बहन और चाची को रात में चोदा

प्रेषक : सुमित …

हैल्लो दोस्तों, जैसा कि मैंने मेरी पिछली कहानी में आप सभी कामुकता डॉट कॉम के पाठकों को बताया था कि कैसे मैंने मेरी नीयू चाची को चोदा? लेकिन मेरे डोरे अब अनु पर थे। दोस्तों अनु मेरी चचेरी बहन है, लेकिन यहाँ तो सब उल्टा ही हो गया था, क्योंकि में तो अनु को चोदना चाहता था। दोस्तों मैंने अपनी बहन की चुदाई के मज़े लिए थे, मेरी बहन जिसका नाम अवंती है वो एक कॉलेज से बी.कॉम की पढ़ाई कर रही थी और उसका अभी पहला साल चल रहा था। दोस्तों उसके हॉट सेक्सी बदन का आकार 38-26-36 था और वो बहुत ही सेक्सी लगती और मेरी चाची के कहने पर अवंती ने भी मेरी चाची जैसे ही लंबे बाल किए है। अब उसके बाल भी उसके कूल्हों तक हिलते है और उसके बाल भी चाची के बाल जैसे ही सिल्की और घने है, अभी कुछ दिनों पहले उसने अपने बालों को कलर किया, इसलिए तो वो और भी सेक्सी लगती है, उसका रंग एकदम गोरा, लम्बाई 5.6 इंच है, उसके बूब्स बहुत मस्त और बड़े आकार के एकदम गोलमटोल है। दोस्तों जैसा कि मैंने पहले भी अपनी पिछली कहानी में बताया था कि में मेरी चाची को चाचा के दिल्ली से आने तक हर दिन रात जब भी मुझे मौका मिला में उनकी चुदाई करता था। फिर उसके कुछ दिनों के बाद चाचा जी वापस आ गये और इसलिए अब मुझे उस वजह से अपनी चुदक्कड़ चाची की हर दिन चुदाई करने का मौका नहीं मिलता था।

अब में कभी-कभी जब घर में कोई नहीं हो या फिर चाचा को अगर किसी काम की वजह से रात को देरी आना हो, तब ही में अपनी चाची की चुदाई करता था। दोस्तों जैसा कि आप सब जानते है कि जब ठंड के दिन थे, उसकी वजह से आजकल छत पर सोना भी नहीं होता था। अब में मेरी बहन के साथ उसके कमरे में ही सोता हूँ। फिर उस दिन में रात को देरी से घर पहुँचा था और मेरी बहन के कमरे में सोने के लिए चला गया, मैंने देखा कि अवंती ने अपने बदन के ऊपर कंबल ढका हुआ था। फिर कुछ देर बाद मुझे उसकी दोनों जांघो के बीच में कुछ हलचल नजर आने लगी थी, शायद उसको पता नहीं था कि में कमरे में आ चुका हूँ और फिर कुछ देर के बाद वो हलचल अब बंद हो चुकी थी। अब मैंने मन ही मन में सोच लिया था कि अनु को तो बाद में देखेंगे, पहले अवंती को ही में उसकी चुदाई का असली मज़ा दूंगा। दोस्तों उस समय रात के करीब एक बज रहे थे और मैंने सोच लिया था कि आज कुछ भी हो जाए में इसकी चुदाई जरूर करूंगा। फिर में रात के करीब तीन बजे उठा और धीरे से अवंती के पलंग के पास चला गया और फिर में अपने एक हाथ से धीरे-धीरे उसकी चूत को कंबल के ऊपर से ही सहलाने लगा, लेकिन वो अभी भी सो रही थी।

