देवर ने मेरी प्यास बुझाई

प्रेषक : स्वाती …

हैल्लो दोस्तों में स्वाती कामुकता डॉट कॉम पर पिछले कुछ सालों से
लगातार सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े ले रही हूँ, मैंने अब तक बहुत सारी
कहानियों के मज़े लिए ऐसा करना मुझे बड़ा अच्छा लगा। दोस्तों मेरा नाम स्वाती है, मेरी
शादी को पूरे तीन साल हो चुके है और अब मेरी एक डेढ़ साल की बच्ची भी है। अब मेरे इस
नये परिवार में सास-ससुर बड़े देवर उनकी पत्नी में और मेरे पति एकसाथ ही रहते है।
दोस्तों मेरे बड़े देवर एक प्राईवेट कंपनी में मैंनेजर है और उनकी पत्नी मुम्बई की
रहने वाली है और वो दोनों ही स्वभाव से बड़े अच्छे है। दोस्तों मेरी देवरानी तो
दिखाने में बहुत सुंदर है और मेरे देवरजी का तो क्या कहना? वो तो हर दिन सुबह 5:30
बजे उठकर पास के मैदान में कसरत करने को जाते है, चाहे बारिश, ठंड हो या गरमी,
लेकिन उनका स्वाभव थोड़ा गरम होने की वजह से घर में सभी लोग उनसे बहुत डरते है।
दोस्तों मेरे पति भी एक कंपनी में है, जिसमे उनको कम से कम 12 घंटे तक खड़े रहकर
ही काम करना पड़ता है। फिर मेरा यह सेक्स जीवन पहले साल तो बहुत अच्छा रहा, रात में
दिन में जब चाहे तब हम सेक्स का आनंद उठा लेते थे क्योंकि हमारा अपना एक अलग कमरा है,
लेकिन बाद में जब एक लड़की हो गयी, तब से मेरे पति मुझसे नाराज़ हो गये मुझे अब ऐसा
लगता था और उस वजह से हमारा सेक्स जीवन भी अब बहुत बोरिंग हो गया।

दोस्तों हमारे परिवार में एक प्रथा है कि जो कोई भी सेक्स का मज़ा लेता
है, उसको नहाते समय अपने सर को भी धोना पड़ता है और में तो अब अपने पति के साथ बस सप्ताह
में दो बार सेक्स का आनंद लेती, क्योंकि मेरे पति उनके काम से बहुत ज्यादा थककर
आते थे जिसकी वजह से वो जल्दी ही सो जाते थे, लेकिन में मेरी देवरानी को ध्यान से
देखती थी। दोस्तों वो तो हर दिन ही अपने सर को धोकर नहाती थी जिसका मतलब यह था कि
देवरजी और वो हर रात को जमकर सेक्स करते। एक दिन घर में कोई नहीं था में और मेरी
देवरानी दोनों ही थे, घर के बाकी सभी लोग बाहर गए हुए थे, मेरे देवरजी काम पर और
मेरे पति भी उनकी कंपनी में चले गए। फिर दोपहर के समय खाना खाने के बाद में और
मेरी देवरानी दोनों टीवी पर एक हिन्दी फिल्म देख रहे थे। तभी अचानक से उसमे एक
सेक्सी द्रश्य चालू हो गया, जिसमे एक लड़का अपनी प्रेमिका का चुंबन ले रहा था और
उसी सम्मी मैंने अपनी देवरानी की तरफ देखा तो वो मेरी तरफ देखकर बहुत शरमा गयी। अब
मैंने उनको कहा कि इसमे इतना शरमाने की क्या बात है? क्या देवरजी कभी आपका चुंबन नहीं
लेते? तब वो बोली कि अरे यह तो कुछ भी नहीं है वो तो मुझे ऐसा चुम्मा करते है कि आप
पूछो ही मत।

