प्यासी चूत को आख़िर में लंड मिला

प्रेषक : ममता …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम ममता है, में उड़ीसा की रहने वाली हूँ और में पिछले कुछ सालों से कामुकता डॉट कॉम की नियमित पाठक हूँ। अब में सबसे पहले आप भी को अपने बारे में बता देती हूँ, में एक विधवा औरत हूँ, मेरी उम्र 27 साल है और मेरे बदन का आकार 36-28-36 है। दोस्तों जब में 25 साल की थी तब मेरी शादी हुई थी, लेकिन मेरी शादी को अभी एक साल पूरा होना ही था उसके पहले ही मेरे दुर्भाग्य की वजह से मेरे पति की एक सड़क हादसे में मौत हो गयी। अब में अकेली हूँ, क्योंकि मेरी शादी हमारे घर वालों की मर्जी के बिना हुई थी और इसलिए मेरे भैया-भाभी माता-पिता मुझसे नाता तोड़ चुके थे। फिर जब से मेरी शादी हुई थी उसके बाद से मेरे ससुराल वालों ने भी मुझे अलग कर दिया था और अब सिर्फ में अकेली ही रहती हूँ, फिलहाल मुझे कुछ समस्या नहीं है, क्योंकि मेरे पास नौकरी है और में इसी शहर में एक किराए के घर में रहती हूँ। दोस्तों में जहाँ पर रहती हूँ मेरे मकानमालिक भी वहीं पर रहते है और उनके एक नौकर है, उसका नाम महेश है उसकी उम्र करीब 28 साल की होगी और वो भी शादीशुदा है और उसकी लम्बाई 5.7 इंच है।

फिर मेरे पति के देहांत के बाद से में हमेशा अपने कमरे में ही रहती हूँ और ऑफिस का काम ख़त्म करने के बाद में सिर्फ अपने घर में ही रहती हूँ, में किसी से ज्यादा बात भी नहीं करती हूँ। दोस्तों मेरा कमरा पहली मंजिल पर है और उसके नीचे हिस्से में मकानमालिक रहते है और उनका नौकर महेश भी मकानमालिक के साथ नीचे वाले हिस्से में ही रहता है। दोस्तों मेरे पति के गुजर जाने के बाद से मेरा सेक्स जीवन बिल्कुल खत्म हो चुका था, वैसे मेरा कभी-कभी किसी के साथ सेक्स करने का मन तो करता था, लेकिन डर भी लगता था। फिर भी मुझे एक अच्छे लड़के की तलाश थी जो कि मेरे साथ वो वाला रिश्ता बनाए रखे और किसी को ना बताए, मेरे अपने कमरे में कंप्यूटर है जिसमे बहुत सारे सेक्सी तस्वीरें और सेक्स फिल्मे मैंने छुपाकर रखी है और इसलिए जब मुझे सेक्स की इच्छा होती है तब में कंप्यूटर पर बैठकर वो सब देखती हूँ। एक दिन क्या हुआ? कि मकानमालिक और उनका परिवार एक दिन के लिए कहीं बाहर गये थे और अब उनके घर में सिर्फ उनका नौकर महेश था। दोस्तों उस दिन रविवार का दिन था, वैसे शनिवार की रात को मुझे पता था कि मकानमालिक और उनका परिवार एक दिन के लिए रविवार सुबह कहीं बाहर जा रहे है।

फिर शनिवार रातभर में सेक्स के बारे में ही सोचती रही और रात को दो बजे तक कंप्यूटर पर में सेक्सी फिल्मे देख रही थी और फिर उसी रात को मैंने मन हही मन में विचार किया कि में महेश के साथ सेक्स कर सकती हूँ और इसलिए मुझे अब सिर्फ सुबह होने का बड़ी ही बेसब्री से इंतज़ार था और फिर उस रात को में पूरी तरह से नंगी सोकर सिर्फ महेश के बारे में सोच रही थी कि मुझे उसके साथ कैसे सेक्स की शुरूवात करनी है? महेश के बारे में सोचकर अपनी उंगली से अपनी चूत को उसी रात को चोदकर मेरी चूत से निकले रस को पूरी तरह से चखकर मज़े लिए। फिर जब सुबह हुई, तब में सोच रही थी कि कैसे महेश को अहसास दिलाऊँ? कि मुझे अभी उसकी जरूरत है? अब मकानमालिक के चले जाने के बाद करीब सुबह आठ बजे मैंने महेश को आवाज देकर ऊपर अपने कमरे में बुलाया और अपने कमरे की टेबल को थोड़ा ठीक करने को उसको कहा। (दोस्तों यह एक प्लान था, क्योंकि में अपने कंप्यूटर पर एक सेक्स स्क्रीन सेवर चालू करके कमरे के बाहर चली आई जो कि तीन मिनट के बाद शुरू होगा) अब महेश टेबल ठीक करते समय कंप्यूटर को भी देख रहा था और वो सब में बाहर से देख रही थी।

