पड़ोसन की बेटी

प्रेषक : जेद …

हैल्लो दोस्तों, यह मेरी कामुकता डॉट कॉम पर तीसरी कहानी है। दोस्तों आज
में आप सभी को अपनी एक नई सत्य घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ, यह बात दो साल
पुरानी है जब में अपनी कॉलेज की पढ़ाई को पूरी करने के बाद बड़ी मुश्किल से मिली
नौकरी को बड़ा खुश होकर कर रहा था। फिर मुझे अपने काम का पूरा पैसा और आराम भी बहुत
मिलता और इसलिए में उस नौकरी से बड़ा खुश था, क्योंकि वो एक बहुत बड़ी प्राइवेट
कंपनी थी और में उसी कंपनी में उन दिनों नौकरी करता था। फिर कुछ दिनों के बाद उसी
कंपनी के किसी काम की वजह से मुझे कुछ दिनों के लिए दूसरे शहर में जाकर रहना पड़ा और
मेरी कंपनी की तरफ से जो घर मुझे मिला था वो मेरे बहुत शुभ था। दोस्तों मेरा शरीर दिखने
में बहुत अच्छा गठीला साथ ही मेरा गोरा रंग भी है, मेरे लंड का आकार पांच इंच है और
अब में अपनी आज की कहानी को सुनाता हूँ जो एकदम सत्य घटना है। दोस्तों मेरे उसी
मकान के पास वाले घर में एक बहुत अच्छा परिवार रहता था और उसी घर में एक लड़की भी
रहती थी, जिसका नाम हिना था।

दोस्तों वो लड़की उस समय कॉलेज के पहले साल में अपनी पढ़ाई कर रही थी,
उसकी उम्र उस समय 18 साल थी वो अभी अभी जवानी हुई थी, इसलिए उसका हर एक अंग उभरकर
बाहर आने लगा था। दोस्तों उसके ऊपर चढ़ती जवानी का असर साफ साफ दिखने लगा था, वो
लड़की हिना दिखने में बहुत ही गोरी, सेक्सी लगती थी और उसके उभरे हुए गोलमटोल बूब्स
मुझे बहुत ही अच्छे लगते थे। अब इसलिए में हर कभी मौका पाकर उसको घूरने लगता, मेरी
नजर एक बार उसके कामुक गदराए हुए बदन पर पड़ने के बाद हटने को तैयार ही नहीं होती
थी। दोस्तों वो मुझे एकदम सेक्सी लगती थी और इसलिए में उसका वो जिस्म देखकर हमेशा
उसकी तरफ आकर्षित हुआ करता था। दोस्तों मेरी उसके घर के सभी लोगो और उसके साथ हमेशा
बहुत बातें होती रहती, क्योंकि उसकी और हमारी छत एक ही थी उसके बीच में सिर्फ़ तीन
फुट की एक दीवार थी। दोस्तों वो पढ़ाई में थोड़ी कमज़ोर थी और यह बात मुझे उसके घर वालों
से कुछ दिनों बाद पता चली और अब कुछ ही दिनों के बाद उसके पेपर भी आने वाले थे। एक
दिन उसकी मम्मी ने मुझसे कहा कि अब थोड़े दिनों के बाद हिना के पेपर शुरू होने वाले
है, लेकिन तुम अच्छी तरह से जानते हो कि वो अपनी पढ़ाई में कितनी कमज़ोर है और में
अच्छी तरह से जानती हूँ कि तुम अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हो और उसी पढ़ाई को हिना अब
पढ़ रही है।