दोस्तों उसके मुहं से वो बात सुनकर मेरी उत्सुकता अब पहले से भी ज्यादा
बढ़ गई, में उसी समय उठाकर बाथरूम के बहाने जाकर देख आई कि बाहर कोई नहीं है और में
वापस उनके पास जाकर बैठ गयी और अब मेरा एक हाथ उनके पेट के ऊपर था। अब मैंने उनसे
पूछा कि आप दोनों कैसे सेक्स करते हो? पहले तो वो मेरी बातों का जवाब देने में शरमा
रही थी, लेकिन वो टीवी पर उस सेक्सी द्रश्य को देखकर भी मेरे साथ खुल गयी और फिर
वो आगे की बातें खुलकर बताने लगी कि कमरे में जाते ही वो बड़े प्यार से मुझे अपनी
बाहों में ले लेते है। फिर हम दोनों सोफे पर बैठते है, उसके बाद वो मेरे बाल से
क्लिप निकालकर उन्हे खुला कर देते है और फिर बालो में हाथ डालकर वो मुझे चूमना प्यार
करना शुरू कर देते है, सबसे पहले तो वो मेरे होंठो पर चुम्मा करते है और फिर धीरे
धीरे अपनी जीभ को वो मेरे मुहं में डालना शुरू कर देते है। फिर में भी अपनी जीभ से
उनकी जीभ को चूसने लगती हूँ। दोस्तों उसकी वो सभी बातें सुनकर अब मेरी सांसे तेज़ी से
चल रही थी और जोश की वजह से मेरी पेंटी भी गीली होने लगी थी, मैंने उनके पेट पर हाथ
फेरना शुरू किया था वो भी अब मुझसे बहुत खुलकर बातें कर रही थी।

फिर वो कहने लगी कि चुम्मा करने के बाद वो मेरे बूब्स को सहलाकर एक एक
बूब्स को अपने मुहं में लेते है, उसके बाद वो दोनों बूब्स की निप्पल को अपने मुहं में
लेते है। दोस्तों अब मैंने उनके बूब्स को हाथ लगाया तो वो चकित हो गयी और पूछने लगी
कि यह आप क्या कर रही हो? मैंने बोला कि में तुम्हारे बूब्स का आकार देख रही हूँ उनके
बूब्स का आकार 32 और वो बहुत ही पतली थी। अब वो बताने लगी कि कुछ देर बाद में वो
धीरे धीरे मेरे पूरे बदन पर चुम्मा करते है और आख़िर में वो मेरी पेंटी पर चुम्मा
करते करते अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर डालकर मेरी चूत के दाने को चूसना सहलाना
शुरू कर देते है। फिर वो इतना सब करके मेरे पूरे बदन को ऐसा सुन्न कर देते है कि
में आपको किसी भी शब्दों में बता नहीं सकती। दोस्तों में अब पूरी तरह से गरम हो चुकी
थी मैंने उनका एक हाथ अपने बूब्स पर रख दिया और उनको कहा कि आप मेरे बूब्स का आकार
भी छुकर बता दो। अब उन्होंने धीरे से अपना हाथ मेरी छाती पर घुमाना शुरू कर दिया, मेरे
बूब्स उनसे ज्यादा बड़े थे वो बोली कि उन्हे (देवरजी को) तो बड़े बूब्स बहुत पसंद
है। अब में तो उनकी वो बात सुनकर मन ही मन में देवरजी के बारे में सोचने और उनके
विचार अपने मन में लाने लगी और फिर उन्होंने मुझे बताया कि उनका सेक्स कम से भी कम
40 मिनट तक चलता है।

फिर उस चुदाई में वो बहुत सारी तरह से चुदाई करके मज़े लेते है और अब उन्होंने
मुझे यह भी बताया कि देवरजी का वो ठीक तरह से ज्यादा देर साथ नहीं दे सकती क्योंकि
वो बहुत पतली है और देवरजी का बदन बहुत गठीला है। दोस्तों में हैरान हो गई की 40 मिनट
तक वो दोनों सेक्स का मज़ा लेते है, लेकिन मेरे पति तो बस 8-10 मिनट में ही झड़
जाते है। अब मैंने उनके बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया और में धीरे धीरे उनकी चूत
के पास जाने लगी, तब मैंने देखा कि उनकी चूत बहुत गोरी थी और खासकर साफ भी थी। फिर
वो कहने लगी कि देवरजी को साफ चूत बहुत पसंद है और उन्हे चूत को चाटने में बहुत
मज़ा आता है। दोस्तों मैंने तो मन ही मन में ठान लिया था कि में जिंदगी में अगर मुझे
कभी भी मौका मिला तो में अपने देवरजी से ज़रूर अपनी चूत की चुदाई चटाई करवाउंगी।
अब देवरानी ने मुझे बताया कि उनका तो लंड भी बहुत मोटा है, वो करीब करीब 6 इंच
लंबा और मेरे पति का तो 5 इंच ही है और यह बात सुनकर मैंने पक्का कर लिया कि मुझे
तो बस अब कैसे भी करके देवरजी से अपनी चुदाई करवानी है और में उसी गहरी सोच में डूब
गई। फिर उसी समय देवरानी मुझसे पूछने लगी कि आप क्या सोच रही हो? क्या उनसे अपनी
चूत को चुदवाना चाहती हो? में उनके मुहं से यह बात सुनकर शरमा गई और मैंने उनको ना
कह दिया।