फिर जैसे ही वो स्क्रीन सेवर शुरू हुआ, तब महेश चकित होकर सिर्फ कंप्यूटर को ही घूर घूरकर देख रहा था। फिर मैंने सोचा कि यह मेरे लिए सही मौका है और इसलिए में उसी समय कमरे के अंदर चली गयी, लेकिन मैंने ऐसा नाटक किया जैसे कि मुझे कुछ पता ही नहीं हो और फिर उस कमरे के अंदर जाकर में भी कंप्यूटर और महेश को देखने लगी, लेकिन वो कुछ नहीं कर रहा था, शायद अब उसको डर लग रहा था और इसलिए मैंने मन ही मन में सोचा कि मुझे ही अब कुछ करना होगा। फिर ऐसे में मैंने महेश से पूछा।

में : महेश क्या तुमने ऐसे फोटो कभी नहीं देखे?

महेश : (थोड़ी देर चुप रहने के बाद) हाँ देखे है।

में : तो इतने घूर घूरकर क्यों देख रहे थे?

महेश : वो ऐसे ही।

में : क्या तुम्हारे किसी औरत के साथ ऐसे संबंध है?

महेश : नहीं।

में : क्यों नहीं? क्या तुम्हारे गाँव में कोई गर्लफ्रेंड नहीं है?

महेश : नहीं।

में : अगर तुम्हें कोई लड़की ऐसे करने को आकर कहें तो क्या तुम उसके साथ ऐसा करोगे?

अब महेश बिल्कुल चुप रहा और मेरी तरफ लगातार देखता रहा उसके मन में कुछ विचार चल रहे थे।

में : बोलो ना महेश तुम चुप क्यों हो गए?

महेश : नहीं में ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा।

में : क्यों? क्या तुम मर्द नहीं हो? क्या तुम्हारी कुछ इच्छा नहीं होती?

महेश : लेकिन मेडम आज आप हमसे ऐसे सवाल क्यों पूछ रहे हो?

में : ऐसे ही, लेकिन तुम बोलो ना जल्दी से मेरी बात का जवाब दो।

महेश : थोड़ी देर खामोश रहकर हाँ बोला।

में : क्या तुम मेरे साथ यह सब कर सकोगे, जो तुमने अभी कंप्यूटर पर देखा है?

महेश : (अब वो थोड़ी देर के लिए पूरी तरह से चकित होकर मूर्ति बन चुका था) मेडम आप यह सब क्या बोल रही हो? क्या सच में आप ऐसा चाहती है?

में : हाँ शायद मुझे ऐसा ही लगता है।

महेश : लेकिन।

में : लेकिन वेकीन कुछ नहीं, आज तुम मेरे साथ जो चाहो वो सब कर सकते हो, (फिर उसके बाद मैंने ही पास जाकर महेश के गाल पर एक चुम्मा किया और फिर उसको अपने गले से लगा लिया) महेश में बहुत ही प्यासी हूँ, तुम प्लीज आज मेरी प्यास को बुझा दो।

महेश : लेकिन मेडम क्या यह सब सही होगा?

में : देखो तुम अब मुझे मेडम मत बोलो, मुझे तुम ममता ही बोलो देखो आज में तुम्हारी हूँ और तुम जो चाहो वो मेरे साथ कर सकते हो और आज तुम जो भी मुझसे कहोगे वो में सुनकर करूंगी।

