कूल की छुट्टी एक बजे होती थी, लेकिन आज तीन बज गये थे और में एकदम अकेली बैठी टी.वी. देख रही थी, मेरा मूड खराब होने लगा था और मुझे टी.वी. देखना भी बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था, में बहुत उदास हो चुकी थी।

फिर थोड़ी देर बाद काला आया और उसे देखते ही मेरे चेहरे पर रोनक आ गई, लेकिन शायद उसने मुझे देखा ही नहीं और वो सीधे अपने रूम मे चला गया। फिर थोड़ी देर बाद रूम से बाहर आया, इस वक़्त उसने बॉक्सर और बनियान पहनी हुई थी, उसका गठीला शरीर देखकर में बहुत हैरान रह गई थी, वाह क्या डोले शोले थे, एकदम हट्टाकट्टा और उसे देखकर तो में हैरान ही रह गई, क्योंकि शर्ट में उसका ऐसा शरीर लगता नहीं था, वो सीधे आकर मेरे पास बैठ गया और मोबाईल को टेबल पर रखकर टी.वी. का रिमोट उठाते हुए बोला और जानेमन क्या हाल है? मैंने उसके पेट पर (घुटनो से थोड़ा ऊपर एक हल्का सा धक्का लगाया) और बोली में कोई आपकी जानेमन नहीं और मुहं बनाकर बैठ गई। फिर उसने झट से मेरी कमर में हाथ डाला और मुझे बिल्कुल अपने पास खींच लिया, में आना नहीं चाहती थी, लेकिन उसने खींच लिया और उसकी ताक़त की आगे मेरा बस नहीं चल सकता था। अब में चुपचाप उसके पास बैठ गई और उसने मुझसे पूछा कि क्या हुआ गुस्सा हो गई। मैंने कहा कि नहीं और में अब चुपचाप बैठकर टी.वी. देखने लगी, उसमें कोई मस्त गाना चल रहा था, वो भी चुपचाप बैठकर टी.वी. देखने लगा था। तभी थोड़ी देर बाद में उसके पास से उठी और फोटो लेने लगी, वो कभी मुझे देखता और कभी टी.वी. को। फिर करीब 8-10 फोटो लेने के बाद में उसके पास आई और पूछने कि क्या इसमें इंटरनेट चलता है? तो उसने मुझसे कहा कि यह पूरा घर वाईफाई से जुड़ा है। फिर मैंने उससे कहा कि मुझे फेसबुक पर यह फोटो अपलोड करनी है और वो मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुराने लगा और फिर बोला कि दिखाओ। मैंने उसे तुरंत वो फोन दे दिया और में उसके साथ बैठकर फोटो देखने लगी, सभी फोटो देखकर उसने मुझसे कहा कि तुम इनको और ज्यादा सेक्सी बना सकती हो। फिर मैंने पूछा कि वो कैसे और अब में उसकी तरफ़ देखने लगी, तो वो मेरे सामने आकर खड़ा हो गया और उसने मुझे भी खड़े होने का इशारा किया, में अब उसके सामने खड़ी हो गई और उसकी लम्बाई करीब 6 फिट थी और मेरी 5 फिट 3 इंच में उसके कंधे तक भी बड़ी मुश्किल से पहुंच रही थी, वो थोड़ा सा झुका और फिर मेरे टॉप को वो थोड़ा सा सेट करने लगा, मेरा टॉप पहले ही गहरे गले का था तो उसने आगे से खींचकर उसे थोड़ा और नीचे कर दिया, जिससे मेरी छाती अब बहुत अच्छी ज्यादा उभरी हुई दिखने लगी थी और वो बार बार मेरे टॉप को सेट करने के बहाने मेरे बूब्स को छू कर रहा था, लेकिन में चुपचाप खड़ी हुई उसकी हरकतो को देख रही थी। फिर थोड़ी देर बाद वो हटा और बोला कि हाँ अब ले लो और देखो मैंने फोन एक हाथ में उठाया और मुस्कुराते हुए एक साथ बहुत सारी फोटो खींच ली और फिर मैंने वो फोटो देखी, जिसमें वो भी मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया था, उन फोटो में मेरी छाती बहुत ही मस्त दिख रही थी, क्योंकि मेरे बूब्स का साईज़ पहले ही 34 था और टॉप नीचे होने से और ऊपर से फोटो खींचने की वजह से मेरे उभार बहुत मस्त दिख रहे थे, इसलिए में वो फोटो देखकर ही शरमा गई और फिर फोन को उससे छिपाने लगी, उसने मुझे एक हाथ से ही उठाकर घुमा दिया और फिर टेबल के ऊपर खड़ा करके मुझसे बोला कि रूको दो मिनट अब तुम और भी ज्यादा सेक्सी लगोगी। मैंने अपनी नज़रे झुकाकर नीचे वाले होंठो को अपने दांत के नीचे दबा लिए और अब में एकदम चुपचाप खड़ी हो गई थी। मेरी स्कर्ट रबर वाली थी तो उसने मेरी स्कर्ट को थोड़ा खोला और फिर उसकी पट्टी को 2-3 बार ऊपर घुमा दिया और फिर टॉप को स्कर्ट के ऊपर अच्छी तरह से सेट कर दिया, जिसकी वजह से अब मेरी स्कर्ट घुटनों से बहुत ऊपर हो गई थी।