फिर दस मिनट के बाद मुझे अंदाज़ा हुआ कि शायद वो जाग गयी है, क्योंकि उसने अंगड़ाई भरी और उसने वो अंगड़ाई शायद मुझे ग्रीन सिग्नल देने के लिए ही भरी होगी। अब में उसका वो इशारा तुरंत समझ गया था और मैंने कंबल के अंदर अपना एक हाथ डाल दिया और उसकी नाइटी को ऊपर उठाकर में उसकी जांघो पर अपना एक हाथ फैरने लगा और फिर मैंने उसका वो कंबल भी अब हटा दिया और उसकी नाइटी को पूरी तरह से ऊपर उठा दिया। अब में उसकी पेंटी के अंदर अपना एक हाथ डालकर उसकी चूत को सहलाने लगा था, जिसकी वजह से वो अब सिसकियाँ लेने लगी थी। फिर मैंने सही मौका पाकर धीरे से उसकी पेंटी को उतार दिया वाह क्या मस्त उभरी हुई चूत थी? और उसकी चूत के ऊपर काले बालों का जंगल भी था और उसमें वो गुलाबी रंग की आकर्षक चूत मुझे साफ नजर आकर अपनी अपनी तरफ आकर्षित किए जा रही थी। फिर मैंने धीरे से अवंती को बोला कि अवंती क्या में बल्ब को चालू कर दूँ? वो कहने लगी कि भैया जो करना है करो और आप पहले दरवाजे की कुण्डी को भी सही से लगा दो। फिर मैंने बल्ब को चालू किया और दरवाजे की कुण्डी को लगा दिया और उसके बाद में वापस अवंती के पास आ गया और अब मैंने उसकी नाइटी को पूरा उतार दिया, जिसकी वजह से वो अब मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा में थी।

अब उसके वो दो गोरे गोलमटोल बड़े आकार के कबूतर उसकी ब्रा से बाहर आना चाहते थे और फिर मैंने उसकी ब्रा को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब उसके बूब्स झट से उभरने लगे थे और में बड़ा चकित अपनी आंखे फाड़ फाड़कर उन्हें देखने लगा था वाह क्या मस्य सेक्सी बूब्स थे? आहह। फिर में उसके दोनों बूब्स को एक-एक करके बारी-बारी से अपने मुँह में भरने लगा और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। अब नीचे मेरा एक हाथ उसकी चूत को सहला रहा था और ऊपर में उसके बूब्स को चूसने के साथ साथ सहला भी रहा था। फिर मैंने उसी समय उसकी चूत के दाने पर अपनी एक उंगली को रख दिया और में दाने को अपनी ऊँगली की मदद से घिसने लगा था जिसकी वजह से वो मज़े मस्ती में पागल हो चुकी थी। फिर मैंने उसके दाने को हिलाया और ज़ोर से हिलाया, वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी उसके मुहं से आहह ऊफ्फ्फ प्लीज भैया आप यह क्या कर रहे हो? अब वो पागल हो रही थी। अब मैंने सिर्फ़ अंडरवियर पहनी हुई थी और उसी समय मैंने वो भी उतार दी, जिसकी वजह से अब मेरा फनफनाता हुआ सात इंच का लंड बाहर आ गया और अवंती तो बस उसको देखते ही रह गयी। फिर मैंने अवंती के बालों से क्लिप को भी निकाल दिया, उसके वो सेक्सी बाल खुले हो गये।

फिर मैंने अवंती के दोनों पैरों को फैला दिया और अब मैंने उसकी रसभरी चूत में अपनी जीभ को डाल दिया और में उसको चाटने लगा आहह्ह्ह ऊह्ह्ह्हह वाह क्या नमकीन स्वाद था उसकी चूत का? अब वैसे भी उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी जिसकी वजह से अब मुझे चूत को चाटने में और भी ज्यादा मज़ा आ रहा था। अब अवंती तो एकदम पागल हो चुकी थी वो मुझसे कहने लगी आहह्ह्ह ऊह्ह्ह और ज़ोर से चाटो मेरी चूत को हाँ पी जाओ इसका सारा पानी आहह्ह्ह में पागल हो जाउंगी, आज पहली बार किसी मर्द ने उसको छुआ है वाह मज़ा आ गया ऊईईईई आह्ह्ह्ह भैया उम्म्म। अब में अवंती की चूत को और ज्यादा जोश में आकर चाटने लगा था, कुछ देर बाद में उसके ऊपर आ गया और उसकी चूत में उंगली करने लगा, जिसकी वजह से वो पागल हो गई उम्म्म्ममम, आह भैया चोदो आज आप अपनी इस बहन को आप मेरी इस आग को शांत करके मुझे वो मज़े दो जिसके लिए में इतना तरस रही हूँ। अब मैंने अवंती से कहा मेरी रानी चलो अब तुम अपने भैया के लंड के साथ खेलो इसको अपने मुहं में भरकर चूसना शुरू करो। फिर उसने मेरे मुहं से यह बात सुनकर तुरंत ही खुश होकर लंड को अपने एक हाथ में थाम लिया और वो उसको ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगी।