फिर उसके बाद महेश ने भी मेरे गाल पर एक प्यारा सा चुम्मा दिया और फिर उसने भी मेरा साथ देते हुए मुझे अपनी बाहों में ले लिया। फिर उसके बाद मैंने अपनी पकड़ को थोड़ा सा ज्यादा टाईट किया, उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को लगातार चूमने लगे थे और वो सब पांच मिनट तक चला। फिर उसके बाद महेश ने मेरी गर्दन पर चुम्मा किया और उसके बाद मेरी छाती पर चुम्मा किया और फिर उसके बाद मेरे दोनों बूब्स पर भी एक-एक प्यारा सा चुम्मा किया। फिर उसके बाद महेश ने मुझे उठाकर पलंग पर लेटा दिया और अब वो भी पलंग पर मेरे ऊपर लेट गया था। अब उसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे को ज़ोर से कस लिया, मैंने अपने दोनों हाथों और पैरों से महेश को अपने ऊपर जकड़ लिया था। अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, क्योंकि कई दिनों के बाद मुझे ऐसा मौका जो मिला था जिसका में पूरा पूरा फायदा उठा रही थी। फिर उसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे के होंठो पर भरपूर चुम्मे किए, कुछ देर बाद महेश ने मेरे ऊपर से थोड़ा सा हटकर मेरे एक बूब्स पर चुम्मा किया और मेरे दूसरे बूब्स को अपने एक हाथ से दबाया, क्योंकि में उस समय नाइटी पहने हुई थी और इसलिए उसको मेरे बूब्स को नंगा करने में समस्या हो रही थी।

अब उसने मुझे पलंग से उठाकर मेरी नाइटी को ऊपर से खोल दिया जिसकी वजह से मेरे शरीर पर सिर्फ ब्रा-पेंटी ही थी, वो मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे बूब्स को चाटने लगा और थोड़ी देर के बाद उसने मेरी ब्रा को भी निकाल दिया। अब में उसके सामने पूरी तरह से नंगी थी, पेंटी के अलावा मेरे बदन पर कुछ नहीं बचा था। फिर उसने मेरे नंगे बूब्स की बहुत ही तारिफ कि और फिर उसके बाद महेश मेरे एक बूब्स को चूसने लगा और उसके एक हाथ से मेरे एक बूब्स को सहलाने लगा था। फिर ऐसे ही दस मिनट तक करने के बाद उसने दूसरे बूब्स के साथ भी वैसा ही किया। अब इसी दौरान वो अपने एक हाथ को मेरी पीठ पर फैर रहा था और दूसरे हाथ से मेरे बूब्स की तरफ दबाकर मेरे बालों में घुमा रहा था। अब इसी दौरान मुझे तो बहुत ही अच्छा लग रहा था, क्योंकि कई दिनों के बाद किसी पुरूष के हाथ का स्पर्श जो मुझे मिला था और वो मेरे लिए बड़ा ही सुखद अनुभव था।

में : महेश मेरे निप्पल को और कितना चूसोगे? आओ मेरे होंठ तुम्हारे होंठो का इंतज़ार कर रहे है।

महेश : थोड़ी देर और मुझे बहुत ही प्यास लग रही है, अभी मेरी प्यास भी बुझी नहीं है।

में : हाँ ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी।

फिर दस मिनट तक मेरी निप्पल को चूसने और सहलाने के बाद उसने मेरे होंठो पर एक मज़ेदार चुम्मा किया और मैंने भी उसका भरपूर साथ दिया। अब उसके बाद वो पलंग से उठा और उसकी शर्ट-बनियान को खोल दिया और फिर उसके बाद अपनी पेंट को भी खोल दिया, जिसकी वजह से अब उसके शरीर पर सिर्फ एक अंडरवियर ही था। फिर मैंने उसको पलंग पर लेटने को कहा और अब उसने वैसा ही किया उसके बाद में उसके ऊपर लेट गयी। फिर थोड़ी देर तक ऐसे लेटे रहने के बाद महेश मुझे एक तरफ करके उठा और उठने के बाद उसने मेरे पैरों के पास जाते हुए मेरे दोनों पैरों पर चुम्मा किया और फिर धीरे-धीरे मेरे पैरों पर चुम्मा करते हुए मेरी जाँघो पर आ गया और उसके बाद अपने एक हाथ से मेरी चूत को पेंटी के ऊपर से ही सहलाना शुरू किया। अब उसको ऐसे करते हुए देखकर मैंने अपनी पेंटी को उतारने के लिए कहा और तुरंत ही पेंटी को उतारने के बाद महेश ने पहली बार मेरी कामुक चूत के दर्शन किए। फिर उसने मुझे पलंग पर एक तरफ कर लिया और नीचे जाकर मेरी चूत पर एक चुम्मा किया और फिर उसके बाद वो मेरी चूत को प्यार करने लगा। अब उसके यह सब करते समय मुझे तो बहुत ही अच्छा लग रहा था, मैंने महेश को थोड़ा और चूत कि गहराई तक के हिस्से को चूसने को कहा।