अब प्लीज तुम इसके ऊपर थोड़ा सा ध्यान देकर अपना थोड़ा सा समय निकालकर उसको
कुछ घंटे पढ़ा दिया करो। फिर मैंने अपनी पड़ोसन आंटी के मुहं से वो बात सुनकर उनको तुरंत
हाँ कह दिया और उसके बाद से में रोज रात को करीब आठ बजे उनके घर हिना को पढ़ाने चला
जाता। दोस्तों मेरा कमरा पहली मंजिल पर था, नीचे की तरफ मेरे मकानमालिक रहते थे और
हिना का भी वो कमरा जिसमे वो पढ़ाई करती रात को सोती थी, पहली मंजिल पर था। दोस्तों
वो कमरा ज्यादातर समय बंद रहता था, क्योंकि उसकी मम्मी-पापा और उसका एक छोटा भाई भी
था जो 15 साल का था, वो सभी मकान के नीचे वाले हिस्से में रहते थे। दोस्तों में
हिना को अब पढ़ाने उसके घर जाने लगा था, लेकिन मुझे सभी के होने की वजह से थोड़ी सी
परेशानी होने लगी थी, पढ़ाई करते समय घर का कोई भी सदस्य कभी भी उस कमरे में चला
आता, जिसकी वजह से हिना का ध्यान अपनी पढ़ाई से हट जाता। फिर इसलिए दो दिन के बाद मैंने
उसकी मम्मी से कहा कि भाभी नीचे हम दोनों किसी के भी आने जाने आपकी बातों की आवाज
से बहुत परेशान है, पढ़ाई में यह सभी बातें बहुत रुकावट पैदा करती है हमे पढ़ाई के
लिए बिल्कुल एकांत चाहिए क्या हम दोनों आपके ऊपर वाले कमरे में जाकर पढ़ाई कर सकते
है?

दोस्तों मुझे पहले से ही पता था कि मुझे उनकी तरफ से क्या जवाब मिलने
वाला था? फिर भी, लेकिन अपने ऊपर कोई भी शक करने वाली बात में उनके मन में नहीं
डालना चाहता था और इसलिए मैंने उनसे पूछना बिल्कुल उचित समझा और फिर उन्होंने मेरी
बात पर तुरंत हाँ कर दिया। अब में हर रात को आठ बजे हिना के घर जाता और उसके बाद
में रात को दस बजे तक वहां पर रुककर वापस अपने घर आ जाता। दोस्तों वो पढ़ाई में
बहुत कमज़ोर थी और इसलिए उसको अच्छे से कुछ भी याद नहीं होता था, इसके बारे में मैंने
एक बार उसकी मम्मी से कहा। फिर उन्होंने मुझसे बोला कि अगर यह ठीक से मन लगाकर नहीं
पढ़ती है तो तुम इसकी पिटाई भी कर सकते हो तुम्हे कोई कुछ भी नहीं कहने वाला। फिर मैंने
एक दिन उसको पढ़ाई के विषय में ही उसकी मम्मी के सामने ही हल्का सा एक थप्पड़ मार
दिया, तब उस दिन मैंने उसको पहली बार अपने हाथ से उसके मुलायम गाल पर छुआ था। अब मैंने
महसूस किया कि उसका गाल एकदम गरम था और वो अपनी गलती पर थप्पड़ खाकर नीचे मुहं
करके मुस्कुराने लगी थी, लेकिन उसने मुझसे बाद में कुछ भी नहीं कहा। फिर मैंने मन
ही मन में सोचा था कि वो उस थप्पड़ की वजह से कहीं मुझसे नाराज ना हो जाए? फिर अगले
दिन उसने एक जींस और शर्ट पहनी हुई थी, जिसमे सामने की तरफ बटन थे।

अब में ठीक उसके सामने बैठकर उसको गणित के कुछ सवाल समझा रहा था, हम
दोनों का मन उस समय पढ़ाई में लगा हुआ था, तभी अचानक से मेरी नजर उसकी छाती के ऊपर
चली गई और मैंने देखा कि उसकी शर्ट का एक बटन टूटा हुआ था। दोस्तों उस समय हिना का
ध्यान अपनी पढ़ाई में था और अब मेरा ध्यान उसके टूटे हुए बटन से उसके बूब्स पर जा
चुका था, नीचे झुककर बैठे होने की वजह से मुझे अब उसकी काली रंग की ब्रा और लटकते
हुए गोरे बड़े आकार के बूब्स सामने की तरफ से एकदम साफ नजर आ रहे थे और उसकी गोरी
उभरी हुई छाती को में अपनी चकित नजरो से घूर घूरकर देख रहा था। फिर अचानक से उसका
ध्यान अपने टूटे हुए बटन की तरफ चला गया, जिसकी वजह से उसके बाहर निकलते हुए गोरे
गोलमटोल बूब्स को में अपनी खा जाने वाली नजर से देख रहा था। अब वो मेरी घूरती हुई नजरों
को अपने बूब्स पर देखकर शरमाई और उठकर तुरंत नीचे जाकर दूसरी शर्ट बदलकर वापस आ गई।
फिर मैंने उसको पूछा कि क्या हुआ? तुम्हे इस तरह अचानक से क्या याद आ गया जो उठकर
जाना पड़ा? तब उसने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा कि मैंने देखा कि आपका ध्यान कहीं
दूसरी तरफ था, इसलिए आप मुझे ठीक तरह से पढ़ा नहीं पा रहे थे। फिर कुछ देर उसकी
पढ़ाई पूरी होने के बाद में अपने घर चला गया।