अब उसके रेशमी बाल मेरे बदन पर नाच रहे थे, वैसे मेरे अंदर भी एक आग लगी थी, जिसको में भी ठंडा करना चाहता था। अब वो बड़े मज़े से खुश होकर मेरा लंड हिला रही थी, तभी मेरा लंड हिलाते-हिलाते उसने अपनी जीभ को मेरे पेट के ऊपर रख दिया और वो धीरे-धीरे से चाटने लगी। फिर कुछ देर बाद वो मेरे लंड को अपने दोनों बूब्स के बीच में पकड़कर और ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगी थी, जिसकी वजह से मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था। अब उसके रेशमी बाल मेरे पेट के ऊपर थे और वो हिल रहे थे जिसकी वजह से मुझे बड़ी गुदगुदी हो रही थी। अब उसने मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया, अवंती उसको पागलों की तरह चाटने लगी थी। फिर अवंती मेरे लंड को अपने मुँह में हिला रही थी और उसको चाट रही थी, साथ ही चूस भी रही थी। अब वो मज़े मस्ती की वजह से पूरी तरह से पागल हो चुकी थी आहहह्ह्ह वाह क्या हसीन अनुभव था वो? अब वो और ज़ोर से मेरे लंड को चूसने लगी थी। फिर मैंने उसको बोला कि अवंती बाहर निकाल दो, मेरा अब झड़ने वाला है, उसने उसको और ज़ोर से अपने मुँह में दबाया और वो ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी, तभी मेरा लंड उसके मुँह में ही झड़ गया। अब मेरा सारा वीर्य उसके होंठो पर और गालों पर बिखरा पड़ा था।

फिर करीब दस मिनट तक वो लंड को वैसे ही चूसती रही, जिसकी वजह से मेरे लंड में दोबारा से जान आ गयी और अब वो दोबारा से फनफनाने लगा था। फिर मैंने उसको नीचे लेटा दिया और उसके दोनों पैरों को फैला दिया, तभी वो बोली कि भैया धीरे करना, में पहली बार यह सब कर रही हूँ। अब मैंने उसको कहा कि ठीक है मेरी रानी और फिर मैंने उसकी चूत को पूरा फैला दिला और अपना सात इंच का लंड उसकी चूत के मुँह पर रख दिया और एक धीरे से झटका लगा दिया, दर्द की वजह से वो एकदम धीरे से चीखी ऊईईईईईइ आहह। अब लंड का सिर्फ टोपा ही उसकी चूत के अंदर गया था और मैंने उसके मुँह पर अपना एक हाथ रख दिया और इतना ज़ोर से झटका मारा कि मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में चला गया और अब वो बहुत ज़ोर से चीखने का प्रयास कर रही थी, लेकिन मेरा हाथ उसके मुँह पर था और इसलिए उसकी आवाज अंदर ही दबी रह गई थी। अब उसकी चूत फट चुकी थी और चूत से खून भी बाहर आ रहा था, लेकिन मैंने उसको नहीं बताया कि उसकी चूत से खून निकल रहा है। तभी अवंती कहने लगी कि भैया मुझे तेज बहुत दर्द हो रहा है, अब आप इसको बाहर निकाल लो वरना में इस दर्द की वजह से मर ही जाउंगी।

