आख़िर पहला अनुभव मिल ही गया

प्रेषक : मयूर …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम मयूर है। यह कहानी मेरी और मेरी गर्लफ्रेंड स्नेहा डार्लिंग के बीच की है। अब में आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालों का ज्यादा समय ख़राब ना करते हुए सीधा अपनी आज की कहानी पर आता हूँ। दोस्तों में 12th क्लास का छात्र हूँ और में अपने जीवन में एक सुंदर प्यारी सी प्रेमिका की तलाश कर रहा हूँ और इसलिए में यहाँ वहाँ भटक रहा हूँ। फिर कुछ समय के बाद मैंने मेरे पड़ोस में अपने एक नये पड़ोसी को देखा और मुझे उस परिवार के बारे में पता चला कि उनके परिवार में चार लड़कियाँ दो लड़के और माँ-बाप थे। अब मेरा दिल सबसे छोटी वाली लड़की पर आ गया था और इसलिए में उसको हर दिन अपनी छत से देखा करता था और कुछ समय के बाद मुझे भी उसकी तरफ से इशारा मिलने लगा था। अब वो भी हर कभी मुझे देखकर हंसने मुस्कुराने लगी थी। फिर एक दिन मैंने हिम्मत करके उसके साथ बात करने का विचार बनाया। तब मैंने उस लड़की से उसका नाम और वो क्या करती है पूछा? तब उसने मुझे बताया कि वो बी.ए पास है और बच्चों को डांस की कोचिंग देती है। अब मेरे तो उसके मुहं से वो बात सुनकर होश ही उड़ गये थे कि में 12th क्लास और वो बी.ए पास, आखिर वो मुझसे कैसे पटेगी? वो हर दिन शाम को घूमने जाती थी और में भी मौका पाकर उसके पीछे-पीछे जाने लगा था।

एक दिन मैंने उसको कहा कि स्नेहा मुझे तुमसे कुछ बात करनी है, क्या में कर सकता हूँ? तब उसने कहा कि हाँ जो भी तुम्हे मुझसे कहना है बड़े आराम से कहो में कुछ नहीं कहूँगी। फिर मैंने उसको कहा कि में तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ, क्या तुम भी मुझसे करोगी? तब उसने हाँ कह दिया और वो हंसकर आगे चली गयी। अब हम दोनों ठीक उसी समय अपने अपने घर से हर दिन निकल जाते, पहले वो निकलती और उसके पांच मिनट के बाद में भी निकल जाता। फिर जहाँ वो घूमने के लिए जाती थी, वहाँ पर में एक जगह पर बैठकर उसका इंतजार करता और उसके आने के बाद हम दोनों हर दिन बातें करने लगे थे। फिर ऐसे ही 10-12 दिन गुज़र गये मुझे पता ही नहीं चला और हम एक दूसरे से मिलते बात करते और फिर वो अपने घर और में अपने घर आ जाता। एक दिन मैंने उसको कहा कि स्नेहा में तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ, क्या तुम मुझसे प्यार करती हो? तब उसने कहा कि में करती तो हूँ, लेकिन में तुम्हारा प्यार कबूल नहीं करूँगी, क्योंकि हमारी उम्र में बहुत फर्क है। अब मैंने उसको कहा कि जब तुम मुझसे प्यार करती हो, तो तुम्हें कबूल भी करना चाहिए, लेकिन वो मना करके चली गयी।

दोस्तों वो दिन मेरे जीवन का पहला दिन था, जब मैंने सिगरेट पी थी। फिर उसके दो-चार दिन तक में उसको नहीं मिला और अब में उसके साथ बात ना करने के बहाने ढूँढने लगा था। फिर एक दिन में उसको शाम के समय घूमते समय मिल गया। तब उसने मुझसे पूछा कि ऐसा रूखापन क्यों मयूर? मैंने तुमने कुछ गलत तो नहीं कहा था, आख़िर हमारे रिश्ते का अंत क्या होगा? हमारी उम्र में बहुत फर्क है, तुम ही बताओ मैंने क्या ऐसा तुमसे गलत कहा जिसका तुम्हे इतना बुरा लगा? अब मैंने उसको कुछ नहीं कहा। फिर तब वो कहने लगी कि हाँ ठीक है, में मानती हूँ कि तुम मुझसे प्यार करते हो और में भी तुम्हे प्यार करती हूँ, लेकिन अगर यह रिश्ता दोस्ती का बना रहे तो इसमें समस्या क्या है? कम से कम हम बात तो कर सकते है और बाद में अगर बिछड़ते है तो ज़्यादा कठिनाई भी नहीं होगी। अब मुझे उसकी पूरी बात को सुनकर लगा कि यह ठीक कह रही है, तब मैंने कहा कि हाँ ठीक है जैसा तुम चाहो। अब तुम तो जानते हो यार बच्चों की आदत क्या होती है? जल्दी रुठ जाते है और लॉलीपोप लेकर मान भी जाते है, तो मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था और उसकी बातों का जादू मेरे सर चढ़कर बोला और में तुरंत मान भी गया।