फिर उसने मुझसे फोन लिया और मेरी एक फोटो खींच ली। फिर मैंने भी बहुत अच्छे से पोज़ बनाया और फिर उसके पास जाकर फोटो देखने लगी। दोस्तों अब तो में सच में कोई मॉडल लग रही थी, मेरी स्कर्ट छोटी होकर मिनी स्कर्ट लग रही थी। फिर मैंने कहा कि और खींचो ना यह ज्यादा खास नहीं है। फिर काले ने मुझसे कहा कि ठीक है तुम पोज़ बनाओ में खींचता हूँ। फिर में अलग अलग पोज़ बनाने लगी और वो मेरे फोटो लेता रहा। करीब 15-20 फोटो के बाद में उसके पास गई और फोटो देखने लगी, वो फोटो बहुत सेक्सी थी और ऊपर से मैंने पोज़ भी मस्त मस्त बनाए थे, जिससे फोटो और ज्यादा सेक्सी हो गई थी, में बहुत खुश होते हुए बोली कि इससे तो मेरी सभी दोस्त देखकर जल भुन जाएँगी। अब काले ने मेरी कमर पर हाथ रखा और बोला कि तुम हो ही इतनी सेक्सी। फिर मैंने सर उठाकर उसकी तरफ़ देखा और बोली कि रहने दो झूठे, सब मुझे मोटी बोलते है और काला ने कहा कि यार वो पागल है, जो तुझे मोटी बोलते है, पतली पतली मरी हुई सी लड़कियां किसे पसंद आती है, मुझे तो तेरे जैसी लड़कियाँ ही पसंद है, जिसमें सब कुछ भरा भरा हो दबाने में भी मज़ा आए, में उसकी तरफ़ घूरते हुए बोली यह क्या बोल रहे हो दोबारा बोलना? तो काला ने हंसते हुए बोला कि कुछ नहीं यार, बस में तुमसे मजाक कर रहा था और फिर फोन में उसने मेरे फोटो को खोलकर मुझे दे दिया और बोला कि यह लो गुस्सा ना करो, तुम्हारे यह फोटो अपलोड कर लो, फ़ेसबुक का नाम सुनते ही में सारा गुस्सा भूलकर उसमें लग गई।