दोस्तों मैंने उसकी एक भी बात नहीं मानी और वैसे ही में उसके शरीर पर पड़ा रहा पूरे बदन को सहलाता रहा, करीब दस मिनट के बाद जब उसका दर्द कुछ कम हो गया, तब मैंने धीरे-धीरे झटके लगाने शुरू किए। अब वो धीरे धीरे जोश में आ रही थी, क्योंकि उसको भी अब बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था वो सिसकियाँ लेते हुए मुझसे कहने लगी थी आहहह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ भाई चोदो तुम मुझे आज फाड़ डालो तुम मेरी चूत को आह्ह्ह्हह्ह भैया अच्छी तरह से चोद दो अपनी बहन को फाड़ डालो मेरी चूत को मुझे वो मज़ा दो जिसके लिए हर कोई अपनी चुदाई करवाना चाहता है। अब उसकी वो सभी बातें सुनकर मेरा जोश पहले से ज्यादा बढ़ रहा था, इसलिए में उसको ज़ोर-ज़ोर से झटके लगा रहा था करीब 15 मिनट के बाद वो झड़ गयी, जिसकी वजह ससे मुझे उसकी चूत में गीलापन महसूस हुआ। अब वो झड़कर ठंडी होकर शांत होने लगी थी, लेकिन मेरी तरफ से झटके लगाने भी भी चालू ही थे। फिर करीब पांच मिनट के बाद वो दोबारा से जोश में आ गयी और अब वो मेरा साथ देने लगी थी और में जोश में आकर उसको चोद रहा था। फिर करीब 15 मिमट के बाद मेरा लंड झड़ने को आया, मैंने तुरंत उसको बाहर निकाल दिया और मैंने उसके मुँह अपना वीर्य निकाल दिया। अब मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा था और अवंती भी मुझे बहुत खुश नजर आ रही थी।

अब में और वो उस रात को चार बार चुदाई के वो मस्त मज़े ले चुके थे, उसको यह काम करने में बहुत आनंद आ रहा था। फिर दूसरे दिन मैंने देखा कि वो बहुत खुश नज़र आ रही थी, उसके चेहरे से रात की खुशी वो संतुष्टि मुझे साफ साफ नजर आ रही थी, जिसकी वजह से हम दोनों को बहुत मज़ा आया। फिर दो सप्ताह तक मैंने उसकी हर रात को जमकर चुदाई करके बहुत मज़े किए किया, इधर नीयू चाची भी जोश में थी। अब दो सप्ताह के बाद मेरे चाचा जी को काम के लिए मुंबई जाना था और में उन दोनों के जाल में फंस गया था, क्योंकि चाची बोली कि चाचा के जाने के बाद तू ऊपर सोने को आ जाना और इधर अवंती मुझे छोड़ नहीं रही थी। फिर मैंने चाची और मेरे बारे में अवंती को साफ साफ बता दिया, वो कहने लगी कि तुम जाकर चाची को बोलो कि आज वो नीचे हमारे कमरे में सोने को आ जाए और फिर हम तीनों आज रात जमकर मज़ा करेंगे। फिर में चाची के पास चला गया और उसको मेरे और अवंती के बारे में बताया, पहले तो वो बड़ी गुस्सा हो गयी, लेकिन कुछ देर समझाने के बाद वो मान भी गयी। फिर रात को चाची हमारे कमरे में आ गई, पहले तो घर के सभी सदस्य सो जाने तक हम तीनों ने बहुत गप्पे लगाए हम हंसी मजाक मस्ती करते रहे।