फिर हम दोनों उठ गये, उसके बाद वो नहाने चली गयी क्योंकि दोनों का
पानी निकल चुका था, लेकिन में अब अपने देवरजी के बारे में सोचती हुई अपनी चूत को सहलाती
रही और मन ही मन में अपना बदन देवरजी को सोप चुकी थी। दोस्तों क्योंकि मेरे पति का
लंड भी आकार में छोटा था, उनको सेक्स करने में इतनी रूचि भी नहीं थी और हमारा
सेक्स का समय भी कम था और में जिस मौके की तलाश में थी वो मौका मेरी अच्छी किस्मत
से बहुत जल्दी आ गया। दोस्तों उस समय मेरी सास के भाई के लड़के की रविवार को शादी
थी और शनिवार को हम सब बैठकर विचार करने लगे, वो शादी गाँव में थी और गाड़ियों की
कमी की वजह से हम सभी कैसे जाए? अब मेरे देवरजी बोले कि में तो नहीं जा सकता
क्योंकि मुझे छुट्टी नहीं है, लेकिन वो बोले कि में आप लोगों के लिए एक गाड़ी का
जुगाड़ जरुर कर सकता हूँ। फिर उन्होंने गाड़ी की समस्या को हल कर दिया और फिर खाना
खाने के बाद हम सोने चले गये, लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी क्योंकि में सोच रही
थी कि देवरजी तो शादी में नहीं जाने वाले थे और वो यहाँ घर पर अकेले ही रहेंगे। अब
यह बात सोचकर ही मेरी नींद उड़ चुकी थी में मन ही मन अपनी प्यासी चूत की चुदाई
अपने देवर के दमदार लंड से करवाने के सपने देखने लगी और विचार बना रही थी।

फिर मेरे पति मुझसे पूछने लगे कि तुम क्या सोच रही हो? में बोली कि कुछ
नहीं, फिर वो मुझे चूमने लगे और में भी पहले से गरम ही थी। फिर उस रात को मुझे
उनसे चुदाई करवाने में बड़ा मज़ा आ रहा था, लेकिन 5-10 मिनट में ही वो झड़ गये, जिसकी
वजह से मेरी चूत की प्यास और ज्यादा बढ़ गई। फिर चुदाई करने के बाद मेरे पति मुझसे
बोले कि सो जाओ सुबह जल्दी उठना है और वो इतना कहकर सो गये, लेकिन में तो अब भी प्यासी
ही थी इसलिए मुझे नींद नहीं आ रही थी। अब में तो सोच में ही थी कि तभी मुझे कुछ
आवाज़े आने लगी और उसी समय मेरे मन में शंका जाग उठी कि कहीं यह मेरी देवरानी की
आवाज़ तो नहीं है? मैंने उठकर देखा कि मेरे पति तो गहरी नींद में सो चुके है और फिर
में तो नंगी उठकर पास वाली दीवार को कान लगाकर ध्यान से बातें सुन रही थी। अब मेरी
देवरानी तो सेक्स का मज़ा ले रही थी और उसके मुहं से आह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह बस करो सीईई
आवाज़े आ रही थी। फिर मैंने सुना कि उनके पलंग की आवाज़ भी मेरे कानो में आ रही थी
और देवरानी बोली कि थोड़ा धीरे से करो ना आप बहुत ही ज़ोर से कर रहे हो।

