एक रात सास के साथ

प्रेषक : अजीत …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अजीत है, में 28 साल का हूँ, मेरी लम्बाई 5.8 इंच है और शरीर से में एकदम फिट हूँ, क्योंकि में बाहर नौकरी करता हूँ। दोस्तों मेरी शुरू से आदत रही है कि जहाँ भी चूत और साँप देखो तो तुरंत उसको मार दो और मुझे शुरू से ही समझदार आंटी बहुत पसंद है, जिनकी गांड और बूब्स बड़े-बड़े हो, क्योंकि अगर बड़ा है तो बेहतर है और इसी आदत की वजह से मैंने अपने जीवन में लड़कियों से ज़्यादा औरतो का यहाँ तक की विधवाओं तक का भी कल्याण किया है। दोस्तों इन आदतों से आप सभी मुझे बड़ी चूत और गांड का दीवाना भी कह सकते है, लेकिन वो सारी दास्तान फिर कभी, लेकिन आज में पहली बार किसी को अपने जीवन का राज बता रहा हूँ, क्योंकि मैंने जब कामुकता डॉट कॉम देखी तब मुझे लगा कि मेरे जैसे और भी लोग इस दुनिया में है जिनके साथ में अपनी बातें कर सकता हूँ और इसलिए आज में आपनी एक सच्ची घटना लिख रहा हूँ। दोस्तों में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को इसको पूरा पढ़कर बड़ा मज़ा जरूर आएगा, यह कहनी थोड़ी लंबी घटना जरूर है, लेकिन जब आप इसको पूरा पढ़ेंगे तब इसको जरूर पसंद करेंगे।

दोस्तों यह बात ज़्यादा पुरानी नहीं है, मेरी शादी अभी पिछले साल ही हुई, मैंने अपने घर वालों की मर्जी से अपनी शादी की है और मेरी बीवी का नाम श्वेता है, उसकी उम्र 24 साल है, वो रायपुर की रहने वाली है और वो मुझे बहुत प्यार करती है, वो दिखने में किसी एक्ट्रेस से कम नहीं है और बिल्कुल छुईमुई सी है। दोस्तों में भी उसको बहुत प्यार करता हूँ, लेकिन यहाँ अकेले में नौकरी करना इतनी बड़ी महाभारत है कि हमेशा ही टेन्शन वाला माहौल रहता है और इसलिए कभी-कभी उसके ना रहने पर में चूत मारने कहीं और भी चला जाता हूँ। दोस्तों मेरी ही तरह श्वेता भी अपने घर पर इकलौती लड़की है और उसके साथ सिर्फ़ उसकी माँ मतलब कि मेरी सास है, जिनका नाम विमला देवी है, जो कि पिछले 12 साल से विधवा है, लेकिन उनके पति मतलब कि मेरे ससुर ने बहुत सारी प्रॉपर्टी छोड़ी है जिसके सहारे उनका काम चल जाता है और उन्ही पैसों से उन्होंने मेरी शादी श्वेता के साथ बहुत धूमधाम से करवाई थी। दोस्तों मेरी सास की उम्र 44 साल है और वो विधवा है, लेकिन देखने में कोई भी उन्हें कह नहीं सकता, क्योंकि वो दिखती बहुत ही सुंदर है, वो बिल्कुल साउथ इंडियन हिरोईन की तरह दिखती है। वो हमेशा साड़ी में ही रहती है और उनका गोरा बदन और उनकी गांड और बूब्स को देखकर तो किसी भी मर्द का लड़ चुदाई के लिए बैचेन हो जाए, कुछ ऐसा आकर्षण उनकी गांड और बूब्स में है।