फिर अगले दिन में दोबारा अपने ठीक समय पर उसके पास पहुंच गया, आज उसने
बड़ी कसी हुई टीशर्ट पहनी हुई थी, जिसकी वजह से उसके बूब्स का उभार उभरकर मेरे ऊपर
गजब ढा रहा था और इसलिए मेरा पूरा ध्यान उसके बूब्स पर ही था। अब में बीच बीच में
नजर बचाकर उसकी छाती को घूरने लगता। फिर कुछ देर बाद जब उसका ध्यान मेरी इस हरकत
पर गया, तब उसने मुझसे पूछ ही लिया कि क्या हुआ तुम्हारा ध्यान कहाँ है? में कई
बार देख चुकी हूँ कि आजकल तुम्हारा मन मुझे पढ़ाने में कम कहीं दूसरी जगह ज्यादा
लगा रहता है क्यों क्या बात है? अब मैंने बिना किसी डर झिझक उसको कहा कि मेरा
ध्यान कुछ दिनों से तेरे ऊपर है, वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर शरमाई और बोली कि धत
ऐसा भी क्या है मेरे अंदर जो तुम्हे इतना भा गया? अब मेरी हिम्मत उसके मुहं से यह
बात सुनकर पहले से ज्यादा बढ़ गई, मैंने हल्के से उसके एक गाल पर चपत लगाई और में बड़े
ही प्यार से उसकी तरफ मुस्कुराकर देखने लगा। तब जवाब में वो भी मेरी तरफ
मुस्कुराने लगी, जिसकी वजह से मेरी हिम्मत भी पहले से ज्यादा बढ़ गई और उसी समय मैंने
उसके दोनों गालों को पकड़कर उसके होंठो को चूम लिया, लेकिन तभी उसने अचानक से दूर
हटाते हुए मुझसे कहा कि चलो पीछे हटो, यह सब क्या करते हो? छोड़ो मुझे वरना मम्मी आ
जाएगी और किसी ने हमे देख लिया तो बहुत बुरा होगा।

फिर हम दोनों दोबारा से पढ़ाई करने लगे, उसकी पढ़ाई खत्म होने के बाद
में अपने घर चला गया और में पूरी रात बस उसी के सपने देखता रहा, मेरे मन में अब
उसकी चुदाई के सपने और उसको पाने की इच्छा होने लगी थी। दोस्तों मैंने अब मन ही मन
में ठान लिया था कि मुझे कोई अच्छा मौका देखकर उसकी चुदाई के मज़े अब कैसे भी करके
लेने है और फिर मेरी किस्मत ने मेरा बहुत ही जल्दी साथ दे दिया, जिसकी वजह से मुझे
आगे बढ़ने का वो मौका मिला। फिर अगले दिन हिना की मम्मी-पापा और उसका भाई किसी काम की
वजह से कहीं बाहर गये हुए थे और जाने से पहले उसकी मम्मी ने मुझसे कहा था कि हिना
घर पर अकेली है, हम लोग दूसरे दिन वापस आ जाएँगे। अब इसलिए तुम रात को हिना को
पढ़ाई करवाने के बाद हमारे घर पर ही सो जाना, वरना रात को अकेले सोने में उसको बहुत
डर लगता है और तुम्हारे रुकने की वजह से हमे घर के साथ हिना की भी चिंता नहीं
रहेगी। दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर मैंने तुरंत ही खुश होकर हाँ कह दिया और
मुझे तो ऐसा लगा जैसे मेरे मन की इच्छा आज ऊपर वाले ने झट से सुनकर फट से पूरी कर
दी और वो लोग चले गए।