अब देवरजी बोले कि अरे सेक्स का मज़ा तो ज़ोर से ठोकने में ही है धीरे
धीरे करने के लिए क्यों तुम मुझसे बोल रही हो? वो कहने लगी कि कितनी देर हो गई?
अपनी चुदाई चल रही है अब तो धीरे करो। अब देवर ने बोला कि करीब बीस मिनट हो गये है
और अभी बहुत सारी चुदाई बाकी है। फिर उसी समय देवरानी बोली कि मेरा आने वाला है और
आमम्म्मा उफफ्फ्फ्फ़ करने लगी और फिर शायद वो झड़ गयी, लेकिन देवर तो अब भी रुकने
का नाम ही नहीं ले रहे थे, वो तो ठकाठक चुदाई करते जा रहे थे और दस मिनट के बाद
देवर ने ज्यादा ज़ोर से धक्के देकर चुदाई शुरू किया। अब देवरानी की आवाज़े भी अब
ज्यादा ज़ोर से आने लगी थी, में तो वो सब सुनकर ही हैरान और गरम हो गयी। दोस्तों एक
तरफ मेरा पति था जो पांच-दस मिनट में थककर सो गया था और दूसरी तरफ मेरे बड़े देवरजी
थे, जो इतनी लंबी चुदाई के बाद भी अब रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। फिर इतने में
मैंने सुना कि देवरानी उनको बोल रही थी कि बस करो उफ्फ्फ्फ़ आईईईईईई बस करो। अब
देवरजी गुस्सा हो गये और वो उनके ऊपर से उठ गये और बाथरूम में जाने की आवाज़ को सुनकर
में बाथरूम के दरवाजे से देखने लगी जो आधा खुला ही था। अब देवरजी अपना तनकर खड़ा लंड
हाथ में लेकर हिला रहे थे और वो अपने मुहं से बोल रहे थे, काश मुझे चुदाई के लिए दूसरी
कोई मिल जाए।

दोस्तों क्योंकि मेरी देवरानी ने तो उनका पूरा मुड ही खराब कर दिया था
और वो चुदाई के प्यासे थे, कुछ देर बाद उनका वीर्य गिर गया। फिर में तुरंत ही उधर
से निकलकर अपने पलंग पर आकर सोने लगी। अब मेरे मन में एक विचार आया कि क्यों ना में
भी घर पर ही रुक जाऊं और मैंने अपनी चूत की चुदाई करवाकर प्यास बुझाने का पक्का विचार
बना लिया था। फिर सुबह होते ही मेरे पति मुझसे बोले कि चलो जल्दी से तैयार हो जाओ हमे
जल्दी निकलना है, लेकिन मेरी तो जाने की बिल्कुल भी इच्छा नहीं थी और इस वजह से में
बहाना ढूंढने लगी और फिर में उठकर बाथरूम में चली गयी। फिर नहाते समय में बहाना सोचने
लगी और उसी समय अचानक साबुन मेरे हाथ से फिसल गया और मेरे दिमाग की बत्ती जल गई, क्यों
ना साबुन का स्तमाल किया जाए? अब मैंने ठीक वैसा ही किया। फिर मैंने साबुन को दरवाजे
के बाहर रखकर उसके ऊपर अपना पैर रख दिया, चिकने साबुन की वजह से में फिसलकर गिर
पड़ी और रोने लगी। अब मुझे मेरे पति ने उठाकर वो मुझसे पूछने लगे क्यों क्या हुआ? अब
मैंने जवाब दिया कि में फिसल गई और मुझसे उठा नहीं जा रहा है और उसी समय उन्होंने नीचे
बैठकर मुझे अपनी गोद में उठाया और पलंग पर लेटा दिया और फिर वो मुझसे पूछने लगे क्या
तुम्हे ज्यादा चोट लगी है?