अब मेरी शादी के बाद सब कुछ ठीक चल रहा था, मैंने श्वेता को अपने साथ ही रखा हुआ था, लेकिन अचानक मेरा तबादला होने की वजह से मुझे नयी जगह सरकारी आवास नहीं मिल सका था और मुझे उसको उसकी माँ के पास छोड़ना पड़ा, क्योंकि अब मेरे घर पर मेरा कोई भी आगे पीछे नहीं है और पिछले तीन महीने से में यहाँ नयी जगह में अकेला था, लेकिन जैसे जीने के लिए खाना जरूरी होता है वैसे ही एक शादीशुदा आदमी के लिए चूत का लगातार मिलना भी बहुत जरूरी होता है और इसी वजह से मैंने पहले ही मौके में छुट्टी भर दी और दिस दिनों की छुट्टियाँ लेकर सीधे में रायपुर चला गया। अब में रास्ते भर यही बात सोच रहा था कि जाकर श्वेता को अचानक से जाकर आशचर्यचकित दूँगा और उसकी जबरदस्त तरह से चुदाई करूँगा। अब यही बात सोचते-सोचते सफर कैसे ख़त्म हो गया? मुझे पता ही नहीं चला था। फिर में स्टेशन से ऑटो करके जैसे ही अपनी सास के घर अचानक पहुँचा, तब मैंने घर के निचले हिस्से के दरवाजे पर ताला लगा हुआ देखा और तब मुझे पहली मंजिल वाले किरायेदारो से पता चला कि वो लोग डॉक्टर के पास गये है और उन्ही किरायेदारो ने मुझे बड़ी इज़्जत के साथ बैठाया, क्योंकि में उस घर का नया नया दामाद जो था और चाय नाश्ते से नवाज़ा।

फिर थोड़ी देर के बाद श्वेता और मेरी सास भी आ गई, तब मुझे पता चला कि बीमार मेरी सास नहीं बल्कि मेरी पत्नी श्वेता है, उसको बुखार और पेट में दर्द है, उसी के चेकअप के लिए वो दोनों डॉक्टर के पास गये थे। फिर मुझे अचानक देखकर वो दोनों बहुत ही खुश हुए और कहने लगे कि बताकर आते तो इतनी देर मुझे उनका इंतज़ार नहीं करना पड़ता। तब मैंने कहा कि कोई बात नहीं, तुमने भी तो नहीं बताया कि तुम बीमार हो और फिर इतनी बात करके हम लोग नीचे अपने हिस्से में आ गये, जहाँ मेरी सास रहती थी। अब नीचे जहाँ मेरी सास रहती थी वहाँ कोई ज़्यादा बड़ी जगह नहीं थी, सिर्फ़ एक हॉल और एक कमरा, रसोई और टॉयलेट बाथरूम था, जो कि मेरी सास के रहने के लिए बहुत था। फिर हम लोग नीचे आए और में फ्रेश होने टॉयलेट में चला गया उसके बाद नहाने धोने के बाद जब में बाथरूम से बाहर आया, तब तक मेरी सास ने मेरे लिए नाश्ता बना लिया था और फिर हम लोगों ने साथ बैठकर एक साथ नाश्ता किया और बहुत सी बातें कि। फिर मैंने अपने सूटकेस से श्वेता के लिए लाए उपहार और सास के लिए लाई हुई साड़ी निकाली और उन्हें दे दी, जो उन्हें बहुत पसंद आई। फिर इसके बाद मेरी सास मुझसे कहने लगी कि क्यों जवाई राजा कुछ दिन भी अकेले नहीं रहा गया, अचानक आ ही गये अपने बड़े साहब को धोखा देकर।

फिर मैंने उनको कहा कि नहीं आंटी (में उन्हें शुरू से आंटी कहता था कई बार श्वेता ने भी मना किया, लेकिन में नहीं सुधरा) बस अब नौकरी में दिल नहीं लग रहा था और इसलिए मिलने चला आया। अब वो कहने लगी कि हाँ, अब दिल क्यों लगेगा? दिल तो यहाँ पर है और अब उन दोनों के चेहरे पर एक अलग सी हँसी आ गई थी, तब में भी हंस पड़ा। फिर ऐसे ही बातों-बातों में दिन के खाने का समय हो गया और उसके बाद में सो गया, क्योंकि आज रात तो मुझे बहुत सारी कार्यवाही जो करनी थी। फिर जब में शाम को उठा, तब भी श्वेता अंदर वाले कमरे में सो रही थी, मैंने उठते ही उसको आवाज़ दी। तब मेरी सास ने कहा कि जवाई राजा वो तो अब तक सो रही है, शायद दवाई का असर है, आप कहो तो में उसको उठा देती हूँ। तब मैंने कहा कि नहीं आप उसको सोने दो, जब तक आख़िर आपसे भी बात कर लूँगा, वैसे भी बहुत दिन हो गये आपसे दिल खोलकर बात किए हुए। अब मेरी सास फिर से हंस पड़ी और मेरे लिए चाय बनाने चली गई थी, उसके बाद हम दोनों ने साथ में चाय पी और इसी दौरान एक बार अचानक से मेरी नजर उनके बदन पर पड़ी, वो आज बहुत ही सेक्सी लग रही थी और उनका बदन किसी भी हिरोईन से कम नहीं लग रहा था।