अब रात के एक बज चुके थे, चाची मुझसे कहने लगी कि बेटा जा जाकर देखो कि वो सब सोए है या नहीं? तब मैंने देखा कि घर के सभी लोग गहरी नींद में सो चुके थे। फिर में कमरे में आया और कमरे का दरवाजा मैंने बंद कर दिया, उसके बाद चाची और अवंती दोनों ही उस समय नाइटी पहने मेरे सामने थी और उन दोनों के लंबे काले घने बाल खुले हुए थे, वो मेरे सामने ही बैठी मुस्कुरा रही थी। अब में क्या करूँ? मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। अब वो दोनों सेक्सी माल मेरे सामने मुझे अपनी चुदाई के लिए आमंत्रित कर रही थी, इसलिए अब में क्या करूँ? मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। फिर चाची मुझसे कहने लगी कि बेटे तू इतना क्यों सोचता है? चल आजा पहले तू मुझसे शुरू कर। अब में चाची के पास आ गया और मैंने चाची को लेटा दिया, उसके बाद में चाची के ऊपर आ गया और अब इधर अवंती अपने बूब्स को दोनों हाथों से सहला रही थी। फिर मैंने चाची की नाइटी को उतार दिया, जिसकी वजह से चाची पेंटी-ब्रा में थी। फिर मैंने चाची की ब्रा और पेंटी को भी उतार दिया वाह वो उस समय क्या मस्त लग रही थी? अब मैंने चाची के बूब्स को अपने हाथों में भर लिया था और में उनको दबाने लगा था।

फिर मैंने चाची के मुँह में अपना मुँह डाला और में उसको पागलों की तरह चूमने लगा था, जिसकी वजह से चाची भी बहुत जोश में आ चुकी थी। अब में चाची के बूब्स को अपने मुँह में भरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वो इतने बड़े थे कि यह सब करना नामुमकिन था। फिर में उसके निप्पल को चूस रहा था और चाची सिसकियाँ भर रही थी सस्सईईईईई ऊईईईई माँ तू यह क्या कर रहा है? तू क्या आज अपनी चाची को मार ही डालेगा? अब में भी बहुत जोश में आ गया था, मैंने अपनी टी-शर्ट और पेंट को उतार दिया, जिसकी वजह से में अब सिर्फ़ अंडरवियर में था। अब में चाची के ऊपर लेट गया और मेरा लंड मेरी अंडरवियर के अंदर से ही चाची की पेंटी को रगड़ रहा था। फिर मैंने चाची की पेंटी को भी उतार दिया और अपनी अंडरवियर को भी उतार लिया और फिर उधर एक बार मैंने अवंती की तरफ देखा। अब वो तो पहले से ही अपने सारे कपड़े उतार चुकी थी और जोश में आकर अपनी चूत को सहला रही थी, मैंने उसको इशारे से अपने पास बुला लिया और तब अवंती मेरे पास आ गई। अब उसको मैंने अपना लंड एक हाथ में थमा दिया, अवंती मेरे लंड के साथ खेल रही थी और में चाची की चूत को सहला रहा था।

फिर मैंने अपने एक हाथ की मदद से चाची की चूत को पूरा खोल दिया और में चाची की चूत को चाटने लगा, जिसकी वजह से चाची अब पागल हो रही थी उसके मुहं से सिसकियों की आवाज आ रही थी वो आहह्ह्ह ऊमम्म्मम सस्सस्स किए जा रही। अब चाची की सिसकियों ने मेरे अंदर जोश भर दिया था, क्योंकि मेरी चाची बहुत ही सेक्सी है। अब में चाची की चूत को चाट रहा था और उसकी चूत के दाने के साथ में खेल रहा था। तभी चाची बोली कि सुमित राजा आज तूने मुझे क्या मस्त मजा दिया है? मेरा मन खुश हो गया। अब इधर अवंती भी जोश में आकर मेरा लंड चूस रही थी, कुछ देर बाद मैंने अवंती को नीचे लेटा दिया और चाची को कुतिया वाले आसन में बैठाकर में उसकी चूत को चाटने लगा। फिर में पीछे आ गया और चाची की चूत पर अपने लंड को रख दिया और पूछा क्या मारूं धक्का? तभी चाची बोली कि उम्म्म्मम हाँ मार तुझे अब रोका किसने है? दिखा आज तू मुझे अपने लंड की असली ताकत वो मज़े दे जिसके लिए में अब तक प्यासी तरस रही हूँ। फिर मैंने वो बातें सुनकर खुश होकर पूरे जोश में साथ एक बहुत ज़ोर से धक्का चाची की चूत में लगा दिया।