अब में हंसी खुशी पूरा दिन अपने काम में लगा रहा, लेकिन वो दिन मुझे
बहुत लंबा लगने लगा था और जैसे तैसे शाम हुई और उसके बाद रात भी बड़े लंबे इंतजार
के बाद आ ही गई। फिर में अपने उसी समय रात को ठीक आठ बजे उसके घर पहुंच गया, उस
समय हिना मुझे नीचे की मंजिल पर मिली और मैंने देखा कि आज उसने बहुत अच्छी काले रंग
की मेक्सी पहनी हुई थी। दोस्तों उसमे वो बहुत ही सुंदर लग रही थी, मेक्सी के बड़े
आकार के गले से मुझे उसके उभरे हुए बूब्स और एकदम टाईट होने की वजह से उसके बड़े
आकार के बूब्स की गोलाई भी एकदम साफ नजर आ रही थी। अब वो सब देखकर मेरा मन ललचाकर
उसके बूब्स को वहीं उसी समय पकड़कर दबाने की इच्छा हो रही थी, लेकिन मैंने सब्र
किया। अब हम दोनों हर दिन की तरह अपने काम को करने लगे, उस दिन भी मेरी नजर हर बार
उसके झुकने की वजह से हर बार गोरे बूब्स पर जा रही थी, लेकिन उसकी तरफ से मुझे आज
ऐसा कुछ भी विरोध नहीं लगा, जिसकी वजह मेरी हिम्मत बहुत बढ़ गई। अब मेरे लगातार उसकी
तरफ घूरकर देखने पर भी वो मेरी तरफ बस हल्का सा मुस्कुरा देती और करीब दो घंटे की
पढ़ाई खत्म होने के बाद वो उठकर अब अपने कमरे में जाकर लेट गई। फिर में बाहर ही बैठक
वाले कमरे में जाकर लेट गया और उसके बारे में सोचने लगा।

अब अचानक से कुछ देर बाद उसको अकेले सोने में डर लगने की वजह से वो उस
कमरे के बल्ब को बंद करके अपने कमरे से बाहर आ गई। फिर वो भी मेरे पास उसी कमरे में
उसी पलंग पर बैठ गई जिस पर में लेटा हुआ था। फिर उसको देखकर में भी उठकर बैठ गया,
उसके बाद हम दोनों बातें करने लगे और तब उसने मुझसे कहा कि मुझे अकेले सोने में
बड़ा डर लग रहा है। अब मैंने उसको कुछ नहीं कहा और उसी समय उसको तुरंत अपनी बाहों में
भर लिया, उस समय वो चुप रही उसने मुझसे कुछ भी नहीं कहा और बाहों में लेते हुए ही मैंने
उसको अब चूमना शुरू कर दिया। फिर वो अब हल्का सा मेरा विरोध कर रही थी, लेकिन में उसको
लगातार चूमता ही रहा जिसकी वजह से उसको हल्का सा नशा चढ़ने लगा था। फिर कुछ देर बाद
जब मैंने उसकी तरफ ध्यान से देखा तब उसका चेहरा एकदम लाल हो चुका था और उसकी दोनों
आंखे मेरे यह सब करने की वजह से अपने आप बंद हो चुकी थी। अब मैंने उसके मन की बात
को समझकर तुरंत ही उस मौके का फायदा उठाकर धीर से उसके बूब्स पर अपने एक हाथ को रख
दिया और अब तो वो एकदम मुझसे चिपक गई।