दोस्तों पता नहीं यह मेरी नजरों का कमाल था या फिर चुदाई की हवस थी, क्योंकि एक जवान बीवी के होते हुए भी मुझे उसकी माँ ज़्यादा सेक्सी लग रही थी। फिर मैंने कई बार आँखों ही आँखों में उनके बदन का नाप ले लिया था, मेरा दिल तो ऐसा कर रहा था कि अभी तुरंत ही उनकी चुदाई कर दूँ, लेकिन रिश्ता कुछ ऐसा फंस रहा था कि दिल की बात दिल में ही दबानी पड़ी। फिर कुछ देर के बाद श्वेता उठ गई और फिर मैंने उसको पूछा कि कैसा लग रहा है? अब इस बीच मेरी सास दोबारा से खाने की तैयारी में लग चुकी थी और में हॉल से ही बैठे-बैठे श्वेता से बात करते-करते उन्हें भी घूर रहा था और श्वेता को भी रज़ाई के अंदर से सहला रहा था, ताकि रात में ज़्यादा कोशिश किए बिना चुदाई करने का मज़ा जल्दी से मिल जाए। दोस्तों उन दिनों ठंड कुछ ज़्यादा ही पड़ रही थी और इसलिए हम दोनों हॉल वाले पलंग पर एक ही रज़ाई में घुसे हुए थे और आपस में बातें कर रहे थे। फिर मैंने धीरे से श्वेता से कहा कि जानेमन आज की रात को यादगार बना देना और उसके बूब्स को दबा दिया, इतना करते ही वो बिगड़ पड़ी और कहने लगी कि मेरा आज ऐसा कुछ भी करने का विचार नहीं है, आज रात आप मुझसे ऐसी कोई भी उम्मीद मत रखना।

अब मैंने सोचा कि अभी यह जबरन बिना मतलब का ड्रामा कर रही है, रात में तो जरूर देगी और फिर इतने में ही सास ने बीच में आकर हमारी बातों को अटका दिया और वो कहने लगी कि हाथ धो लो खाना तैयार है। फिर हम लोगों ने साथ ही बैठकर खाना खाया और टी.वी देखते-देखते ही श्वेता ने फिर से दवाई और फल खाए और फिर वो उसके बाद अपने कमरे में सोने चली गई, जबकि में वहीं अपनी सास के साथ हॉल में बैठकर टी.वी पर एक प्रोग्राम देखने लगा था। फिर थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि रात के 11 बज गये है, तब मैंने सास से कहा कि आपको सोना नहीं है? वो कहने लगी कि हाँ सोना तो है, लेकिन जब तक मेरा जवाई राजा टी.वी बंद नहीं कर देता, में कैसे सो सकती हूँ? अब मुझे लगा कि मैंने जबरन उन्हें इतनी देर तक जगा दिया और अब में भी उसी इकलोते कमरे में सोने चले आया था, जहाँ श्वेता सोई हुई थी। दोस्तों वो कमरा कुछ जरूरत से ज़्यादा ही छोटा था, सिर्फ़ एक दीवान और एक अलमारी के अलावा नीचे आने जाने के लिए थोड़ी सी ही जगह थी, करीब 4 फुट के लगभग। अब में उस कमरे में पहली बार सोने गया था, क्योंकि दिन में भी में बाहर हॉल में ही सोया था और इसके पहले में यहाँ कभी एक रात भी नहीं रुका था, सिर्फ़ आकर दो-चार घंटे में वापस चला जाता था।