दोस्तों वैसे मुझे सच में गुस्सा नहीं आया था, बस में उसके मज़े ले रही थी और में फिर से फोटो देखने लगी और सोचने लगी कि कौन सी अपलोड करूं। तब तक काला सोफे पर बैठ गया था और में भी जाकर उसके पास बैठ गई और उससे बोली कि मेरी कौन सी फोटो ज्यादा अच्छी है? वो भी मेरे साथ बैठकर फोन में देखने लगा और फिर उसने एक फोटो चुन लिया, जो कि साईड पोज़ में थी और में उसमें थोड़ा कमर मटका कर खड़ी थी और मेरे दोनों हाथ आगे की तरफ थे, जिसकी वजह से मेरे बूब्स का आकार बहुत मस्त दिख रहा था और में उसमें बहुत सेक्सी लग रही थी, यह फोटो देखकर तो मेरी क्लास की दोस्तों का अब जलना पक्का था। फिर काले के कहने पर मैंने वो फोटो प्रोफाइल फोटो पर काम में ली और फिर में सोफे पर उसके साथ बैठकर पुरानी फोटो पर बातें करने लगी थी। दोस्तों मेरी फ़ेसबुक में मुश्किल से 2-4 लड़के ही थे, जो ज्यादा जुड़े नहीं रहते थे, इसलिए किसी भी लड़के का कोई शब्द नहीं था, सब जवाब मेरी क्लास की लड़कियों के ही थे। फिर मैंने एक एक करके सबका जवाब दे दिया था और तब तक शाम हो चली थी और 6 बजे के आस पास का टाईम हो रहा था। तभी बाहर वाला दरवाजा खुलने की आवाज़ आई। मैंने खिड़की से देखा तो मेरा भाई, अशोक और नदीम अंदर आ रहे थे। फिर मैंने काले से उसका फोन वापस किया और बोली कि चलो में अब ऊपर चलती हूँ। फिर काले ने कहा कि क्या हुआ बैठ जाओ ना, तो मैंने कहा कि नहीं बहुत देर हो गई है, अब थोड़ी पढ़ाई भी कर लेती हूँ, अशोक और नदीम सबसे पहले अंदर आए और मेरा भाई शायद बाईक को घर के अंदर करने चला गया था। फिर उन दोनों ने अंदर आते ही मुझे हैल्लो बोला और काले से हाथ मिलाया। मैंने भी मुस्कुराकर हैल्लो कहा और फिर में ऊपर जाने लगी। दोस्तों आज मेरी स्कर्ट उस वक़्त मिनी स्कर्ट बनी हुई थी, इसलिए जब में ऊपर जा रही थी तो मैंने ऊपर पहुंचते ही थोड़ा सा पीछे मुड़कर देखा तो पाया कि उन तीनों की नजर मुझ पर ही थी और में मन ही मन बहुत खुश होते हुए ऊपर रूम में आ गई और फिर फ्रेश होकर अपनी पढ़ाई करने लगी। उसके बाद यह दिन भी ऐसे ही निकल गया।

फिर अगले दिन स्कूल से जब में घर पर आई तो मैंने देखा कि बाहर कोई भी नहीं था, हाँ, लेकिन टी.वी. चल रहा था और मुझे लगा कि शायद काला घर पर ही है, इसलिए में जल्दी से अपने रूम में गई और फ्रेश होकर बाहर आ गई और आज मैंने थोड़ा सा मेकअप भी कर लिया था, ताकि में और भी ज्यादा आकर्षित दिख सकूं और जब में नीचे आई तो मैंने देखा कि अशोक और काला सोफे पर बैठे टी.वी. देख रहे है, उस समय काला बड़े सोफे पर बैठा हुआ था और अशोक कुर्सी वाले सोफे पर बैठा था, क्योंकि अशोक और काला इस वक़्त सिर्फ़ अंडरवियर में वहाँ पर बैठे हुए थे, इसलिए उनको देखते ही मेरे मन में एक ख्याल आया कि यह ऐसे कैसे नंगे होकर बैठ सकते है? और फिर में वापस ऊपर जाने की सोचने लगी, लेकिन टी.वी. पर उस समय मस्त फिल्म चल रही थी और वो मुझे बहुत अच्छी लगती है, इसलिए में बड़े वाले सोफे पर बैठ गई और फिल्म देखने लगी, लेकिन बीच बीच में मेरी नज़र उन दोनों पर जा रही थी, अशोक बॉक्सर पहन का बैठा था, लेकिन काला तो सफेद कलर का अंडरवियर पहनकर ही बैठा हुआ था। फिर कुछ देर बाद में बहुत आराम से फिल्म देखने के चक्कर में सोफे पर पैर ऊपर करके घुटने मोड़कर थोड़ा लेट सी गई और अब में बहुत आराम से फिल्म देखने लगी। कुछ देर बाद मुझे ऐसा लगा कि अशोक और काला बार बार मुझे देख रहे है, इसलिए मैंने फिल्म देखते देखते अपनी चोर सी नज़र से उनको देखा तो पाया कि अशोक बार बार मुझे देख रहा है और उसका एक हाथ अपने बॉक्सर पर है और वो अपने लंड को हल्के हल्के से सहला रहा है।