अब भी मेरा एक हाथ उसके बूब्स की गोलाईयों पर लगातार घूम रहा था और तब
छुकर महसूस करने से मुझे पता चला कि वो बूब्स बड़े ही मुलायम गरम थे और वैसे भी यह
मेरा पहला अनुभव उस लड़की के साथ था, जिसको पाकर में भी उसकी तरह बहुत उत्साहित खुश
भी था। अब में उसके गुलाबी रसीले होंठो को चूमता रहा और अब अपने दोनों हाथों से
धीरे धीरे में उसके बूब्स को दबाता, सहलाता रहा मेरे ऐसा करने की वजह से वो एकदम मधहोश
हो चुकी थी और उसके मुहं से अब हल्की हल्की आह्ह्ह स्स्सीईई की आवाजे भी आने लगी
थी। फिर उसके बाद में थोड़ा आगे बढ़ गया और मैंने हिम्मत करके उसकी मेक्सी को धीरे
से पूरा उतार दिया, जिसकी वजह से वो अब मेरे सामने काली रंग की ब्रा और पेंटी में
थी। दोस्तों वो दिखने में बड़ी ही हॉट सेक्सी लग रही थी, में उसको अपनी चकित नजरो
से घूरकर देख रहा था और उसके वो बड़े आकार के बूब्स ब्रा के अंदर ठीक तरह से समा भी
नहीं रहे थे। दोस्तों वो ब्रा दोनों बूब्स के सामने छोटी लगने के साथ साथ ऐसी लग
रही थी जैसे जबरदस्ती दोनों बूब्स को उस छोटी सी ब्रा में ठुसकर केद किया हुआ था। फिर
उसकी उस सुन्दरता को देखकर मैंने अपने होश पूरी तरह से खो दिए थे, वो बड़ी ही कामुक
आकर्षक नजर आ रही थी।

अब मैंने उसके पूरे गोरे बदन को चूमना शुरू कर, दिया साथ ही अपने हाथ
को धीरे धीरे आगे बढ़ाकर उसको में गरम करने लगा था, जिसकी वजह से वो भी जोश में आकर
मुझे चूमने लगी और मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी। फिर कुछ देर बाद वो मेरे कपड़े उतारने
लगी, जिसकी वजह से अब में भी सिर्फ़ उसके सामने अंडरवियर में था, में तब भी उसको वैसे
ही चूमता सहलाता रहा और उसके पूरे जिस्म को अपने पर हाथ से छुकर महसूस कर रहा था। वाह
उसके बूब्स क्या मस्त मुलायम? और निप्पल उठी हुई कड़क जोश से भरी हुई थी। फिर उसी
समय मैंने अपने हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, एक झटके के साथ ब्रा
उसके हाथ में आ गई और उसके बूब्स एकदम आज़ाद हो चुके थे। दोस्तों इससे पहले भी मैंने
कई बार दूसरी लड़कियों के साथ सेक्स किया था, लेकिन उसका वो गोरा कामुक हुस्न देखकर
में अपने होश पूरी तरह से खो बैठा था और मुझे अब बिल्कुल भी होश नहीं था। अब मुझे
बस हर तरफ वो ही नजर आ रही थी और धीरे से मैंने उसकी पेंटी को भी उतार दिया, बदले में
उसने भी मेरी अंडरवियर को उतार दिया। अब उस वजह से हम दोनों पूरे नंगे थे, वो मेरे
लंबे मोटे लंड को चकित होकर देखकर रही थी और में उसकी कामुक चूत को लगातार घूरकर
देख रहा था।

अब हम दोनों जोश में आकर एक दूसरे को चाटते लगे, मैंने अपना मुहं उसके
निप्पल पर लगाया और में उसको प्यार करने लगा। फिर उसी समय उसने मेरे लंड को अपने
एक हाथ में ले लिया और वो उसको सहलाने लगी, मेरा लंड एकदम तनकर पहले से ही कड़क हो
चुका था। अब उसके हाथ का स्पर्श पाकर मेरा लंड झटके देने लगा और मैंने धीरे से
अपने लंड को उसके मुहं के पास किया। फिर वो मेरा इशारा समझकर तुरंत उसको पहले ऊपर
से चूमने लगी, टोपे के ऊपर से चमड़ी को हटाकर लंड को नंगा कर दिया, टोपे को भी उसने
चूमना शुरू किया, जिसकी वजह से मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था। फिर कुछ देर बाद मैंने
उसको लंड को अपने मुहं में लेने के लिए कहा, तब वो उसको अपने मुहं में लेकर चूसने
लगी, लेकिन मेरा बड़ा बुरा हाल हो रहा था। अब वो लंड को चूसने के साथ साथ मेरे आंड
को भी अपने एक हाथ से सहला रही थी और उसी समय मैंने अपनी एक उंगली को धीरे से उसकी
कुंवारी चूत में डाल दिया। तब मुझे महसूस हुआ कि वो बिना चुदी होने के साथ साथ
टाईट भी बहुत थी और में धीरे धीरे अपनी ऊँगली को उसकी चूत में आगे पीछे करने लगा।