फिर जैसे ही में कमरे में गया, तब मैंने देखा कि श्वेता गहरी नींद में सोई हुई थी और वो बल्ब तक बंद करना भूल गई थी। फिर में कमरे में गया और टॉयलेट की तरफ कमरे के बल्ब को बंद करके सीधे श्वेता के साथ बिस्तर के अंदर घुसकर उसके साथ चिपक गया था। अब श्वेता से चिपकते ही मुझे महसूस हुआ कि बाहर सच में बहुत ठंड है, उस समय मुझे एहसास हुआ कि सच में पत्नी के साथ ना रहने पर मैंने कितना कुछ खोया है? अब रज़ाई के अंदर सिर्फ़ में और श्वेता थे और बाकी पूरे कमरे में अंधेरा था। फिर मैंने सीधा अपना एक हाथ श्वेता की नाइटी के अंदर डाल दिया और उसके बूब्स के साथ खेलने लगा था, लेकिन वो अब भी नींद में थी। अब मैंने धीरे-धीरे उसके सारे बटन खोल दिए और आराम से उसके नरम गरम बूब्स को दबाने लगा था। अब श्वेता को भी शायद थोड़ा एहसास हुआ और अच्छा लगने लगा था और इसलिए उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया था और फिर हम दोनों ने एक लंबी चुम्मी ली। अब मेरा एक हाथ उसकी पेंटी तक पहुँच ही रहा था कि तभी अचानक से किसी ने कमरे के बल्ब को जला दिया। तब मेरे मुँह से तुरंत निकलने वाला था कि कौन मादरचोद है? जो अपनी माँ चुदवा रहा है, लेकिन जैसे ही याद आया कि घर में हमारे अलावा सिर्फ़ मेरी सास है।

अब मैंने अपने गुस्से पर काबू किया और नींद खुलने का बहाना करते हुए बोला कि क्या हुआ आंटी? फिर श्वेता भी कहने लगी कि क्या हुआ मम्मी? तभी मेरी सास बोली कि श्वेता हॉल की खिड़की के कांच टूटे है, अंदर बहुत ठंडी हवा आ रही है, इसलिए में वहाँ नहीं सो पाउंगी, क्या में भी इसी कमरे में नीचे सो जाऊँ? में यहीं नीचे ही अपना बिस्तर लगाकर सो जाती हूँ, कल कांच लगवा लेगे। अब सिर्फ़ इतना सुनते ही मेरी झांटो में जैसे आग लग गई और मुझे लगा कि किसी ने मेरे खड़े लंड पर मानो जैसे बिजली सी गिरा दी हो, लेकिन श्वेता और में क्या कर सकते थे? अब श्वेता ने कहा कि ठीक है मम्मी, आप यही सो जाइए और आँखों ही आँखों में मुझे इशारे से चिढ़ाने लगी जैसे कह रही हो कि अब बैठकर अपना लंड हिला, आज चूत नहीं मिलने वाली। अब मैंने भी उसको चिढ़ाने के लिए कहा कि आंटी नीचे नहीं आप ऊपर श्वेता के साथ सो जाओ, में नीचे सो जाता हूँ और फिर में नीचे उतरने लगा। अब मेरे ऐसा करते ही श्वेता ने मुझे इशारा किया कि उसकी नाइटी एकदम खुली है, में नीचे ना जाऊं वरना मम्मी देख लेगी। तब में वहीं रुक गया और तभी सास बोली कि नहीं-नहीं जवाई राजा, आप वहीं सोए रहिए, मेरी तो हमेशा से नीचे सोने की आदत है।

फिर वो कहने लगी कि रोज भी तो हम दोनों ऐसे ही सोते थे श्वेता पलंग पर और में जमीन पर और इतना कहते-कहते ही उन्होंने तुरंत अपना बिस्तर नीचे लगा लिया और बल्ब को बंद कर दिया। तब मुझे थोड़ी सी तसल्ली हुई कि भले ही देर से, लेकिन में आज चूत जरूर मारूँगा, बस अब में अपनी सास के सोने का इंतज़ार करने लगा था, जिसके बाद में दोबारा से चुदाई का कार्यक्रम चालू कर दूँ। अब रात के करीब 12 बज चुके थे और तब कहीं जाकर मुझे महसूस हुआ कि अब मेरी सास गहरी नींद में सो चुकी है और मैंने फिर से अपनी कार्यवाही शुरू कि लेकिन तब मुझे एहसास हुआ कि श्वेता तो सचमुच में सो चुकी है। अब मैंने दोबारा से उसके बूब्स को दबाना शुरू किया और इस बार मुझे वो बहुत गरम लगे, शायद उसका बुखार दोबारा से बढ़ रहा था, लेकिन में नहीं रुका और में उसके बूब्स को सहलाने लगा था। फिर थोड़ी देर के बाद श्वेता चिढ़ते हुए उठी और ऐसा करने से मना करने लगी थी, लेकिन मैंने अपना एक हाथ धीरे से उसके मुँह पर रख दिया और उसके दोनों निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था।