फिर वो भी अपने दोनों हाथों से मेरी चूत के होंठो को खोलकर मेरी चूत के अंदर के हिस्से को भी चाटने लगा। अब इस बीच मेरी सिसकियाँ निकलने लगी थी उऊहह आअहह महेश थोड़ा और गहराई तक तुम अपनी जीभ को मेरी चूत में डालो। अब मुझसे तो इस समय रहा नहीं जा रहा, मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। फिर इसी बीच में मैंने थोड़ा उठकर अपने दोनों पैरों को महेश की पीठ पर रखा और अपने हाथों से महेश के सर को अपनी चूत पर दबा रही थी, जिसकी वजह से महेश का मुँह मेरी चूत के ऊपर दब गया, क्योंकि में भी चूत को ऐसे प्यार करने का मज़ा पूरा पूरा लेना चाहती थी। फिर ऐसे ही करीब दस मिनट तक मेरी चूत को चूसने चाटने के बाद में झड़ गयी और मेरी चूत का रस निकल गया, जिसको महेश ने पूरी तरह से अपनी जीभ से चाटकर मेरी चूत को एकदम साफ कर दिया था। फिर उसके बाद महेश ने मेरे मुँह के होंठो पर एक लम्बा चुम्मा किया और हम दोनों ने एक दूसरे को कस लिया। फिर उसके बाद में पलंग से उठी और महेश के अंडरवियर के ऊपर से ही उसके लंड को सहलाने लगी और थोड़ी देर के बाद मैंने उसकी अंडरवियर को खोला और फिर उसके बाद उसके लंड को अपने हाथ में लिया।

अब उस समय उसका लंड उतना सख्त नहीं हुआ था, में जल्दी ही उसके लंड को एक चुम्मा करके प्यार करने लगी और प्यार करते हुए में उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थी। फिर ऐसे ही थोड़ी देर तक चूसने के बाद उसका लंड करीब सात इंच लंबा हो गया और उस सात इंच लंबे लंड को में अब लोलीपोप की तरह अच्छी तरह से अपने एक हाथ में लेकर चूसने लगी थी। अब वो भी मेरा साथ देते हुए अपनी कमर को आगे पीछे करके अपने लंड को मेरे मुँह में धक्के देकर मेरे मुहं की चुदाई कर रहा था। फिर ऐसे ही पांच मिनट तक करने के बाद उसने दोबारा से मुझे पलंग के किनारे पर बैठा दिया और वो मेरी चूत को दोबारा से चूसने लगा। तभी में उसको बोली कि महेश अब मुझसे रहा नहीं जाता है, अब मेरी चूत को तुम्हारा लंड चाहिए, जल्दी से मुझे तुम चोदना शुरू करो और मिटा दो मेरी चूत की प्यास को, मेरी यह चूत किसी लंड को खाने के लिए कब से प्यासी है? अब वो अपने लंड को पकड़कर मेरी चूत के होंठो पर रगड़ने लगा, लेकिन अब मुझसे तो रहा नहीं जा रहा था और इसलिए मैंने जल्दी ही उसका लंड पकड़कर अपनी चूत के छेद के ऊपर रखकर उसको अंदर डालने को कहा।

फिर उसने जैसे ही अपना लंड मेरी चूत में डालना शुरू किया, तब मुझे बहुत ही दर्द हुआ और मैंने महेश को थोड़ा धीरे-धीरे डालने को कहा। फिर उसने धीरे-धीरे अपना लंड मेरी चूत में घुसाया, लेकिन मेरी चूत ज्यादा टाईट होने की वजह से उसका लंड ठीक से नहीं जा रहा था और फिर मुझे दर्द भी हो रहा था, क्योंकि पिछले एक साल से मुझे किसी ने नहीं चोदा था। फिर महेश दो झटके देकर उसका पूरा लंड मेरी चूत में डालने में सफल हुआ। अब इसी बीच मेरे मुँह से एक चीख भी निकल गयी, उसके बाद दो मिनट के लिए उसने मेरे ऊपर लेटे हुए मेरे होंठो पर चुम्मा किया और फिर उसके बाद चुदाई करना शुरू किया। फिर उसने अपना लंड मेरी चूत में अंदर बाहर करना शुरू किया, इसी बीच मेरे मुँह से सिसकियाँ भी निकल रही थी आअहह ऊहहह्ह्ह महेश बुझा दो मेरी चूत की प्यास को, ओह्ह्ह महेश में तुमसे और तुम्हारे लंड से बहुत प्यार करती हूँ महेश आहह मेरी चूत कब से प्यासी थी तुम्हारे लंड के लिए? थोड़ा ज़ोर से करो। अब उसने अपनी रफ़्तार को बढ़ाया और में भी उसका साथ देते हुए अपनी कमर को ऊपर नीचे करके चुदाई में उसका साथ दे रही थी। फिर ऐसे ही दस मिनट तक चलने के बाद में झड़ गयी, लेकिन महेश ने अपना काम बंद नहीं किया।