तभी काले ने अशोक से कहा कि जा फ्रीज़ से सेब काटकर ले आ, अशोक चुपचाप उठा और रसोई में चला गया। फिर काला आराम से मुझे बोला और जानेमन आज तो हम दोनों एक जैसे है। अब मैंने उसकी तरफ़ देखते हुए उससे बोली कि एक जैसे कैसे? तो उसने मुझसे कहा कि मैंने सफेद रंग की अंडरवियर पहनी हुई है तो तूने भी सफेद कलर की पेंटी पहनी हुई है। दोस्तों उसकी यह बात सुनकर में एकदम से नीचे बैठ गई और मैंने ध्यान ही नहीं दिया कि उस वक़्त मैंने स्कर्ट को मिनी करके पहना हुआ था और वो मेरे घुटने तक मोड़कर बैठने की वजह से उनको मेरी पेंटी दिखने लगी थी, यह बात सोचकर ही मुझे शरम आने लगी थी और इतने में अशोक भी सेब काटकर ले आया और उसने टेबल पर रख दिए, काला ने और अशोक ने सेब खाने शुरू किए और अशोक ने मुझसे कहा कि पूजा तुम भी खाओ ना उसकी बात सुनकर मैंने भी एक टुकड़ा उठाया और खाने लगी, लेकिन में बिल्कुल भी उनकी तरफ़ नहीं देख रही थी। मैंने अपनी नज़रे सीधे टी.वी. पर रखी हुई थी और मेरा मन तो बहुत कर रहा था कि में ऊपर भाग जाऊं, लेकिन फिल्म और काला के चक्कर में वहीं पर बैठी रही और फिर कुछ देर के बाद काला, अशोक इधर उधर की बातें करने लगे और बीच बीच में मुझसे भी बातें कर लेते और 4 बजे तक में वहीं पर बैठी रही और फिल्म खत्म हो गई, लेकिन अशोक वहां से नहीं गया और फिल्म खत्म होते ही में ऊपर अपने रूम में आ गई और कुछ देर लेट गई। उसके बाद पढ़ाई करने बैठ गई और फिर मेरा यह दिन भी ऐसे ही खत्म हो गया और में सो गई। तभी रात को अचानक मेरी आँख खुली मैंने टाईम देखा तो 11 बजे थे और नीचे थोड़ा शोर हो रहा था। फिर मैंने खड़ी होकर खिड़की से नीचे झांककर देखा तो में बहुत हैरान रह गई, क्योंकि मेरा भाई किसी लड़की को स्मूच कर रहा था और सामने सोफे पर अशोक बैठा हुआ था। फिर मैंने ध्यान से देखा तो वो लड़की हमारे स्कूल की ही थी, जो 12th में पढ़ती थी और मेरे भाई के हाथ उसके टॉप के अंदर थे और वो अपनी स्मूच में पूरे खोए हुए थे और उसे ऐसा करते देख एक बार तो मुझे बहुत गुस्सा आया, लेकिन अगले ही पल मेरा गुस्सा खत्म हो गया और अब में बड़े ध्यान से उनको देखने लगी थी, वो कुछ देर तक लगे ही रहे। फिर अशोक भी उठकर लड़की के पीछे चला गया और पीछे से उसके बूब्स दबाने लगा। मेरे भाई ने उसका टॉप उतार दिया, लड़की ने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। अब भाई ने तुरंत उसका एक बूब्स अपने मुहं में ले लिया और वो एक को चूसने तो दूसरे को दबाने लगा था, अशोक थोड़ा आगे बढ़ा और वो लड़की के होंठो को चूसने लगा, वो लोग सोफे पर बैठे हुए थे और उनकी पीठ मेरी तरफ़ थी, इसलिए नीचे से क्या कर रहे है, वो मुझे नहीं पता चल रहा था, लेकिन जब वो लड़की मेरे भाई के ऊपर बैठकर फिर ऊपर नीचे होने लगी, तो में तुरंत समझ गई कि वो अब क्या कर रहे है? कुछ देर वो दोनों ऐसे ही लगे रहे और कुछ देर बाद वो भाई के ऊपर से हट गई और तभी अशोक ने उसे तुरंत दबोच लिया और सोफे पर लेटा लिया था।