अब मैंने बिना कुछ कहे ज़ोर से रोना शुरू कर दिया, तब वो बोले कि जाने
दो में आज शादी में नहीं जाता अगर तुम मेरे साथ में नहीं तो मज़ा नहीं आएगा, लेकिन
मैंने उनको कह दिया कि आपको तो जाना ही पड़ेगा क्योंकि सब जा रहे है और यह तो गाँव
में आखरी शादी है। फिर वो कहने लगे कि ठीक है, लेकिन तुम अपना ध्यान रखना और फिर सारे
लोग गाँव के लिए निकल पड़े, घर पर में और मेरे बड़े देवर ही थे। फिर जैसे ही सब लोग
निकल गये, मेरे देवरजी अब उठकर हर रोज की तरह क्रिकेट खेलने को जाने लगे। अब में उनके
सामने अपने पैर के झूठे दर्द को लेकर चिल्ला उठी बोली कि मेरे पैर में बहुत दर्द
कर रहा है, वो मेरी आवाज सुनकर रुक गये और फिर मैंने उनको कहा कि मेरे पैर में
बहुत दर्द हो रहा है। अब वो मुझसे बोले कि चलो हम डॉक्टर के पास चलते है, मैंने उनको
कहा कि मुझे डॉक्टर के पास नहीं चलना और वैसे भी इतनी सुबह डॉक्टर नहीं मिलेगा। फिर
वो भी मेरी बात को सुनकर परेशान हो गए कि वो अब क्या करे? दोस्तों वो एक बहुत
अच्छे खिलाड़ी थे इसलिए वो मुझसे पूछने लगी कि क्या में तुम्हारे पैर की मालिश कर दूँ?
मैंने तुरंत हाँ कर दिया क्योंकि ऐसा मौका फिर बार बार नहीं आने वाला था और में
इसे गवाना नहीं चाहती थी।

अब उन्होंने तेल को गरम करने के लिए गेस को जला दिया, उस पर तेल को रख
दिया और वो मेरे पास आकर मुझसे पूछने लगे कि बताओ आपको कहाँ दर्द हो रहा है? में शरमा
गई तो वो बोले कि अरे इसमे शरमाने की क्या बात है? अगर आप मुझे दर्द की जगह नहीं
बताओगी तो में कहाँ मालिश करूंगा? तब मैंने उन्हे बताया कि घुटने के ऊपर और मुझे
मेरी कमर में भी मोच आई है। अब वो बोले कि हाँ ठीक है और वो उठकर रसोई में चले गये
और गरम किया हुआ तेल लेकर वापस पलंग पर आ गए। दोस्तों पूरे घर में उस समय मेरे और
उनके अलावा कोई भी नहीं था, इसलिए वो भी टेंशन में थे। अब मैंने उनको पूछा कि क्या
बात है? वो बोले कि में तुम्हे कैसे मालिश करूं तुम तो मेरे भाई की पत्नी हो? और एक
पराई औरत को तो में हाथ भी नहीं लगा सकता। फिर मैंने उसी समय झट से बोला कि हाँ रहने
दो मेरी जान भी चली जाए तो आपको क्या दर्द होगा? वो तो मुझे हो रहा है तो होने दो,
लेकिन में तो किसी भी डॉक्टर के पास नहीं जाऊंगी। अब आप मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो
और आप बाहर खेलने जा सकते है। अब वो बोले कि नहीं मेरा कहने का मतलब यह था कि अगर
किसी ने मुझे यह सब करते हुए देख लिया तो क्या होगा?