अब अगले पांच मिनट में वो भी झड़ने वाला था कि तभी वो अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकालकर मेरे मुँह में अंदर बाहर करके मेरे मुँह की चुदाई करने लगा। अब में भी उसके लंड को बहुत मज़े से चूसने लगी थी और ऐसे में वो मेरे मुँह के अंदर ही झड़ गया। दोस्तों वो झड़ने के समय अपना लंड मेरे मुँह से बाहर निकालना चाहता था, लेकिन मैंने उसको मना किया और फिर मैंने उसके पूरे रस को अपनी जीभ से चाटकर चूसकर उसके लंड को पूरी तरह से साफ कर दिया। अब ऐसे ही दस मिनट तक उसके लंड को चूसने के बाद उसका लंड एक बार फिर से मेरी चूत में जाने के लिए तैयार हो गया था। फिर उसने जल्दी से अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दिया और वो धक्के देने लगा। अब इस बार क्योंकि हम दोनों पहले ही झड़ चुके थे और इसलिए इस बार जल्दी झड़ने की कोई उम्मीद नहीं थी। फिर इस बार हम दोनों ने पूरा मज़ा किया और फिर इस बार हमारी चुदाई बीस मिनट तक चलती रही। अब इस बीच में एक बार झड़ चुकी थी, मेरे झड़ने के बाद मेरी चूत में पानी भरा हुआ था, लेकिन महेश ने चुदाई करना बंद नहीं किया था। फिर उस समय जैसे ही वो अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था, तब मेरी चूत से पच-पच जैसी आवाज भी निकल रही थी।

अब मुझे अच्छा भी लग रहा था, ऐसे ही कुछ देर तक चुदाई करने के बाद जब महेश का झड़ने का समय आ गया, तब मैंने उसको अपनी चूत के अंदर ही पानी छोड़ने को कहा। फिर उसने भी मेरी चूत के अंदर ही उसका सारा पानी छोड़ दिया। दोस्तों आप सभी विश्वास ही नहीं करेंगे कि जब उसके लंड की हर बूँद मेरी चूत की गहराई में जा रही थी तब मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था, क्योंकि इसी दौरान हम दोनों एकदम थक चुके थे और इसलिए वो मेरे ऊपर ऐसे ही लेट गया था। अब अभी भी उसका लंड मेरी चूत के अंदर ही था, में भी उसको अपनी बाहों में लेकर अपने दोनों हाथों और पैरों से पूरी तरह से जकड़कर लेट गयी थी।

में : महेश आज सच में तुमने मेरी चूत की प्यास को बुझा दिया, में बहुत दिन से सोच रही थी कि में कैसे अपनी चूत की प्यास को बुझाऊँ? आज में बहुत ही खुश हूँ, बोलो माँगो तुम्हें क्या चाहिए? आज तुम जो कहोगे में तुम्हें वही दूंगी तुम्हे वो सब मिलेगा।

महेश : में भी कई दिनों से सोच रहा था कि आपको कैसे चोदा जाए? लेकिन मुझे ऐसा कोई मौका ही नहीं मिल रहा था।

में : अब जब हम दोनों ने आज एक दूसरे के साथ चुदाई कर ली है, अब हमे जब भी मौका मिलेगा तब हम चुदाई जरुर करेंगे।