दोस्तों में इतने दिनों के बाद में यह सब कर रहा था जिसकी वजह से मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे में पूरे निप्पल ही खा जाऊं, लेकिन ज़्यादा हल्ला करने से सास उठ ना जाए और इसलिए मुझे सब काम आराम से करना पड़ रहा था, लेकिन श्वेता मेरा बराबर साथ नहीं दे रही थी, जैसे हमेशा देती थी। अब में समझ रहा था कि वो उसकी माँ की वजह से ऐसा कर रही है और इसलिए मैंने भी जल्दी से उसकी पेंटी में अपना एक हाथ डाल दिया और उसकी साफ चिकनी चूत को सहलाने लगा था। फिर इसके बाद में धीरे से उसकी चूत पर गया और रज़ाई के अंदर ही अंदर उसकी चूत चाटने लगा था। तब थोड़ी देर तक तो श्वेता बहुत नाटक करती रही, लेकिन जब में नहीं माना तब उसको एक दमदार आदमी की ज़िद के आगे झुकना ही पड़ा। अब में उसकी चूत को लगातार चाट रहा था और अब श्वेता भी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी और नीचे से वो अपनी गांड को उठा उठाकर मेरा साथ दे रही थी। अब करीब दस मिनट की चूत चटाई के बाद में समझ गया था कि अब तवा गरम है।

अब इसके पहले की फिर से सास उठ जाए पराठा बना ही लेना चाहिए और इसलिए मैंने अपने दमदार लंड को श्वेता के हाथ में पकड़ा दिया और धीरे से उसके कान में कहा कि जान आ जाऊं क्या? तब उसने भी कहा कि अब देर मत करो, जल्दी से समा जाओ, वरना फिर मुझे नींद आ रही है। अब इतना सुनते ही मैंने देर करना मुनासिब नहीं समझा और फिर में श्वेता की चूत पर सवार हो गया और एक ही झटके में मैंने अपना पूरा लंड श्वेता की गीली चूत में डाल दिया, जिसकी वजह से उसके मुँह से एक दर्द भरी चीख निकल गई आहह ऊईईईइ माँ धीरे करो क्या आज तुम मुझे मार ही डालोगे क्या? उस समय के उस एहसास को लिखकर शब्दों में बता पाना बड़ा मुश्किल है, क्योंकि वैसे तो मैंने इतनी सारी चूत मारी है, लेकिन जो चीज अपनी हो उसका इस्तेमाल करने का आनंद ही कुछ और होता है। अब मैंने श्वेता को पूरी तरह से अपने साथ चिपका लिया था और अब हम दोनों चुदाई के अपार सागर में कुछ ही देर बाद गोते लगाने लगे थे। अब मेरे दोनों हाथ श्वेता के बूब्स को मसल रहे थे और अब मेरा लंड बराबर अपनी रफ़्तार से अंदर बाहर हुआ जा रहा था। अब पूरा कमरा जो कि पहले शांत था, अब हम दोनों की चुदाई की आवाज़ो के कारण पछ-पछ की आवाज से गूंज रहा था।

फिर में लगातार अपनी उसी तेज गति से आगे बढ़ाता जा रहा था। तभी श्वेता ने मुझे एकदम से अपने दोनों पैरों से जकड़ लिया और मेरी गति को कम कर दिया। फिर मैंने उसके ऊपर सवार होकर धीरे से उसके कान में कहा कि क्या हुआ जान? मज़ा नहीं आ रहा है क्या? तब श्वेता ने धीरे से जवाब दिया कि धीरे-धीरे करो मम्मी इसी कमरे में है। फिर मुझे याद आया कि हाँ में तो यह बात बिल्कुल भूल ही गया था और लगातार चुदाई करने में लगा हुआ था। अब मैंने भी कहा कि हाँ ठीक है में आगे से ध्यान रखूँगा, अब करने दो और मैंने दोबारा से सावधानीपूर्वक चुदाई आरंभ की और पलंग से नीचे झाँकने लगा कि कहीं मेरी सास जाग ना जाए। तभी मैंने महसूस किया कि जैसे ही खिड़की का पर्दा उड़ता है और बाहर की रोड़ लाईट की रोशनी हॉल से होते हुए रूम में भी आती है, तो उतनी रोशनी बहुत है नीचे सोए इंसान को यह बात समझने के लिए कि में यहाँ चुदाई कर रहा हूँ, लेकिन उस समय मुझे सिर्फ़ अपनी सास के ना जागने की परवाह थी, रोशनी की कोई चिंता नहीं थी। अब में चुदाई करने में अभी भी लगा हुआ था, मैंने फिर से उसी गति में चुदाई करना चालू कर दिया और श्वेता भी नीचे से अपनी गांड को उठा उठाकर मेरा साथ देकर जल्दी से इस अनचाही चुदाई से आजाद होना चाह रही थी।