मैंने कहा कि इस समय घर में कोई भी नहीं है और उसमे इतना डरने की क्या
बात है? फिर ऐसा कहने से वो मालिश करने को तैयार हो गये और उन्होंने मालिश करना
शुरू कर दिया। फिर जैसे ही उन्होंने मुझे छुआ मेरे तो पूरे बदन में करंट दौड़ने लगा
में गरम हो गई और कांप उठी उनके हाथ का स्पर्श बहुत ही सख्त था, लेकिन मुझे वो अच्छा
लगने लगा। दोस्तों मैंने उस दिन जानबूझ कर पेंटी नहीं पहनी थी और ब्रा भी नहीं
पहनी थी, वो मेरे घुटनों तक मालिश कर रहे थे और मैंने उसी समय उनको कहा कि मुझे घुटने
से ऊपर मोच आई है। अब वो शरमाकर बोले कि कोई देख लेगा, मैंने कह दिया कि आप उठकर दरवाजा
बंद कर दो और मालिश करो। फिर उन्होंने जाकर दरवाजा बंद कर दिया और तेल की बोतल
लेकर मेरे गाऊन को उन्होंने घुटनों के ऊपर तक उठाया और जैसे ही उन्होंने मेरा गाऊन
उठाया उसके बाद वो देखकर हक्के बक्के रह गए। दोस्तों शायद उनको मेरी चूत दिखाई दी
होगी और अब वो भी जमकर मालिश करने लगे, मेरी नज़र उनके लंड के ऊपर पड़ गई मैंने देखा
कि वो कपड़ो से बाहर निकलने को तैयार था और फड़फड़ा रहा था। अब मैंने अपनी दोनों
जांघे थोड़ी फैला दी जिसकी वजह से जैसे ही उन्हे मेरी चूत के दर्शन हुए वो भी
थोड़े गरम हो गये, वो अब बड़े ही सेक्सी मिज़ाज में मालिश कर रहे थे।

फिर उसी समय मैंने भी थोड़ा सोने का नाटक करना शुरू कर दिया, उन्होंने
धीरे धीरे मेरी जाँघो से लेकर मेरी चूत तक अपना एक हाथ आगे बढ़ाना शुरू कर दिया,
जिसकी वजह से कुछ देर बाद मेरा तो पानी निकल गया। अब शायद उन्हे भी उसकी गंध आ गयी
होगी और उन्होंने एक बार फिर से मेरी चूत को छूना शुरू किया और थोड़ी ही देर में
उनकी एक उंगली मेरी चूत की दीवार में टकराने लगी और में उस पहले स्पर्श की वजह से ठंडी
साँसे भरने लगी थी। अब देवरजी ने मुझे उठाने का प्रयास किया वो बोले कि स्वाती उठो,
लेकिन में सोने का नाटक कर रही थी। दोस्तों उन्होंने भांप लिया था कि में भी चूत को
छूने का आनंद ले रही हूँ और इसलिए उन्होंने दोबारा अपना खेल शुरू कर दिया, लेकिन अब
वो सीधा मुझे अपनी ऊँगली से चोद कर रहे थे। अब उनकी उंगली मेरी चूत में लगातार
अंदर बाहर हो रही थी और कुछ देर बाद में दोबारा झड़ गई। अब मेरा पूरा पानी उनके हाथ
पर निकल गया और उन्होंने वो पूरा चाट लिया अचानक से वो मेरे गाऊन में घुस गए और
मेरी चूत को चाटने लगे, उनके यह सब करने की वजह से में तो खुशी से पागल हो गयी। अब
मैंने अपने गाऊन को उनके सर से हटा दिया और में उठ गयी, वो तुरंत हट गए और वो
मुझसे माफ़ी मांगने लगे और कहने लगी कि मुझसे ग़लती हो गयी।

फिर उसी समय मैंने उनसे पूछा क्या उनको मेरी चूत पसंद नहीं आई? क्या
मेरी चूत देवरानीजी से भी अच्छी है? वो मेरे पास आ गए और मुझे चूमते हुए बोलने लगे
कि तेरी चूत तो स्वर्ग है, इतनी सुंदर चूत मैंने कभी नहीं देखी। अब में तुरंत बोल पड़ी
कि चाटो ना क्यों तुम इतनी देर कर रहे हो? फिर उन्हे सब कुछ समझ में आ गया तब उन्होंने
मेरे गाऊन को उतार दिया और उन्होंने मेरे बूब्स को चूसना शुरू कर दिए, जिसकी वजह
से में तो जोश में आकर बिल्कुल पागल हो चुकी थी और इसलिए मैंने भी उन्हे चूमना शुरू
कर दिया और अब हम दोनों के सर पर सेक्स का भूत सवार हो चुका था हम दोनों ही बहुत प्यासे
थे। अब बूब्स को चूसते चूसते वो मेरी चूत की तरफ बढ़ गये और दोबारा उन्होंने मेरी चूत
को चूसना शुरू कर दिया। अब में भी उनका तना हुआ लंबा लंड पकड़कर बोली कि मुझे भी
उसका मज़ा स्वाद लेना है और अब हम दोनों 69 आसन में आ गये। अब हम दोनों एक दूसरे का
चाटने चूसने लगे, में तब तक तीसरी बार झड़ चुकी थी, मेरे पति के साथ बहुत मुश्किल से
में एक ही बार झड़ती थी, लेकिन आज अपने देवरजी के साथ में अपनी चुदाई के पहले ही
तीसरी बार झड़ी थी।