दोस्तों अब तो इतनी बार मेरा लंड लेकर चाची की चूत भी बहुत बड़ी हो चुकी थी और इसलिए मेरा लंड पूरा अंदर चला गया। तभी चाची ने धीरे से आह भरी उम्म्म आह्ह्ह्ह सुमित तूने तो आज मुझे मार ही दिया। अब में इधर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा था और उधर अवंती की चूत से चाटने की आवाज़े आ रही थी पूछ-पूछ पच-पच। अब मेरा लंड बहुत जोश में था, में चाची की चूत को तेज तेज धक्के मार रहा था जिसकी वजह से आह्ह्ह्हह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ स्सीईईईइ इन आवाज़ों से पूरा समा बदल चुका था। अब मैंने चाची के लंबे बालों को पकड़ा और उसकी चूत में अपने लंड के ज़ोर से धक्के मारने लगा, लेकिन अब तक चाची एक बार झड़ चुकी थी और इसलिए उसका जोश ठंडा हो गया था। फिर उसने अवंती की चूत को चाटना बंद किया, लेकिन मेरा काम अब भी चालू था। फिर चाची कुछ देर बाद दोबारा से जोश में आ गयी और वो एक बार फिर से अवंती की चूत को चाटने लगी। अब अवंती भी पागल हो चुकी थी, में चाची की चूत को और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा था। अब मेरा लंड झड़ने वाला था, मैंने चाची से बोला कि मेरा पानी निकल रहा है, तभी चाची बोली कि छोड़ दे रे अपना पानी तेरी चाची की चूत में, अब क्या पूछ रहा है? और तभी में झड़ गया और मैंने अपना वीर्य चाची की चूत में ही छोड़ दिया।

अब चाची पागल हो चुकी थी, चाची पास में बैठ गयी और में भी हल्का सा ठंडा हो गया था, लेकिन चुदाई करने की इच्छा मेरे मन में अभी भी वैसी ही थी। तभी अवंती बोली कि भैया अब मेरा क्या होगा? आपका यह लंड तो ठंडा हो चुका है और मेरी चूत अब भी प्यासी है इसको अब कौन शांत करेगा। फिर मैंने उसको कहा कि अब इस लंड में वापस जान डालने का काम तेरा है, तू जितनी जल्दी इसको खड़ा करेगी में तुझे उतना ही जल्दी चोदकर शांत करूंगा। तभी अवंती तुरंत मेरे ऊपर आ गयी और वो लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी उसके बाद उसने लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसना शुरू किया उममम्म आह्ह्ह करती रही। अब वो लंड चूसने के साथ साथ अपने मुँह में चारों तरफ घुमा रही थी, उसके लंबे बाल मेरी जांघो और पेट पर नाच रहे थे कुछ देर बाद मेरे शरीर में दोबारा से जोश भरने लगा था। फिर मैंने अवंती को नीचे लेटा दिया और में उसकी चूत को चाटने लगा। अब वो सिसकियाँ भरने लगी थी सस्स्सस्स आहहह्ह्ह भैया आज फाड़ दो तुम इसको आहहह्ह्ह उम्म्म्ममम। फिर मैंने उसकी चूत के दाने को चाटना शुरू किया, जिसकी वजह से वो पागल हो गयी और उसको बहुत मज़ा आ रहा था। तभी चाची में भी दोबारा से जोश आ गया और वो अवंती के बूब्स को सहलाने चाटने लगी।