अब ऐसा करने से हम दोनों को मज़े के साथ बड़ा जोश भी आ रहा था और वो
मेरे लंड को लोलीपोप की तरह बड़े मज़े लेकर चूसती जा रही थी और मेरी ऊँगली उसकी चूत
के साथ खेले जा रही थी। दोस्तों मैंने उसका जोश और सिसकियों की आवाज से अंदाजा लगा
लिया था कि अब वो मुझसे अपनी चुदाई करवाने के लिए एकदम तैयार थी। अब उसकी चूत में मेरी
ऊँगली की उस हरकत की वजह से पानी भी आने लगा था, वो बिल्कुल गीली चिकनी हो चुकी थी
और इसलिए मेरी ऊँगली बड़े आराम से फिसलती हुई अंदर बाहर हो रही थी। अब में अपना मुहं
उसकी चूत के मुलायम होंठो पर ले गया, में उसकी गदराई हुई गोरी जांघो और उसकी चूत
को चूमने लगा। फिर उस वजह से वो ज़ोर से हिलने लगी और उसी समय मैंने अपनी जीभ को उसकी
चूत में डाल दिया, में चूत को चूसने लगा और बाहर आते पानी को पीने लगा। फिर साथ ही
साथ में उसके दाने को अपनी जीभ से टटोलने लगा था, मेरे यह सब करने की वजह से वो
एकदम मधहोश हो गई और वो मेरे लंड पर अपने दाँत को चुभाते हुए और भी ज़ोर से लंड को
चूसने लगी।

दोस्तों वो उस समय बड़ी जोश में थी और इसलिए थोड़ी ही देर में उसकी चूत
ने और भी पानी बाहर निकाल दिया, में उसको वैसे ही चूसता रहा और मुझे उसका स्वाद
बड़ा अच्छा लगा, लेकिन दोस्तों किसी कुँवारी चूत का पानी पीने का मेरा यह पहला मौका
था। फिर उसके कुछ मिनट बाद ही उसके मुहं में मेरे लंड ने भी ढेर सारा गरम गरम
वीर्य निकाल दिया जो सीधा उसके गले में पहुंच गया और उसने बड़े ही प्यार से मेरा
पूरा वीर्य बिना किसी नाटक नखरा किए गतल लिया। फिर उसके बाद भी उसने मेरे लंड को चूसना
नहीं छोड़ा, करीब तीन-चार मिनट के बाद मेरा लंड एक बार फिर से तनकर खड़ा हो गया। अब उसकी
हरकतों से मुझे लगने लगा था कि वो मेरे लंड से चुदाई के लिए अब पूरी तरह से तैयार
है। फिर यह बात सोचते हुए मैंने उसको पलंग पर सीधा लेटा दिया और उसके बाद मैंने उसके
कूल्हों के नीचे एक तकिया लगा दिया, जिसकी वजह से उसकी चूत ऊँची होकर बहुत ऊपर आ
गई। अब मैंने अपने लंड को उसकी चूत के होंठो पर घुमाना शुरू किया और साथ ही साथ
में चूत के दाने को भी सहलाने लगा था। फिर मुझे टोपे को थोड़ा सा अंदर करने के बाद महसूस
हुआ कि उसकी चूत गीली होने के साथ साथ तंदूर की तरह गरम भी थी।