अब हम दोनों उठकर खड़े हो गये, वो मुझे प्यार रहे थे और उनके प्यार
करने का तरीका ही बहुत सेक्सी था। फिर उन्होंने मुझे अपनी गोद में बैठाकर उठा लिया
और बाथरूम में ले जाने लगे, तब मैंने उनको कहा कि आप इधर ही जल्दी से चोदो ना। फिर
वो बोले कि थोड़ा सा धीरज रखो मेरी रानी तुम्हे इतनी भी क्या जल्दी है? फिर बाथरूम में
उन्होंने फुवारा चालू कर दिया, मैंने पूछा कि उनका क्या करने का इरादा है? तब वो कहने
लगे कि उन्होंने पहली बार जब देवरानी को चोदा था जब ऐसे ही पानी के नीचे ही चोदा
था। अब मैंने उनको पूछा कि देवरानी उस दिन क्यों चिल्ला रही थी? वो मेरी बात को
सुनकर चौक गए और बोले कि तुमने वो सब कब सुन लिया? फिर मैंने उन्हे मेरे सारी
कहानी बता दी कि कैसे में कब से प्यासी रही? और मैंने कैसे प्लान बनाया और हम कैसे
इस मोड़ पर आ गये? फिर वो मेरी पूरी बात को सुनकर खुश होकर मुझे चूमने लगे और पानी
के नीचे मुझे उन्होंने नीचे झुकाकर खड़ा रहने के लिए कहा और जैसे ही में झुक गई
वैसे ही उन्होंने अपना लंड मेरी गीली प्यासी चूत के मुहं पर रख दिया। अब में डर गई
कि कहीं यह आज मेरी चूत को ना फाड़ दे, लेकिन उन्होंने बहुत धीरे धीरे से धक्के
देकर मुझसे चोदना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से में तो अब मज़े की वजह से आसमान पर थी।

अब उनका तगड़ा लंड मेरी चूत में धीरे धीरे करते हुए पूरा अंदर चला गया।
फिर उनकी धक्के देने की गति भी अब धीरे धीरे बढ़ने लगी थी, में तो मज़े ले रही थी और
उनका पूरा पूरा साथ भी दे रही थी, लेकिन कुछ देर बाद अचानक से उन्होंने मुझे
ज्यादा ज़ोर से धक्के देकर चोदना शुरू कर दिया। अब में उनकी वो गति देखकर बिल्कुल हैरान
हो गयी, मैंने मेरी जिंदगी में कभी भी ऐसा दमदार धक्के देकर चुदाई करने वाला नहीं देखा
था। अब मैंने उन्हे बोला कि प्लीज आईईईई थोड़ा सा धीरे धीरे करो, लेकिन वो तो सुनने
के बिल्कुल भी मुड में नहीं थे। फिर कुछ देर बाद मैंने भी उन्हे कहा कि हाँ और
ज़ोर से ज़ोर सीईईईईइ उफ्फ्फ्फ्फ़ हाँ मज़ा आ गया और मेरी आवाज़े निकलने लगी आह्ह्हहह
आउच धीरे करो। अब उन्होंने मेरी चूत को ज़ोर से धक्के मारना जारी रखा, फिर उन्होंने
मुझे वहीं पर पानी के नीचे लेटा दिया और वो मेरे ऊपर लेट गए। फिर मेरे दोनों पैरों
को उन्होंने अपने कंधे पर ले लिया और अपना मोटा खड़ा लंड वो मेरी चूत में डालने लगे
और लंड डालते समय ही मेरी चूत से पानी बाहर आने लगा, लेकिन फिर भी उन्होंने अपना लंड
मेरी चूत में डाल दिया और मेरे दोनों पैरों को पकड़कर चोदना शुरू कर दिया।