फिर हम वापस से पहले की तरह बातें करने लगे थे और सब पहले जैसा हो गया था, लेकिन फिर बातें करते-करते हमारे बीच में नज़दीकियाँ बढ़ती चली गयी और हम दोनों बहुत करीब आ गये थे। अब हम दोनों बाहर रेस्टोरेंट में भी मिलने लगे थे और दिन के दो-तीन घंटे साथ में गुजारने लगे थे। फिर एक दिन मैंने उसको रेस्टोरेंट में एक चुम्मा कर दिया, जिसकी वजह से वो गुस्सा हो गयी और बोली कि नहीं मयूर यह सही नहीं है, हमारा रिश्ता इन सब कामों की इज़ाज़त नहीं देता है। फिर मैंने भी उसको कहा कि यार मैंने तुम्हे बस एक बार चूमा ही तो है, कौन सा में कुछ और कर रहा हूँ? अब वो मान गयी और फिर मुझे जब भी कोई मौका मिलता, में एक चुम्मा उसको थमा देता और फिर हमारी ऐसे ही गाड़ी चलती रही, समय गुज़रता चला गया और ऐसे ही दो-तीन महीने निकल गये। एक दिन हम रेस्टोरेंट में बैठे थे, तब उसने मुझसे पूछा कि तुम मुझे यह बताओ कि मुझमें ऐसी क्या बात थी कि तुम मुझे प्यार करने लगे? तब मैंने उसको कहा कि शुरुआत में जब मैंने पहली बार तुम्हे देखा था, तब मुझे तुम्हारा यह चेहरा बड़ा ही मासूम सा लगा और मुझे तुम्हारा यह सुंदर चेहरा बड़ा अच्छा लगने लगा था, फिर तुम्हारा व्यवहार और अब तुम्हारा यह बदन मुझे अपनी तरफ आकर्षित करने लगा।

अब वो कहने लगी कि हाँ अब मुझे पता चला कि तुम मुझसे नहीं मेरे इस बदन से प्यार करते हो। तो तब मैंने कहा कि नहीं में तुम्हारी हर एक चीज से प्यार करता हूँ, तुम्हारे चेहरे से, व्यवहार से और इस बदन से भी और मैंने तुमसे यह कभी नहीं कहा था कि में तुम्हारा बदन को पसंद करता हूँ, लेकिन तुमने आज पूछा तो मैंने बता दिया, क्योंकि में तुमसे झूठ नहीं बोलूँगा में सच में तुम्हे सच्चा प्यार करता हूँ। अब उसने कुछ नहीं कहा और फिर हम दोनों रेस्टोरेंट में कॉफी पीकर वापस आ गये और अब वहाँ से आने के बाद तो उसके तेवर ही बदल गये थे। फिर मैंने उसके साथ बात करने की बहुत बार कोशिश कि, लेकिन वो मेरी तरफ ध्यान नहीं दे कर रही थी। फिर मैंने उसका फोन नम्बर एक लड़की से सर्च करवाया और उसको फोन किया। अब मैंने उसको पूछा क्या बात है? तब वो कहने लगी कि उस दिन तुम्हारी बात सुनकर मुझे लगा कि तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो और मुझे अहसास हुआ कि में भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन अब समस्या यह है कि मेरी शादी बहुत जल्दी हो जाएगी और तुम अभी बहुत छोटे हो। अब मैंने उसको कहा कि नहीं ऐसा नहीं है कि में छोटा हूँ, मेरी उम्र ही कम है बाकी मेरा सब काम शरीर की बनावट तो 20-21 साल के लड़को जैसी है।