दोस्तों में अपने लंड को चूत के निशाने पर रखकर धक्का देने ही वाला था
कि उसने मुझसे कहा कि उसने इससे पहले कभी किसी से अपनी चुदाई नहीं करवाई है और मेरा
इतना मोटा लंबा लंड उसकी चूत में कैसे जाएगा? और अगर यह किसी तरह अंदर चला भी गया
तो इसकी वजह से मुझे कैसा और कितना दर्द होगा? में इसको अपनी छोटी सी चूत में कैसे
अंदर ले सकती हूँ? वो मेरे दमदार लंड को देखकर डर चुकी थी। फिर मैंने उसको बड़े ही
प्यार से समझाते हुए कहा कि इस पहली बार के काम में तुम्हे थोड़ा सा दर्द जरुर होगा,
लेकिन फिर उसके बाद तुम्हे वो मस्त मज़ा आएगा जिसको तुम पूरे जीवन याद रखोगी, तुम्हे
दोबारा भी मेरे लंड को अपनी चूत में लेने की याद हमेशा आएगी। फिर तुम खुद ही मुझे
आकर अपनी चुदाई को करने के लिए कहोगी और वैसे भी में तुम्हारे इस दर्द को समझते
हुए धीरे धीरे करूंगा, लेकिन फिर भी तुम्हे थोड़ा दर्द सहना ही होगा। अब मैंने जाकर
क्रीम लाकर सबसे पहले अपने लंड और उसके बाद उसकी चूत पर लगाकर दोनों को एकदम चिकना
कर दिया और उसके बाद अपने लंड को धीरे से उसकी चूत के मुहं पर रखकर धक्का देते हुए
अंदर डालने लगा। दोस्तों तब मुझे ठीक से पता चला कि उसकी चूत बहुत ही ज्यादा कसी हुई
थी, जैसे वो किसी छोटी बच्ची की चूत हो।

अब इस वजह से मेरे लंड का टोपा उसके अंदर जाते ही वो ज़ोर से चीखकर कहने
लगी, आह्ह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है, प्लीज में मर जाउंगी इसको बाहर
निकालो आह्ह्ह्ह प्लीज। अब बस भी करो मेरे लिए यह दर्द सहना और यह सब आगे करना बड़ा
मुश्किल है इसकी वजह से में मर ही जाउंगी। फिर में उसकी वो चीखने की आवाज सुनकर
वहीं पर रुक गया, लेकिन मैंने अपने लंड को बाहर नहीं निकाला और अब में उसके बूब्स
को अपने दोनों हाथों से सहलाने हल्के से दबाने लगा और साथ ही साथ उसके रस भरे होंठो
को भी चूमने लगा। फिर थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि उसका दर्द कम हो चुका था,
वो गरम होकर दोबारा जोश में आ चुकी थी और अपने मुहं से आह्ह्ह करके कामुक आवाजे
निकालने लगी। अब मैंने ठीक मौका देखकर अपने लंड से उसकी चूत पर थोड़ा सा ज़ोर लगा
दिया, जिसकी वजह से अब मेरा लंड उसकी चूत में तीन इंच अंदर चला गया, लेकिन दर्द की
वजह से वो ज़ोर से चिल्लाने लगी और पसीने में नहाकर वो बिन पानी की मछली की तरह मचलने
लगी। अब वो सिसकियाँ लेते हुए मुझसे कहने लगी आईईईईइ ऊईईईईई माँ में मर गई, प्लीज़
अब तुम इसको बाहर निकालो मुझे बड़ा अजीब सा दर्द हो रहा है।

फिर मैंने उसके बूब्स को सहलाते हुए उसको कहा कि पहली बार में सभी को थोड़ा
सा दर्द जरुर होता है अभी तुम्हारा यह दर्द भी खत्म हो जाएगा और उसके बाद तुम मेरे
साथ वो मज़े करना और यह बात कहकर में उसको चूमने लगा। फिर कुछ देर के बाद वो शांत
हो गई और कहने लगी चलो ठीक है, अब इसके आगे का भी काम तुम जल्दी से पूरा करो अब मेरा
तेज दर्द चला गया। अब मैंने उसको बोला कि तुम अब अपना मुहं बंद रखना, में अब अपना
पूरा लंड तुम्हारी चूत में डालने जा रहा हूँ। फिर उसने जोश में आकर कहा कि हाँ ठीक
है, अगर में ज़ोर से चिल्लाने भी लगूं तब भी तुम रुकना नहीं इस काम को अब एक ही बार
में पूरा करना। अब में उसके मुहं से यह बात सुनकर बड़ा खुश हुआ और अब में धीरे धीरे
अपने लंड को उसकी चूत में तीन इंच ही अंदर बाहर करने लगा, जिसकी वजह से उसको भी बड़ा
मस्त मज़ा आने लगा और वो जोश में आकर मुझसे ज़्यादा चिपकने लगी। फिर अचानक से मैंने
सही मौका देखकर एक ज़ोर का झटका दिया और उसी के साथ अपना पूरा लंड उसकी चूत की गहराई
में डाल दिया। अब उस दर्द की वजह से वो बहुत ज़ोर से चीखने लगी और वो ज़ोर से
तड़पने लगी उसके मुहं से उसकी चीख अंदर ही दबी रही।