अब मैंने दोबारा से श्वेता के कान में कहा कि इसके बाद दो बार और ऐसा ही होगा, लेकिन वो कहने लगी पहले जल्दी से यह वाला काम तो ख़त्म करो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है वैसे भी पेट में दर्द है, लेकिन आपको क्या? आप तो मानने वाले नहीं थे और इसलिए मुझे करना पड़ रहा है। तभी मुझे एहसास हुआ कि मेरी सास भी शायद जाग चुकी है, लेकिन अब मेरे लिए रुकना मुमकिन नहीं था। अब मैंने श्वेता को कसकर जकड़ लिया, क्योंकि अब मेरा भी अंत करीब था, जबकि श्वेता इस दौरान कम से कम तीन बार झड़ चुकी थी। अब उसकी चूत ने पानी छोड़कर मेरे लंड को एकदम गीला कर दिया था। अब मैंने भी अपना टॉप गियर लगाकर और तेज धक्के देकर चुदाई करना शुरू कर दिया था और अपना सारा माल श्वेता की चूत में ही डाल दिया था और वैसे ही उसके ऊपर पड़े-पड़े नीचे का नज़ारा लिया, यह देखने के लिए कि जो में अपनी सास को लेकर सोच रहा था, वो कितना सच है? वो सच में जाग रही थी या फिर यह मेरी गलतफहमी है। फिर मैंने अंधेरे कमरे में आती रोशनी में महसूस किया कि मेरी सास ने उसी समय अपनी रज़ाई पूरी ओढ़ ली।

फिर जैसे ही में चुदाई करके रुका, में समझ गया था कि उन्होंने हम दोनों की पूरी चुदाई का एपिसोड देखा है और इसलिए में कुछ देर श्वेता के ऊपर ही पड़ा रहा और अब जानबूझ कर अपने शक को पक्का करने के लिए श्वेता से कहने लगा कि जानेमन कैसा लगा आज का खेल? श्वेता तो वैसे भी ज़्यादा चुदाई की वजह से हमेशा ही मुझसे परेशान रहती थी। अब वो धीरे से कहने लगी कि आज तो आपने जान निकाल दी, अब प्लीज सो लेने दीजिए, बहुत नींद आ रही है। फिर मैंने उसको कहा कि इतनी जल्दी कैसे सो सकती हो? अभी तो मुझे कम से कम दो बार और करना है, लेकिन वो नहीं मानी और बोली कि मुझे दवाई से नशा सा हो रहा है और आपने तो आज इतने दिनों की कसर पूरी करके मेरी हालत ही खराब कर दी है, प्लीज अब मुझे माफ कीजिए। फिर इस बार मैंने महसूस किया कि मेरे सास के कान पूरे समय यह सब सुन रहे थे और अब उन्होंने अपनी रज़ाई भी अपने से अलग कर दी थी और अपने दोनों पैरों को नीचे बिस्तर पर बिल्कुल फैला रखे थे, जिन्हें में ऊपर से बिल्कुल साफ-साफ देख सकता था। फिर में श्वेता से अलग हो गया और वो सच में सोने लगी, तो कुछ ही देर के बाद उसको नींद आ गई, जबकी में बिस्तर के कोने से ही अपनी सास के हुस्न का नज़ारा लेने लगा था। अब वो भी सोने का नाटक कर रही थी, लेकिन मेरा लंड अभी भी बड़ा बैचेन था, क्योंकि इतने दिनों के बाद सिर्फ़ एक बार की चुदाई से मेरा गुज़ारा नहीं होने वाला था। दोस्तों उस रात को मैंने अपनी सास की चुदाई के मज़े लिए और उसकी गांड भी मारी ।।

धन्यवाद …


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