अब वो कहने लगी कि जो भी हो रहोंगे तो छोटे ही ना, अभी तुम किसी भी तरह की जिम्मेदारी अपने सर नहीं ले सकते है, अगर हम शादी करने के बारे में भी सोचते है तो कुछ नहीं कर सकते। अब मुझे उसके मुहं से यह बात सुनकर बड़ा अज़ीब लगा और तब मैंने उसको कहा कि जो भी है में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ बाकी में कुछ नहीं जानता, जो होगा देखा जाएगा मुझे तुमसे मिलना है और अब तुम मुझे यह बताओ कि तुम मुझसे कब मिलोगी? फिर वो कहने लगी कि में कल फ्री हूँ अगर तुम चाहो तो मिल सकते हो। फिर मैंने यह बात सुनकर खुश होकर कहा कि हाँ ठीक है, कल मेरे सभी घरवाले भी बाहर जा रहे है तो तुम कल दोपहर के समय मुझसे मेरे घर पर मिलने आ जाना। अब उसने कहा कि हाँ ठीक है में चली आउंगी। दोस्तों में अब बड़ी बेसब्री से कल का इंतज़ार करने लगा था, जैसे तैसे वो दिन भी आ गया और वो दोपहर के समय मेरे घर आ गयी। फिर मैंने उसको ठंडा पिलाया और उसके पास जाकर बैठ गया और फिर में उसके कंधे पर अपना हाथ रखकर बोला कि क्या बात है, अब तुम पूरी तरह खुलकर बताओ? तब वो कहने लगी कि में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन जब में यह बात सोचती हूँ कि कभी भी हमारी शादी नहीं हो पाएगी तब मुझे अपने ऊपर बहुत गुस्सा आता है कि मैंने तुमसे प्यार ही क्यों किया था?

अब मैंने उसको बड़े प्यार से समझाते हुए कहा कि स्नेहा जो भी होना था वो सब हो चुका है, अब हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते है और यह कहते-कहते मैंने उसको एक बार चुम्मा कर दिया। फिर उसने कुछ नहीं कहा और ना ही बिल्कुल भी विरोध किया जिसकी वजह से मुझे लगा कि आज रास्ता साफ है, जरुर कुछ हो सकता है। अब दोस्तों आप लोग तो अच्छे से जानते ही हो हम लड़को की आदत को कुछ भी हो जाए मौके की तलाश में तो हम कुत्ते की तरह घूमते है। फिर मैंने उसको दोबारा चुम्मा किया, लेकिन तब भी उसने कुछ नहीं कहा। अब मैंने अपने दोनों हाथों को उसके चेहरे पर ले जाकर उसके चेहरे को ऊपर उठाया और उसके माथे पर एक चुम्मा किया। फिर उसी समय उसने भी मुझे अपने गले से लगा लिया, आज पहली बार में किसी लड़की को गले से लगा रहा था तो मुझे इसलिए बड़ा ही अज़ीब सा महसूस हो रहा था। फिर मैंने उसके होंठो पर चूमना शुरू किया जिसकी वजह से मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर मैंने उसको एक लंबा सा चुम्मा किया और अब वो भी मेरा साथ दे रही थी। फिर उसके बाद मैंने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और अब मेरा उसको चूमना लगातार जारी था। फिर उसने अपने हाथ से मेरा हाथ हटाया, तब मैंने भी अपने हाथ हटा दिया।

फिर मैंने अपना हाथ उसके बूब्स पर रखा, लेकिन तब भी उसने कुछ नहीं कहा जिसकी वजह से मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ गई। अब में उसके सूट के ऊपर से ही उसके बूब्स को दबाने लगा था यह सब करने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, क्योंकि सब कुछ में पहली बार असली में कर रहा था, मैंने इससे पहले सब कुछ सेक्सी फिल्मों में ही देखा था, लेकिन इस बार सब असली में था। फिर में कुछ देर तक उसके बूब्स को दबाता रहा और उसको चूमता प्यार करता रहा और फिर उसके बाद मैंने अपना एक हाथ उसके सूट के अंदर डाल दिया और में उसके बूब्स को दबाने लगा था। फिर पहले तो वो थोड़ा सा कसमसाई, लेकिन फिर उसको भी शायद मेरे साथ यह सब करने में मज़ा आने लगा था। अब मैंने सही मौका और उसका जोश देखकर उसका सूट ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया। तब उसने थोड़ा सा विरोध जरुर किया और वो मुझसे कहने लगी कि तुम यह क्या कर रहे हो? अब मैंने उसको कहा कि में तुमसे प्यार कर रहा हूँ, स्नेहा ना जाने मुझे तुमसे इतना प्यार करने का मौका बाद में कभी मिले ना मिले, इसलिए प्लीज तुम आज अभी मुझे थोड़ा सा प्यार करने दो मुझे मना मत करो प्लीज। फिर उसने मेरे मुहं से यह बात सुनकर कुछ नहीं कहा और में अपना काम करता रहा और फिर मैंने उसका सूट उतार दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने सलवार और समीज में थी।