दोस्तों अब मुझे अशोक की पीठ कुछ कुछ दिख रही थी और वो धीरे धीरे हिलने लगा, भाई उनके पास से खड़ा हुआ एकदम नंगा था और उसका लंड अभी भी खड़ा हुआ था और वो अपने लंड से कुछ उतार रहा था, शायद वो कंडोम था, जो उसने अभी अभी काम में लिया था। फिर कंडोम उतारकर उसने कचरे के डब्बे में फेंक दिया और फिर सोफे से अपनी अंडरवियर को उठाकर पहन लिया और कुछ देर में अशोक भी फ्री हो गया और उसने भी ठीक वैसा ही किया। फिर मैंने दोनों के लंड देखे और यह सब देखकर मेरी नींद तो अब उड़ ही गई। तभी अंदर से नदीम आ गया और उसके पीछे पीछे एक लड़की थी और पास आते ही मेरा भाई खड़ा हुआ और उसने उस लड़की को पकड़ लिया और स्मूच करने लगा, वो लड़की बिल्कुल ही नंगी थी। फिर वो और मेरा भाई अंदर रूम की तरफ़ चल दिए और दूसरी लड़की बिना कपड़े पहने ही अशोक और नदीम के बीच में आकर बैठ गई, नदीम उसके होंठो को चूसने लगा। तभी काला अंदर से हंसता हुआ बाहर आ गया और उसके हाथ में दारू की बोतल, जो आधी से कुछ कम होगी और एक गिलास जिसमें थोड़ी सी दारू भी थी, वो भी इस वक़्त अंडरवियर में ही था।

अब अशोक ने उससे दारू की बोतल ली और फिर टेबल से तीन गिलास लेकर तीन पेग बना दिए। अब उन तीनों ने गिलास उठाए और पीने लगे, जैसे जोश में पीते है। तभी काला ने ऊपर की तरफ़ देखा, वैसे में उस समय खिड़की के कोने में खड़ी हुई थी, लेकिन शायद उसने मुझे देख लिया और फिर उन तीनो को कुछ बोलकर सीढ़ियो की तरफ़ आने लगा और में तुरंत भागकर बिस्तर पर लेट गई और अपनी आँखे बंद करके दरवाजा खुलने का इंतजार करने लगी। अब दरवाजा खुलते ही मैंने अपनी आँखे बंद कर ली, मुझे पता था कि यह काला ही है और दरवाजा खोलने के बाद वो मेरे पास आया और बोला पूजा, लेकिन में ऐसे ही आँखे बंद करके चुपचाप लेटी रही। फिर कुछ देर शांत रही और अब में आँखे खोलकर देखना चाहती थी कि वो कर क्या रहा है। तभी वो मेरे पीछे लेट गया और उसने मुझे पीछे से ही हग कर लिया और वो मेरी गर्दन पर किस करने लगा, में तो पहले से ही गरम हो गई थी और उसके ऐसे करने से मुझे और मस्ती चड़ने लगी। उसका एक हाथ मेरे बूब्स पर आ गया और वो बड़े प्यार से दबाने लगा और मुझसे एकदम चिपक गया और उसका लंड मुझे मेरी गांड पर महसूस हो रहा था, में थोड़ा सा हिली और अपने घुटने को थोड़ा मोड़कर लेट गई, जिससे मेरी टाँगे खुल गई और उसने अपने लंड को बिल्कुल मेरी चूत से चिपका दिया और उसके लंड की गरमी में बहुत अच्छी तरह से महसूस कर सकती थी, मुझे तो एकदम नशा सा होने लगा था। फिर काले ने मुझे अपनी तरफ़ घुमाया तो में उसकी तरफ़ घूमकर उससे चिपक गई, वो मुझे स्मूच करने लगा और फिर उसने मेरे पैर घुटने से पकड़कर अपने ऊपर रख दिए और फिर मेरी गांड पर हाथ रखकर मुझे अपने से बिल्कुल सटा लिया और में भी उससे चिपक गई। अब उसका लंड बिल्कुल मेरी चूत पर था, जिसकी वजह से में तो बिल्कुल मदहोश हो गई थी, में भी अब पूरी तरह से जोश में आ चुकी थी और अब में भी उसे स्मूच कर रही थी। तभी नीचे से मेरे भाई की आवाज़ आई तो काले ने मुझसे कहा कि जान तेरा भाई आ रहा है, इतना कहकर उसने ज़ोर से मेरे दोनों बूब्स को दबा दिए, जिसकी वजह से मेरे मुहं से हल्की सी चीख निकल गई, आह्ह्ह ऊउककच्छ वो मुस्कुराया और बोला कि मेरा जाने का मन तो नहीं कर रहा है, लेकिन बात बढ़ाने से अच्छा है कि में चला जाऊं और फिर मुझे एक किस करके वो बाहर चला गया और उसके जाने के बहुत देर बाद तक उसके लंड की चुभन, गरमी मुझे मेरी चूत पर महसूस होती रही और फिर ना जाने कब तक में काला के ख्यालो में खोती हुई ना जाने कब सो गई, मुझे पता नहीं चला ।।

धन्यवाद …


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