फिर में वो सब देखकर उसी समय वैसे ही रुक गया, मैंने अब उसको बड़े ही प्यार
से समझाया कि मेरा पूरा लंड अब उसकी चूत में जा चुका है। अब तुम्हे बस थोड़ा सा दर्द
होगा, लेकिन उसके बाद में जो मज़ा तुम्हे आएगा उसकी वजह से तुम यह पूरा दर्द भुल जाओगी।
फिर करीब पांच मिनट तक में सिर्फ़ उसके बूब्स को चूसता रहा और उसके पूरे बदन पर अपने
हाथ को घुमाता रहा, धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ और उसको जोश आने लगा और इसलिए वो
मुझसे चिपक गई और अपने कूल्हों को ऊपर उठाने लगी। फिर में तुरंत समझ गया कि में
इसकी चुदाई का काम अब पूरा कर सकता हूँ और इसलिए मैंने धीरे धीरे अपने लंड को उसकी
चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया। अब मेरा लंड उसकी गीली एकदम चिकनी चूत में
फिसलता हुआ बड़े आराम से अंदर बाहर होने लगा था, मेरे ऐसा करने के थोड़ी ही देर में
उसको भी मज़ा आने लगा था और वो भी नीचे से हिल हिलकर मेरे साथ अपनी चुदाई का मज़ा
लेने लगी। फिर करीब दस मिनट तक में उसको वैसे ही हल्के धक्के देकर चोदता रहा और इतनी
देर में वो दो बार झड़ चुकी थी, जिसकी वजह से उसकी चूत पहले से ज्यादा गीली चिकनी हो
गई। अब उसका दर्द भी एकदम कम हो गया और वो बहुत मज़े लेकर चुदवाने लगी, मैंने अब
अपने धक्को की गति को पहले से ज्यादा तेज कर दिया था।

अब में उसको बहुत तेज़ी से धक्के देकर चोद रहा था, करीब पन्द्रह मिनट
के बाद मैंने उसको कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ, में अपने वीर्य को कहाँ निकालूं?
तब उसने कहा कि तुम अपना पूरा लावा मेरी चूत में ही निकाल दो और उसी समय मैंने
अपने वीर्य से उसकी चूत को भर दिया और करीब दस मिनट तक में उसके ऊपर वैसे ही लंड
को अंदर डाले, उसकी छाती पर लेटा रहा। फिर उसके बाद हम दोनों उठे मैंने उसके चेहरे
की तरफ देखा वो बड़ी खुश नजर आ रही थी और फिर बाथरूम में जाकर उसने अपनी चूत और
मेरे लंड को पानी से धोकर साफ किया। फिर उसके बाद हम दोनों वापस आकर उसी पलंग पर
बैठ गये, मैंने उसके पास आकर उसको अपनी बाहों में लिया। अब वो शरमाती हुई मेरी
छाती में अपने मुहं को घुसाकर लेट गई, उसके वो बड़े आकार के बूब्स गरम बदन मेरे
शरीर से छुकर मुझे बड़ा मज़ा दे रहा था। फिर उसके बाद हमे पता ही नहीं चला कि कब हम
दोनों वैसे ही पूरे नंगे गहरी नींद में सो गए। फिर दूसरे दिन सुबह मेरी नींद खुली,
तब हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और उसके बाद में अपने घर चला गया। दोस्तों यह
थी मेरी सच्ची चुदाई की कहानी जिसमे मैंने अपनी पड़ोस में रहने वाली कुंवारी चूत को
चोदकर मज़े लिए और खेल को खेलने के बाद हम दोनों बड़े खुश थे।

धन्यवाद …


Source: http://www.kamukta.com/feed/

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.