फिर मैंने अवंती के पैरों को अपने कंधे के ऊपर लिया और अपने लंड को उसकी चूत के मुहं पर रख दिया। दोस्तों अब भी अवंती की चूत टाईट होने की वजह से मेरे लंड को अंदर जाने में दिक्कत हुई, तब मैंने चाची से बोला कि अवंती के मुँह पर अपने हाथ रखे। तभी चाची ने उसके मुँह पर अपना एक हाथ रखा और मैंने बहुत ज़ोर से एक झटका दिया, वो चिल्लाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन उसकी आवाज़ अंदर ही दब चुकी थी। फिर चाची ने दोबारा से उसके बूब्स को सहलाया और उसके मुँह में अपना मुँह डाल दिया तो करीब पांच मिनट के बाद में दोबारा से उसको झटके मारने लगा। अब वो बहुत जोश में आ चुकी थी और आह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ स्सीईईईईइ करने लगी थी। अब में उसको झटके मार रहा था और फिर दस मिनट के बाद वो झड़ गयी, लेकिन में चालू था और आह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह कर रहा था। अब वो दोबारा से जोश में आने का नाम ही नहीं ले रही थी, क्योंकि अब अवंती बहुत ही ठंडी हो चुकी थी और उसकी चूत की खुजली एकदम खत्म हो चुकी थी, लेकिन में तो अभी भी जोश में ही था। फिर अवंती बोली कि भैया बस करो, प्लीज। तभी मैंने अपना लंड बाहर निकाला और देखा तो वो अभी भी तना हुआ ही था। अब अवंती दूसरी तरफ अपना मुँह करके लेट चुकी थी।

फिर चाची ने मुझे दोबारा से अपनी चुदाई के लिए आमंत्रित किया, में चाची के ऊपर आ गया और उसकी जांघो पर अपना हाथ फैरने लगा। अब चाची ने अपने दोनों पैरों को पूरा फैला दिए, चाची की चूत का भोसड़ा बन गया था, लेकिन फिर भी मुझे उनकी चूत मारने में बहुत मज़ा आता। फिर मैंने चाची की चूत पर अपना लंड टिका दिया और एक ज़ोर से झटका मारा तो मेरा पूरा लंड चाची के अंदर जा चुका था। तभी चाची ने एक ज़ोर से आह भरी उसके बाद में चाची को ठोकने लगा आह्ह्ह ले गया पूरा अंदर रंडी छिनाल, क्यों तेरी चूत की खुजली मिटी कि नहीं? तभी चाची बोली कि आह्ह्ह्ह वाह मजा आ गया आईईईईइ ऊफ्फ्फ तूने मेरा दिल खुश कर दिया। अब में चाची को वैसे ही धक्के देकर चोद रहा था, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर करीब दस मिनट तक चुदाई करने के बाद में और चाची साथ में ही झड़ गये, हम दोनों को उस खेल में बहुत मज़ा आया। फिर में चाची के ऊपर वैसे ही लेटा रहा, हम दोनों इतने थक चुके थे कि हमारी कब आँख लग गयी? हमें पता ही नहीं चला। फिर सुबह अलार्म की वजह से पांच बजे मेरी नींद खराब हो गयी तब मुझे पता चला कि मेरा लंड अभी भी चाची की चूत के अंदर ही है।

फिर तभी में उठा और उन दोनों को भी मैंने उठा दिया। अब हम तीनों उठकर एकदम फ्रेश हो गये थे, मतलब हम तीनों ने अपने-अपने कपड़े पहन लिए थे और सब साफ किया और कमरे का दरवाजा खोलकर सो गये। दोस्तों उस रात को हम तीनों को बहुत मज़ा आया। अब दूसरे दिन तो हमारा यही खेल दोबारा से खेलने का इरादा था। अब हमे जब कभी भी कोई मौका मिला तब हमने बड़े मस्त चुदाई के मज़े लिए। दोस्तों यह था मेरा सच्चा सेक्स अनुभव एक साथ दो चूत की चुदाई करने का मज़ा, मुझे उम्मीद है कि आप सभी को मेरी यह कहानी जरुर पसंद आएगी ।।

धन्यवाद …


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