दोस्तों उस दिन अपने देवरजी से मेरी तो पूरी प्यास बुझ चुकी थी, लेकिन
मेरा राजा अभी भी प्यासा था और मैंने नीचे से उन्हे अपने कूल्हों को उठाकर साथ
देना शुरू कर दिया। अब वो बोले कि क्या तुम मुझे चोदना चाहती हो? मैंने बोला कि हाँ
में तुम्हे चोदना चाहती हूँ और अब हम दोनों वापस कमरे में आ गये, लेकिन उन्होंने मुझे
बाथरूम से ही पैदल चलकर नहीं आने दिया, वो मुझे अपने लंड पर बैठाकर ही कमरे तक ले
आए। फिर उसके बाद वो लेट गए और में उनके ऊपर चढ़ गई मैंने धीरे धीरे उनका लंड अपनी चूत
में लेना शुरू कर दिया, पहले तो मुझे बहुत दर्द हो रहा था क्योंकि इतनी देर करीब तीस
मिनट तक मैंने कभी भी अपने पति के साथ चुदाई का मज़ा नहीं लिया था, लेकिन कुछ देर
बाद मुझे मज़ा आने लगा था और में अब चुदाई के मज़े से उस स्वर्ग में थी। अब मैंने
धीरे से उठते बैठते हुए थोड़ा अपनी गति को बढ़ा दिया और देवरजी मेरे काम को देखकर बड़े
खुश होकर बोले वाह क्या बात है? क्या आपको फिर से जोश चढ़ गया है? मैंने बोला कि
आपका लंड ही इतना गरम है कि में तो इसकी वजह से एकदम पागल हो गई हूँ, मुझे भी नहीं
पता कि मुझ में इतनी तड़प जोश कहाँ से आ गया? अब उन्होंने मुझे नीचे से धक्के देकर
चोदना शुरू किया और ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगे।

अब मुझे तो इतना मज़ा आ रहा था कि में क्या बताऊ? उसी समय में जोश
मस्ती में दोबारा से झड़ गयी और उसी समय वो भी बोले कि स्वाती मेरा अब निकलने वाला
है आप मुझे बताए में इसको कहाँ निकालूं? फिर मैंने उनको कहा कि तुम मेरे अंदर ही डाल
देना प्लीज़ बाहर मत निकालना मुझे आज इसको अपने अंदर महसूस करना है। अब वो बोले कि
हाँ ठीक है और उसके बाद उन्होंने दोबारा मुझे ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदना शुरू
कर दिया, उन्होंने धक्कों की गति को इतना बढ़ाया कि मेरे बूब्स मेरी कमर और मेरा
पूरा बदन उसकी वजह से हिलने लगा और मेरी चूत में दर्द भी होने लगा, लेकिन देवरजी
रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। फिर उन्ही धक्कों के बीच मुझे मेरी चूत में कुछ
गरम सा महसूस हूआ और उसी समय मैंने अपने एक हाथ से छुकर देखा कि मेरी चूत पूरी की पूरी
उनके वीर्य से भर चुकी थी। अब बहुत सारा वीर्य मेरी संतुष्ट चूत से बाहर निकलकर
मेरी जाँघो पर बह रहा था, मेरी चूत की तो देवरजी ने आज पूरी तरह से प्यास को बुझा दिया
और इस तरह से देवरजी ने मुझे मेरे जीवन में एक स्वर्गीय आनंद दिया जिसकी वजह से
मेरी खुशी का कोई ठिकाना ना रहा। दोस्तों अब तो हमे जब भी कोई मौका मिलता है, तब हम
दोनों सेक्स का पूरा आनंद लेते है और उनसे मुझे एक बेटा भी हो गया है, में तो अब
पूरी तरह से देवरजी की हो गई हूँ।

दोस्तों यह था मेरा वो सेक्स अनुभव जिसमे मैंने अपने देवरजी के लंड से
अपनी प्यासी चूत की चुदाई करवाकर उसको हमेशा के लिए त्रप्त किया और उनके साथ बहुत
मज़े लिए। अब में अपनी अगली किसी सच्ची घटना के साथ दोबारा जरुर आपकी सेवा में चली
आउंगी तब तक के लिए मुझे जाने की आज्ञा दे।

धन्यवाद …


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