महेश : हाँ ठीक है मुझे भी आपके साथ यह सब करके बहुत मज़ा आएगा।

फिर थोड़ी देर तक ऐसे ही एक दूसरे के ऊपर लेटे रहने के बाद जब दिन के 12 बज गये तब हम दोनों बिस्तर से उठे और उठकर सीधे बाथरूम में चले गये। फिर वहाँ पर हम दोनों ने एक दूसरे को नहलाया और फिर महेश ने फुवारा चलाकर मुझे उसके नीचे खड़े होने को कहा। अब वो मेरे दोनों पैरों के बीच में मेरी चूत को अपने मुँह में लेकर बैठ गया और अब जैसे ही पानी मेरे शरीर के ऊपर से गिरकर मेरी चूत पर जाता, तब महेश वो सब पानी पी जाता। फिर हम दोनों के नहाने के बाद में दोपहर का खाना तैयार करने लगी और फिर महेश ने भी मुझे उस काम में मदद कि। फिर करीब एक घंटे में हमारा खाना तैयार हो गया और फिर हम दोनों ने साथ में बैठकर खाना खाया और खाने का काम खत्म होने के बाद हम दोनों दोबारा से पलंग पर आ गये और फिर पलंग पर आते ही में महेश के लंड को प्यार करने लगी और फिर प्यार करते-करते कुछ देर बाद में उसका पूरा का पूरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने चाटने लगी। फिर थोड़ी देर तक यह सब करने के बाद जब महेश का लंड एकदम चोदने के लिए तैयार हो गया, तब में महेश के ऊपर आकर अपनी कोहनी के सहारे उसके लंड के ऊपर धीरे धीरे बैठकर उसके लंड को अपनी चूत में भरने लगी।

फिर थोड़ी देर तक ऐसे ही कोशिश करने के बाद जब उसका पूरा लंड मेरी चूत के अंदर चल गया, तब उसके बाद में महेश को चुदाई के मज़े देने लगी। फिर थोड़ी देर चुदाई करने के बाद में झड़ गयी, अब उसका लंड मेरी चूत के अंदर रखकर ही उसी आसन में महेश के ऊपर लेट गयी, लेकिन उस समय महेश का लंड शांत नहीं हुआ था और इसलिए उसने मुझसे मेरी कमर को थोड़ा सा ऊपर उठाकर अपनी कोहनी के ऊपर बैठने को कहा। फिर जैसे ही में अपनी कोहनी के ऊपर फिर से बैठ गयी, तब वो लेटे हुए ही अपनी कमर को ऊपर उठा उठाकर मेरी चूत को धक्के देकर चोदने लगा था। दोस्तों वो उस आसन में क्या मस्त लग रहा था? मुझे क्या मस्त आनंद मज़ा आ रहा था? वो सब तो में बता भी नहीं सकती। फिर थोड़ी देर के बाद वो भी झड़ गया, लेकिन मैंने अपनी चूत से उसके लंड को बाहर नहीं निकालने दिया और फिर ऐसे ही उसके लंड को मेरी चूत के अंदर रखकर ही में उसके ऊपर लेट गयी। अब उसने भी मेरी पीठ के ऊपर उसके दोनों हाथों से मुझे जकड़ लिया था और उसके दोनों पैरों को मेरे पैरों के ऊपर रखकर मुझे पूरी तरह से जकड़ लिया था।

अब मुझे भी बहुत ही आनंद आ रहा था और फिर ऐसे ही लेटे हुए कब हमारी आंख लग गयी? हमे पता भी नहीं चला। फिर जब हमारी आँख खुली तब तक पांच बज चुके थे। फिर रात को भी हम दोनों ने बहुत मस्ती कि और फिर रात को महेश ने मुझे हर बार अलग-अलग आसन में बहुत जमकर चोदा और मैंने भी उसका पूरा साथ दिया और हम दोनों ने बड़ा मज़ा किया। अब तो मकानमालिक की मौजूदगी में हमारा यह सेक्स सम्बंध संभव नहीं हो पा रहा है, लेकिन मैंने महेश को पहले से ही इशारा देकर कहा है कि महेश जब भी तुम्हें सही मौका मिले तब तुम मेरे पास आ जाना, क्योंकि मेरी चूत हमेशा तुम्हारा लंड खाने का इंतज़ार कर रही है। दोस्तों यह था मेरी प्यासी चूत को शांत करने का सच अपना सच्चा सेक्स अनुभव मुझे उम्मीद है कि सभी पढ़ने वालों को यह जरुर पसंद आएगा ।।

धन्यवाद …


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