फिर मैंने उसको खड़ा किया और में उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और पीछे से उसका मुँह घुमाकर में उसको चूमने प्यार करने लगा और अपने एक हाथ से उसके बूब्स को भी दबा रहा था और अपने दूसरे हाथ से में उसकी चूत को सहला रहा था। अब मैंने देखा कि उसका जोश धीरे धीरे बढ़ता ही जा रहा था और उसका जोश देखकर मैंने उसकी समीज को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने बस ब्रा और सलवार में थी, में पहली बार किसी लड़की को ब्रा में देख रहा था और उस द्रश्य को देखकर में एकदम पागल हो रहा था। अब मुझे लगने लगा कि कहीं मेरा लंड मेरी अंडरवियर को फाड़कर बाहर ना आ जाए। फिर में उसके बूब्स को उसकी ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा था और उसकी सलवार के बाहर से उसकी चूत में उंगली करने लगा था। अब मैंने अपनी टी-शर्ट और जींस को उतार दिया और उसकी सलवार को भी उतार दिया थी। अब वो केवल ब्रा और पेंटी में थी और में अंडरवियर और बनियान में था। अब वो मुझसे चिपक गयी और मुझे पागलों की तरह चूमने सहलाने प्यार करने लगी थी और में भी कुछ कम नहीं था। फिर में भी उसको लगातार चूमता रहा और साथ ही में उसके बूब्स को भी दबाता रहा और उसकी पेंटी के बाहर से ही उसकी चूत में उंगली करता रहा।

अब मैंने अपने एक हाथ को पीछे ले जाकर उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया और उसकी ब्रा को भी उतार दिया आह्ह्ह ऊफ्फ्फ वाह क्या मस्त बूब्स थे? उसके दूध जैसे सफेद, एकदम गोलमटोल, मुलायम हाथ लगाने से कहीं खराब ना हो जाए और यही बात सोचकर मुझे जोश पहले से ज्यादा चढ़ने लगा था में बिल्कुल पागल हो चुका था। फिर उसकी ब्रा को उतारते ही मैंने उसके बूब्स को अपने हाथों में ले लिया और में दबाने लगा वाह क्या मस्त अंग होता है बूब्स भी दोस्तों? उनको दबाने में बड़ा मस्त मज़ा आता है, वाह क्या मुलायम बूब्स थे? फिर मैंने उसका एक निप्पल अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। अब उसके मुँह से सिसकी निकल गयी और वो आहें भरने लगी थी, मैंने उसकी पेंटी को भी उतार दिया और अपने बाकी कपड़ो को भी उतार दिया और अब हम दोनों नंगे हो गये थे और एक दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने उसको लेटा दिया और उसके ऊपर आकर में उसको चूमने लगा था और उसके बूब्स को दबाने लगा था। फिर में थोड़ा सा खड़ा हो गया और उसकी चूत में मैंने अपना सात इंच का लंड डाल दिया, लेकिन यह क्या? मेरे लंड ने तो पहले झटके में ही अपना पानी छोड़ दिया था और धीरे धीरे वो मुरझाने लगा था। अब मुझे सब कुछ पता लगा कि में पहली बार में ज्यादा ही गरम हो गया था इसलिए यह सब इतना जल्दी मेरे साथ हुआ।

फिर में उठा और अपना लंड धोकर एक मिनट में वापस आ गया, उसके बाद मैंने पास आकर उसके बूब्स को सहलाना शुरू किया। अब वो भी मेरा साथ देते हुए मेरा पूरा बदन अपने नरम मुलायम हाथों से सहलाकर मुझे गरम कर रही थी और जिसकी वजह से कुछ देर बाद ही धीरे-धीरे मेरा लंड खड़ा होने लगा था और अब में सवारी करने के लिए पूरा तैयार था। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुहं पर रखा और एक झटके में अपना आधा लंड उसकी चूत के अंदर डाल दिया। तब वो दर्द की वजह से बहुत तेज चिल्ला पड़ी, उसकी चीखने की आवाज को सुनकर मुझे डर लगा और में सोचने लगा साली इतनी तेज़ चिल्ला रही है जैसे अपनी माँ को आने का न्योता दे रही हो। अब डर की वजह से मेरी गांड फट गयी थी और फिर मैंने अपना लंड थोड़ा सा उसकी चूत से बाहर निकाल लिया। फिर एक मिनट के बाद उसके शांत हो जाने पर मैंने अपना लंड धीरे-धीरे वापस अंदर डालना शुरू किया और अब अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया। अब मैंने धीरे धीरे झटके मारने शुरू किए और तब उसके मुँह से वो आवाज़े निकलती रही आह्ह्ह्हह्ह ऊह्ह्ह ओह्ह्हह्ह् में मर गई प्लीज अब बस भी करो इसको बाहर निकाल दो।

दोस्तों में उसकी किसी भी बात को अनसुना करके अपनी तरफ से वैसे ही लगातार धक्के देकर उसकी चुदाई करता रहा, जैसे कि मुझे उसके दर्द से कोई मतलब ही ना हो और कुछ देर बाद उसका वो दर्द मज़े में बदल गया। अब वो मुझसे पहले से भी ज्यादा और लगातार धक्के देने और उसकी जमकर चुदाई करके उस प्यासी चूत को ठंडा करने उसके जिस्म की आग को बुझाने के लिए मुझसे आग्रह करने लगी थी। दोस्तों में उसका वो जोश देखकर अब ज्यादा पागल होकर उसको बिना रुके तेज धक्के देकर चोदने लगा था। फिर करीब पांच-छे मिनट के बाद हम दोनों ने अपना-अपना पानी छोड़ दिया और हम दोनों एकदम बेहाल होकर एक दूसरे से चिपककर लेट गये, उसने अपना मुहं शरम की वजह से मेरी छाती में छुपा रखा था और फिर पांच मिनट के बाद हम उठे। अब वो जल्दी जल्दी कपड़े उठाकर पहनने लगी और वो मुझसे कहने लगी कि मुझे अब घर जाना है, में बाद में आऊंगी और फिर इतना कहकर वो मेरे घर से तुरंत बाहर चली गयी। अब में उठकर दरवाजा बंद करके वापस लेटकर बस उसी के बारे में बहुत देर तक सोचता रहा करीब आधे घंटे के बाद मैंने उठकर होश में आकर नहाकर कपड़े पहन लिए। दोस्तों में सच कहता हूँ कुछ भी कहो, लेकिन उस पहली चुदाई का मज़ा मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है मेरे मन में वो बात आज भी रोमांच भर देती है।

फिर उस पहली चुदाई के बाद मुझे उसको दोबारा कभी छुने तक का भी मौका नहीं मिला, लेकिन वो तो मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे सही समय पर उसकी चुदाई करने का मौका मिल गया, क्योंकि उसके बाद उसके बाप का तबादला कहीं दूसरे शहर में हो गया और वो मेरे शहर से बस दो सप्ताह के बाद ही चले गये, लेकिन उसका भाई अभी तक यहीं पर रहता है। फिर मुझे कुछ समय बाद पता चला कि अब वो एक शादीशुदा औरत बन चुकी है और यह बात भी तो दोस्तों करीब पांच साल पुरानी है। अब तो उसके एक बच्चा भी हो गया है, वो एक बार अपने भाई के पास आई थी और तब मैंने उसको देखा तो उसने मेरी तरफ एक बार मुस्कुराया भी था। फिर तब मैंने इस डर से उसके साथ बात करना उचित नहीं समझा कि वो कहीं अपने बच्चे से ना कह दे, देखो बेटा मामू आए है नमस्ते करो मामू को। दोस्तों आप लोग अच्छी तरह से समझ सकते हो अच्छा नहीं लगता, जिसको आपने चोदा हो उसके बच्चे आपको मामू कहे। दोस्तों यह था मेरे जीवन का पहला सेक्स अनुभव और यही मेरी आप सभी की सेवा में पहली कहानी भी है और में उम्मीद करता हूँ कि सभी पढ़ने वालों को यह जरुर पसंद आएगी।

धन्यवाद …


Source: http://www.kamukta.com/feed/

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